वेजिटेरियन हैं लेकिन खाते हैं मीट भी! फ्लेक्सिटेरियंस तो नहीं आप ?

फ्लेक्सिटेरियन बनें और रहें सेहतमंद.
Image:pexels-sunsetoned

फ्लेक्सिटेरियन बनें और रहें सेहतमंद. Image:pexels-sunsetoned

Flexitarian Movement:यदि आप एक ही वक्त में अपने प्लैनट (Planet) यानी अर्थ (Earth) की मदद करना और सेहतमंद भी रहना चाहते हैं तो फिर फ्लेक्सिटेरियन (Flexitarian) बनने की सोच सकते हैं.

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Flexitarian Movement: बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय चिंताओं ने हमें अपने प्लैनेट (Planet) के बारे सोचने के लिए मजबूर कर दिया है ऐसे में इसे बचाने और जीने के लिए हम अब ऐसे रास्ते तलाशने लगे हैं जिसमें दोनों का ही फायदा हो. हम कोशिश कर रहे हैं कि किसी भी तरह से अपनी आदतों में बदलाव लाकर पृथ्वी यानी अर्थ (Earth) को बचाया जा सके ताकि यह हमारे रहने लायक बनी रहे. इन बदलावों में फिर चाहे वह हमारी फूड संबंधी आदतों में ही बदलाव क्यों न हो.एक ही वक्त में खुद और अपनी दुनिया की सेहतमंदी के लिए फ्लेक्सिटेरियन डाइट (Flexitarian Diet) अस्तित्व में आई और इसे फॉलो करने वाले को कहा गया फ्लेक्सिटेरियंस (Flexitarians).आइए जानते हैं इसके बारे में.

कहां से आया शब्द फ्लेक्सिटेरियनः  

मशहूर अमेरिकन डायटिशियन डॉन जैक्शन ब्लैटनर (Dawn Jackson Blatner) की साल 2009 में लिखी गई किताब "द फ्लेक्सिटेरियन डाइट: द मोस्टली वेजीटेरियन वे टू लूज़ वेट, बी हेल्दियर, प्रिवेंट डिज़ीज़ एड इयर्स टू योर लाइफ़," से फ्लेक्सिटेरियन शब्द प्रचलन में आया. इसमें उन्हें लिखा सेहतमंद रहने के लिए किसी को भी मांस का सेवन पूरी तरह से छोड़ने की जरूरत नहीं है. इसकी जगह, वे अपनी वेजीटेरियन डाइट में थोड़ा लचीले हो सकते हैं और प्लांट बेस्ड आहार में कभी -कभार सीमित मात्रा में मांस वाले भोजन को शामिल कर सकते हैं. वह मानती है कि प्लांट बेस्ड फूड कैलोरी में कटौती करने का एक स्मार्ट और अहम तरीका है. लेकिन वह जानती है कि हर कोई सौ फीसदी शाकाहारी बनने के लिए तैयार नहीं है. फ्लेक्सिटेरियन को लचीले शाकाहारी भी कहा जाता है, क्योंकि वे बहुत कम मांस खाते हैं, लेकिन वे इसे पूरी तरह से नहीं छोड़ते हैं.



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फ्लेक्सिटेरियनवाद या मूवमेंटः  

फ्लेक्सिटेरियनवाद या कैजुअल वेजीटेरिनिज्म (Flexitarianism or ‘casual vegetarianism) तेजी से मशहूर होती एक प्लांट बेस्ड डाइट है जिसमें यह दावा किया जाता है वह आपके कार्बन फुट प्रिंट में कमी लाने के साथ ही आपकी अधिकांशतः शाकाहारी आहार वाली दिनचर्या में कभी कभार मांसाहार की परमिशन देकर आपकी सेहत में सुधार करती है. फ्लेक्सिटेरियन डाइट के लिए लोगों में क्रेज इसलिए भी बढ़ रहा है कि लोग अब पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मांस की खपत कम करने के लिए प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों को तलाश रहे हैं. बढ़ते फ्लेक्सिटेरियन मूवमेंट के पीछे एक वजह यह भी है कि ज्यादातर लोग अपने आहार को फ्लेक्स करना पसंद कर रहे हैं क्योंकि यह उनके स्वस्थ खाने के लक्ष्यों को अधिक टिकाऊ बनाता है. लोग मानते हैं कि एक लचीली जीवन शैली उन्हें उनके पंसदीदा खाद्य पदार्थों से खुद को वंचित किए बिना स्वस्थ खाने और रहने की ताकत दे सकती है. इसके साथ ही फ्लेक्सिंग डाइट लोगों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ महसूस कराती है, उन्हें प्लैनेट के प्रति जागरूक रहने और अपने बच्चों के लिए एक बेहतरीन उदाहरण पेश करने में मदद करती है.

