होम /न्यूज /जीवन शैली /

वैक्सीन से भी हो सकेगा स्किन कैंसर से बचाव, अमेरिकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा

वैक्सीन से भी हो सकेगा स्किन कैंसर से बचाव, अमेरिकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा

यूवी रेज के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जिससे मेलानोम जैसे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ता है. (फोटो-canva.com)

यूवी रेज के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जिससे मेलानोम जैसे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ता है. (फोटो-canva.com)

Vaccines can also prevent skin cancer : ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी (OSU) के कॉलेज ऑफ फार्मेसी रिसर्चर्स ने स्किन कैंसर से बचाव की एक वैक्सीन डेवलप की है. ये वैक्सीन स्किन में एक ऐसे प्रोटीन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जो एंटी ऑक्सीडेंट नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण होता है और उससे स्किन कैंसर से सुरक्षा मिलती है. रिसर्चर्स ने माउस मॉडल पर प्रोटीन टीआर1 (TR1) का स्किन सेल्स की हेल्थ और उसकी स्थिरता की स्टडी की. स्किन कैंसर में मेलानोमा (melanoma) सबसे खतरनाक होता है. त्वचा के अधिकांश कैंसर अल्ट्रावॉयलेट रेज (ultraviolet rays) से जुड़ा होता है.

अधिक पढ़ें ...

Vaccines can also prevent skin cancer : अमेरिका की ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी (OSU) के कॉलेज ऑफ फार्मेसी रिसर्चर्स ने स्किन कैंसर से बचाव की एक वैक्सीन डेवलप की है. ये वैक्सीन स्किन में एक ऐसे प्रोटीन के प्रोडक्शन को बढ़ाता है, जो एंटी ऑक्सीडेंट नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण होता है और उससे स्किन कैंसर से सुरक्षा मिलती है. रिसर्चर्स ने माउस मॉडल पर प्रोटीन टीआर1 (TR1) का स्किन सेल्स की हेल्थ और उसकी स्थिरता की स्टडी की. स्किन कैंसर में मेलानोमा (melanoma) सबसे खतरनाक होता है. त्वचा के अधिकांश कैंसर अल्ट्रावॉयलेट रेज (ultraviolet rays) से जुड़ा होता है. मेलानोमा के प्रति लोगों को जागरुक करने के बावजूद अल्ट्रावॉयलेट रेज लगातार बढ़ रही है और इससे मेलेनोमा के मामलों में बी बढ़ोतरी हो रही है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘जर्नल ऑफ इन्वेस्टिगेटिव डर्मटलॉजी (Journal of Investigative Dermatology)’ में प्रकाशित किया गया है.

रिसर्चर्स ने बताया कि करीब 40 सालों की स्टडी में पाया गया कि एंटीऑक्सीटेंड वाला भोजन कैंसर की रोकथाम के लि किफायती र कम रिस्क एजेंट का सोर्स हो सकता है. लेकिन ये हमेसा कारगर नहीं होता है कुछ मामलों में तो ये नुकसानदेह भी साबित हुआ है. ऐसे में रोकथाम के लिए एमआरएनए (mRNA)जैसे नए कीमो एजेंट को आजमाए जाने की जरूरत है.

क्या कहते हैं जानकार
ओएसयू के फार्मास्युटिकल साइंसेज के प्रोफेसर अरूप इंद्र ने बताया कि सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रा वॉयलेट रेज के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा होता है, जिससे मेलानोम जैसे स्किन कैंसर का रिस्क बढ़ता है.

यह भी पढ़ें-
क्या है ‘टॉक्सिक मैस्कुलिनिटी’ और ये पुरुषों को कैसे प्रभावित करती है, जानिए

उन्होंने बताया कोविड-19 के लिए जिस तरह से मॉर्डना और फाइजर की वैक्सीन बनी है, उसी तर्ज पर मैसेंजर आरएनए (mRNA) वैक्सीन स्किन में टीआर1 प्रोटीन के उत्पादन को बढ़ावा देता है. उससे अल्ट्रा वॉयलेट किरणों से होने वाले कैंसर और स्किन की अन्य समस्याओं का निदान किया जा सकेगा.

कैसी है ये नई वैक्सीन
टीआर1 का मतलब थियोरेडोक्सीन रीडक्टेज 1 है. रीडक्टेज एक ऐसा एंजाइम है जो रीडक्शन प्रतिक्रिया को बढ़ाता है, जिससे केमिकल स्पेसीज सामान्य तौर पर रेडॉक्स प्रतिक्रिया के तहत इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है और अन्य स्पेसीज में ऑक्सीडेशन होता है या इलेक्ट्रॉन का नुकसान.

यह भी पढ़ें-
टीबी के इलाज में भी कारगर हो सकती है कैंसर की दवा- स्टडी

टीआर1 मेलानोसाइट्स ऑक्सीडेंट सिस्टम का एक महत्वपूर्ण अवयव है. एंटीऑक्सीडेंट रिएक्टिव ऑक्सीजन (आरओएस) की प्रतिक्रिया से बचाव करता है. आरओएस सेल्स के मॉलीक्यूल में इलेक्ट्रॉन का शिकार करता है, जिससे डीएनए को नुकसान पहुंच सकता है.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर