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मल्टीपल स्केलेरोसिस के बेहतर इलाज का निकला रास्ता, कंट्रोल होगा साइड इफेक्ट - स्टडी

स्टडी में मल्टीपल स्केलेरोसिस ड्रग सिपिनमोड  के मॉलीक्यूलर स्ट्रक्चर का सटीक विश्लेषण किया गया है. (फोटो-canva.com)

स्टडी में मल्टीपल स्केलेरोसिस ड्रग सिपिनमोड के मॉलीक्यूलर स्ट्रक्चर का सटीक विश्लेषण किया गया है. (फोटो-canva.com)

Better Treatment For Multiple Sclerosis : अमेरिका के वेल कॉर्नेल मेडिसिन एंड मेमोरियल स्लोआन केटरिंग कैंसर सेंटर (Weill Cornell Medicine and Memorial Sloan Kettering Cancer Center) के रिसर्चर्स ने अपनी नई स्टडी के जरिए ये पता लगया है कि मल्टीपल स्केलेरोसिस में दवाएं किस प्रकार से अपने लक्ष्य को निशाना बनाती है. इस खोज से बेहतर इलाज का रास्ता मिल सकता है.

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Better Treatment For Multiple Sclerosis : मल्टीपल स्केलेरोसिस (Multiple sclerosis) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें इम्यून सिस्टम तंत्रिकाओं (Nerves) के सुरक्षात्मक आवरण (protective covering) को खा जाती है. इसके इलाज के लिए फिजियोथेरेपी (physiotherapy) और दवाओं का प्रयोग होता है, जो इम्यून सिस्टम को दबाने या कमजोर करने का काम करता है. इससे इस बीमारी के लक्षणों का विकास धीमा हो जाता है, लेकिन इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाओं के अपने साइड इफेक्ट भी होते हैं. अब अमेरिका के वेल कॉर्नेल मेडिसिन एंड मेमोरियल स्लोआन केटरिंग कैंसर सेंटर (Weill Cornell Medicine and Memorial Sloan Kettering Cancer Center) के रिसर्चर्स ने अपनी नई स्टडी के जरिए ये पता लगया है कि मल्टीपल स्केलेरोसिस में दवाएं किस प्रकार से अपने लक्ष्य को निशाना बनाती है. इस खोज से बेहतर इलाज का रास्ता मिल सकता है.

इस स्टडी के दौरान रिसर्चर्स ने मल्टीपल स्केलेरोसिस ड्रग सिपिनमोड (siponimod) के मॉलीक्यूलर स्ट्रक्चर (आण्विक संरचना) का सटीक विश्लेषण किया है ये किस तरह से इंसानों में अपने लक्ष्य एस1पी रिसेप्टर (एस1पी1) के साथ प्रतिक्रिया करता है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘नेचर कम्यूनिकेशंस (Nature Communications)’ जर्नल में प्रकाशित किया गया है.

क्या कहते हैं जानकार
वेल कॉर्नेल मेडिसिन इंस्टीट्यूट (Weill Cornell Medicine Institute) में फिजियोलॉजी और बायोफिजिक्स के प्रोफेसर (Professor of Physiology and Biophysics) और स्टडी के वरिष्ठ लेखक डॉक्टर शिन युन हुआंग (Xin-Yun Huang) ने बताया कि इस स्टडी में इस्तेमाल होने वाली दवा में सुधार करने और उसके दुष्प्रभाव काम करने में मदद मिलेगी. मल्टीपल स्केलेरोसिस के रोगियों में इम्यून सेल, जिसे लिंफोसाइट्स कहते हैं, तंत्रिका कोशिकाओं यानी नर्व सेल्स (nerve cells) के इर्दगिर्द सुरक्षात्मक परत या कवच पर हमला कर उसे नष्ट करता है, जिससे नर्व्स में विकृति (distortion) संबंधी लक्षण दिखते हैं. अब साइंटिस्टों ने ऐसी दवा विकसित की है जो लिंफ नोड्स के एस1पी1 (s1p1) से जुड़कर लिंफोसाइंट्स के बनने को बंद कर देती है.

लेकिन इस श्रेणी की पहली पीढ़ी की दवा एस1पी3 (s1p3) रिसेप्टर को भी बांध सकती है, जिससे हार्ट गति के असामान्य होने जैसे अनवॉन्टेड साइड इफेक्ट भी होते हैं. इस समस्या से निजात पाने के लिए साइंटिस्टों ने सिपोनिमोड (siponimod) जैसी अगली पीढ़ी की दवा तैयार की है, जो आमतौर पर एस1पी1 और एस1पी5 (S1P1 and S1P5) नामक अन्य रिसेप्टर को अधिक सटीकता के साथ बांधती है. लेकिन ये भी साइड इफेक्ट पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई.

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इसी के मद्देनजर वेल कॉर्नेल मेडिसिन के रिसर्च एसोसिएट डॉक्टर शियान लियू (Dr. Shian Liu) और नविज पकनेजादी (Navid Paknejad) के नेतृत्व में की गई इस स्टडी में बताया गया है कि सिपोनिमोड (siponimod) किस प्रकार से उन दो रिसेप्टर से जुड़ते हैं और ऐसे कौन से मॉलीक्यूर गुण उन्हें अवांछित लक्ष्य एस1पी2, एस1पी3 और एस1पी4 (S1P2, S1P3 and S1P4) से जुड़ने से रोकता है. साइंटिस्ट इस जानकारी का इस्तेमाल ड्रग में सुधार लाने के लिए कर सकते हैं, जिससे एस1पी1 रिसेप्टर से वह मजबूती से जुड़ने में मदद करेगा और अवांछित लक्ष्य एस1पी5 से जुड़ने के जोखिम को कम करके दुष्प्रभाव को भी न्यूनतम करेगा.

स्टडी में क्या निकला
डॉक्टर शिन युन हुआंग (Xin-Yun Huang)  ने कहा कि ये नई संरचनात्मक सूचना से मल्टीपल स्केलेरोसिस की अगली पीढ़ी की दवा विकसित करने में मदद मिलेगी. इस स्टडी से ये भी पता चला कि स्वाभाविक रूप से जमा होने वाले लिपिड किस पर्कार से इम्यून सिस्टम, नवर्स सिस्टम और फेफड़े के कामकाज को नियंत्रित करती है. रिसर्चर्स ने ये भी पाया कि करीब-करीब एक जैसा लिपिड स्फिंगोसिन 1-फास्फेट और लाइसोफास्फेटिक एसिड (sphingosine 1-phosphate and lysophosphatidic acid)  जब अपने लक्ष्य से जुड़ते हैं तो आकार में बिलकुल भिन्न होते हैं.

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रिसर्चर्स का कहना है कि इस स्टडी का निष्कर्ष बताता है कि लिपिड आधारित दवाएं यदि सावधानीपूर्वक डिजाइन की जाए तो लक्ष्य पर सटीक निशाना हो सकता है. इसलिए जरूरत है कि लिपिड आधारित दवा बनाने की ताकि साइड इफेक्ट को कम किया जा सके.

Tags: Health, Health News, Lifestyle

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