फ्लेक्सिटेरियन डाइटः  

फ्लेक्सिटेरियन डाइट आपके खाने में नए खाद्य पदार्थों को शामिल करने के बारे में है हालांकि यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद चीजों को खाने से बाहर करने की पक्षधर नहीं है. इस प्लांट बेस्ड डाइट के खाद्य पदार्थों में दाल, बीन्स, मटर, नट्स और बीज, प्रोटीन के सभी बेहतरीन सोर्स शामिल हैं. यह भी बड़े तौर पर स्वीकार किया जाता है कि दाल और बीन्स में पाए जाने वाले घुलनशील फाइबर हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करते हैं, इसलिए इनको खाने में नियमित रूप से लेने की सलाह दी जाती है. नट्स और बीज जैसे अलसी, पाइन नट्स, तिल के बीज, सूरजमुखी के बीज और अखरोट में हार्ट को सेहतमंद रखने वाले पॉलीअनसेचुरेटेड फैट की भरपूर मात्रा होती है. जो शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल के लेवल और जरूरी फैटी एसिड को बनाए रखने में मदद करते हैं. इस डाइट में एक दिन में फल और सब्जियों के कम से कम पांच हिस्से और साबुत खाद्य पदार्थ होने चाहिए.इसमें लीन मीट यानी बगैर चर्बी का मीट जैसे चिकन और टर्की लिया जा सकता है. शुरुआत में सप्ताह में दो दिन और इसके बाद चार से पांच या उससे अधिक दिनों तक मीट के बगैर रहने की सलाह दी जाती है.

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इस डाइट के फायदेः  

अधिकतर वक्त मांस के बगैर रहें, इससे आप अपना वजन कम कर पाएंगे और आराम से सेहतमंद रह पाएंगे. यह फ्लेक्सिटेरियन डाइट का मिशन है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के शोध में पाया गया कि हर दिन 50 ग्राम प्रोसेस्ड मीट खाने से कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए इन खाद्य पदार्थों को सीमित करना सबसे अच्छा है और फ्लेक्सिटेरियन डाइट में इसका खास ख्याल रखा जाता है.

शोध से पता चला है कि फ्लेक्सिटेरियन डाइट के साथ समान तौर पर शारीरिक गतिविधि का अभ्यास करना ऐसी लाइफ स्टाइल को बढ़ावा देता है जिससे ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है.

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प्लांट बेस्ड डाइट में सैचुरेटेड फैट कम होता है और ये कोलेस्ट्रॉल फ्री होती है. इससे हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज सहित कई सेहत संबंधी परेशानियों को दूर करने और इलाज में मदद मिल सकती है.

रिसर्च से पता चलता है कि मांस खाने वाले लोगों की तुलना में शाकाहारी लोगों का वजन कम बढ़ता है. इसके अलावा, पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थ जैसे कि फल और सब्जियां आम तौर पर पोषण में उच्च और कैलोरी में कम होते हैं जो हार्ट हेल्दी डाइट का अहम हिस्सा है.

भारत में भी ऐसे खाद्य उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ रहा है, जिनमें एनिमल बेस्ड फूड के गुण है,लेकिन वास्तव में वे शुद्ध और पूरी तरह से पौधे से प्राप्त किए जाते हैं. कई कंपनियां प्लांट-बेस्ड मीट के ऑप्शंस दे रही हैं. इनमें डेयरी के विकल्प दूध से लेकर मेयोनीज तक शामिल हैं. हालांकि भारत में यह नया नहीं है भारतीय सदियों से नारियल के दूध का सेवन करते आ रहे हैं.(Disclaimer:इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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