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खराब पाचन से हैं परेशान? आयुर्वेद के अनुसार रोजाना की इन गलतियों से बचना है जरूरी

पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए हमें अपनी लाइफ स्‍टाइल में बदलाव लाने की जरूरत पड़ती है. (फोटो-canva.com)

पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए हमें अपनी लाइफ स्‍टाइल में बदलाव लाने की जरूरत पड़ती है. (फोटो-canva.com)

कई बार हम जो भी खाते हैं, उसे पचाने में समस्‍या आती है, क्योंकि आपका पाचन तंत्र आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को आवश्यक पोषक तत्वों में तोड़ता है. ऐसे में पाचन प्रणाली को नजरअंदाज करें तो हमें पर्याप्‍त भोजन करने के बावजूद भरपूर पोषण नहीं मिलता.

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Poor Digestion according to Ayurveda: पेट आपकी हेल्थ को बनाए रखने में सबसे अहम भूमिका निभाता है. जब आप ये मॉनीटर करते हैं कि आप क्या खाते हैं, तो आप सबसे पहले ये सुनिश्चित करते हैं कि आप अपने पेट को केवल जरूरी चीजें ही दे रहे हैं, जंक फूड नहीं. लेकिन, आयुर्वेदिक डॉक्टर दीक्षा भावसार सावलिया के अनुसार, एक अच्छी हाइट लेने के अलावा, डाइजेशन में सुधार के लिए कुछ डेली प्रैक्टिस से बचना चाहिए. दरअसल, कई बार हम जो भी खाते हैं, उसे पचाने (Digestion)  में समस्‍या आती है, क्योंकि आपका पाचन तंत्र आपके द्वारा खाए जाने वाले भोजन को आवश्यक पोषक तत्वों में तोड़ता है. ऐसे में अगर हम अपने डाइजेशन सिस्‍टम को नजरअंदाज करें, तो हमें पर्याप्‍त भोजन करने के बावजूद भरपूर पोषण नहीं मिलता.

पाचन तंत्र को ठीक रखने के लिए हमें अपने लाइफस्‍टाइल (Lifestyle) में बदलाव लाने की जरूरत पड़ती है. आयुर्वेदिक डॉ. दीक्षा भावसार ने अपने इंस्टाग्राम पर उन 5 गलतियों के बारे में बताया है, जिनसे हमें बचना चाहिए.

भोजन के ठीक बाद नहाना
आयुर्वेद के अनुसार शरीर पांच तत्वों से बना है. इनमें से भोजन करने के बाद अग्नि तत्व एक्टिव हो जाता है. ये भोजन के पाचन के लिए जिम्मेदार तत्व है. लेकिन जब हम खाना खाने के तुरंत बाद नहाते हैं, तो शरीर का तापमान कम हो जाता है और इसलिए डाइजेशन प्रोसेस धीमा हो जाता है. उचित पाचन के लिए आपके भोजन और नहाने के बीच कम से कम 2 घंटे का गैप होना चाहिए.

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भोजन के ठीक बाद चलना
जब हम चलते हैं, तैरते हैं या खाने के ठीक बाद व्यायाम करते हैं, तो वात दोष तीव्रता से एक्टिव होता है. ये अनुचित पाचन (improper digestion) की ओर जाता है और इसलिए न्यूट्रीएंट्स पूरी तरह से अब्जॉर्ब नहीं हो पाते और आगे चलकर ये कई परेशानियों का कारण बनता है, जो बाद में बीमारी पैदा कर सकती है.

दोपहर 2 बजे के बाद भोजन करना
आयुर्वेद के अनुसार जब सूर्य आकाश में अपने चरम पर होता है, तब शरीर में पित्त सबसे अधिक होता है. ये प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच होता है. चूंकि पित्त आसान पाचन में मदद करता है, इसलिए पाचन संबंधी समस्याओं से बचने के लिए व्यक्ति को दिए गए समय में दोपहर का भोजन करना चाहिए. यही कारण है कि दोपहर के भोजन को दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है और ये हमेशा हेवी होना चाहिए.

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रात में दही खाना
रात में, पित्त दोष के साथ कफ दोष हमेशा प्रबल होता है. रात में दही खाने से शरीर में कफ की अधिकता हो सकती है, जिससे पाचन क्रिया (डाइजेस्टिव सिस्टम) बाधित हो सकती है. इससे रात भर पेट में दही जमा रहता है और अगली सुबह कब्ज हो जाती है.

भोजन के ठीक बाद सोना
सोने के लिए जाने से कम से कम तीन घंटे पहले दिन का अपना अंतिम भोजन करना चाहिए. ऐसा इसलिए है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार, रात में शरीर की ऊर्जा दो प्रमुख चीजों पर केंद्रित होती है – बॉडी को हील (इलाज) करना, दिमाग को दिन से विचारों, अनुभवों और भावनाओं को “पचाने” में मदद करना. यदि हम सोने से ठीक पहले कुछ भी खाते हैं, तो ये इन दो क्रियाओं से एनर्जी को  डाइजेशन की फिजिकल एक्टिविटी में बदल देता है. इससे मेंटल डाइजेशन और फिजिकल हीलिंग प्रोसेस रुक जाता है.

यदि आप हाल ही में पाचन संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तो अपनी डेली लाइफ में इन टिप्स का यूज करके आंत के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिश करें.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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