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स्टेम सेल कैप्सूल से हार्ट की कोशिकाएं खुद ही सही जाएगी-स्टडी

स्टेम सेल कैप्सूल से हार्ट की कोशिकाएं खुद ही सही जाएगी-स्टडी

 वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकी विकसित करने का दावा किया है जिसमें दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं अपने आप सही हो जाएगी. (Image: Shutterstock)

वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकी विकसित करने का दावा किया है जिसमें दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं अपने आप सही हो जाएगी. (Image: Shutterstock)

Stem cell capsules implanted on heart surface: हमारे जीवन के अस्तित्व के लिए दिल का बेहद महत्व है लेकिन बदलते लाइफस्टाइल के कारण दिल की सेहत सही नहीं रहती. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल 1.79 करोड़ लोगों की मौत दिल से संबंधित बीमारियों के कारण होती है. इसके लिए खून की नलियों (blood vessels) में संकुचन जिम्मेदार है. इस सबका असर हार्ट पर होता है. खून की नलियों (blood vessels) में ज्यादा दबाव होता है तो दिल (Heart) पर अतिरिक्त जोर पड़ता है. इस कारण दिल की कोशिकाओं क्षतिग्रस्त होने लगती है. अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकी विकसित करने का दावा किया है जिसमें दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं अपने आप सही हो जाएगी.

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    Stem cell capsules implanted on heart surface: बदलते लाइफस्टाइल का सबसे बड़ा दुष्परिणाम है दिल से संबंधित बीमारियां (Cardiovascular diseases -CVDs). इतना ही नहीं, दिल की बीमारियां मौत की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक हर साल 1.79 करोड़ लोगों की मौत दिल से संबंधित बीमारियों के कारण होती है. दिल से संबंधित बीमारियों में कई तरह की बीमारियां हैं जिनमें हार्ट अटैक (Heart attack), हार्ट फेल्योर, स्ट्रोक (Stroke) आदि शामिल हैं. इसके लिए खून की नलियों (blood vessels) में संकुचन जिम्मेदार है.

    इस सबका असर हार्ट पर होता है. खून की नलियों (blood vessels) में ज्यादा दबाव होता है तो दिल (Heart) पर अतिरिक्त जोर पड़ता है. दिल को ज्यादा मेहनत से ब्लड को पंप करना पड़ता है. इस कारण दिल की कोशिकाओं क्षतिग्रस्त होने लगती है. इस स्थिति में हार्ट अटैक आ जाता है. अब वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीकी विकसित करने का दावा किया है जिसमें दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं अपने आप सही हो जाएगी.

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    क्षतिग्रस्त कोशिकाएं ढ़ाई गुना तेजी से सही हो जाएगी

    साइंसडेली की खबर के मुताबिक इस तकनीक में जोखिम वाले मरीजों को शिल्डिंग (सुरक्षा कवच से घिरा) स्टेम सेल की मदद से इलाज किया जाएगा. इस तकनीक में स्टेम सेल कैप्सूल को हार्ट की सतह पर इंप्लांट कर दिया जाएगा. स्टेम सेल वह बुनियाद सेल यानी कोशिका है जो अपनी जीन इंजीनियरिंग के माध्यम से अन्य कोशिकाओं में विभिन्न तरह की गड़बड़ियों को सही कर सकती है. यह एक तरह से मास्टर कोशिकाएं होती हैं.

    बायलर कॉलेज ऑफ मेडीसिन (Baylor College of Medicine) और राइस यूनिवर्सिटी (Rice University ) के बायोइंजीनियर ने अपने शोघ में पाया है कि अगर हार्ट अटैक के मरीज को शिल्डेड स्टेम सेल में नए जैव पदार्थ मिला कर दिया दिल में प्रत्यारोपित कर दिया जाए तो हार्ट की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं ढ़ाई गुना तेजी से सही हो सकती है.

    लंबे समय तक बाहरी तत्वों से रक्षा करती है कोशिकाएं

    शोधकर्ताओं ने घाव को भरने वाले मेजेनकाइम स्टेम सेल्स (mesenchymal stem cells) में कुछ जैव पदार्थ मिलाकर इसे कैप्सूल की तरह बना दिया और इसे हार्ट अटैक वाले चूहों में प्रत्यारोपित कर दिया. सिर्फ चार सप्ताह के अंदर देखा गया कि इनमें हार्ट की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं ढाई गुना तेजी से सही हो रही है. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन चूहों में शिल्डेड स्टेम सेल प्रत्यारोपित की गई थी उनके दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं दूसरे समूह के चूहों के मुकाबले ढ़ाई गुना तेज रफ्तार से सही हो गई.

    बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसीन के प्रोफेसर रवि घांता ने बताया कि अध्ययन में हमने पाया है कि अगर स्टेम कोशिकाओं में कुछ जैविक तत्वों को मिलाकर शिल्डेड कैप्सूल तैयार किया जाए और इसे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के पास प्रत्यारोपित कर दिया जाए तो नए ऊतकों के विकास की उनकी क्षमता ढाई गुना बढ़ जाती है. क्योंकि कोशिकाओं का लंबे समय तक बाहरी तत्वों से सुरक्षित रहना इसकी मुख्य वजह है.

    Tags: Health, Lifestyle

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