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कोरोना मरीजों में वेट लॉस और कुपोषण का खतरा ज्यादा- स्टडी

वजन कम होने की समस्या उन मरीजों में ज्यादा हुई जो ब्लैक फंगस के शिकार हुए थे. (shutterstock.com)

वजन कम होने की समस्या उन मरीजों में ज्यादा हुई जो ब्लैक फंगस के शिकार हुए थे. (shutterstock.com)

Weight loss due to covid-19: कोरोना के कारण जिन लोगों को अस्पताल जाना पड़ा, उनमें से अधिकांश का वजन कम हो रहा है. कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित लोगों में यह समस्या ज्यादा आ रही है.

  • News18Hindi
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    Weight loss due to covid-19:अब यह बात लगभग सभी जान चुके हैं कि कोरोना संक्रमण के बाद मरीजों में इसके लक्षण बहुत दिनों तक कायम रहते हैं. कुछ मरीजों में साल भर बाद भी कोरोना के लक्षण दिखाई देते हैं. कोरोना के कारण शरीर के कई अंग और उनके काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. अब मेडिकल एक्सपर्ट की मानें, तो कोरोना से रिकवर होने के बाद मरीजों का वजन कम होने लगा है. कोरोना से गंभीर रूप से प्रभावित लोगों में यह समस्या ज्यादा आ रही है.

    इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक हालांकि इस बात पर अभी तक कोई स्पष्ट आंकड़ा नहीं आया है, लेकिन कुछ अध्यनों में यह बात प्रमाणित हुई है कि जिन कोरोना मरीजों को गंभीर स्थिति हो जाने के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था या उनका स्वाद चला गया था या सांस से संबंधित गंभीर समस्याएं हो गई थी, उन मरीजों में वजन कम हो रहा है. साथ ही ऐसे मरीजों में कुपोषण की परेशानी भी हो रही है.

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    ब्लैक फंगस के शिकार लोगों में ज्यादा खतरा
    नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंर्फोरमेशन (National Center for Biotechnology Information -NCBI) के अध्यन के मुताबिक कोरोना में गंभीर रूप से बीमार पड़े लोगों में वजन कम और कुपोषण का जोखिम बहुत ज्यादा रहता है. करीब 30 प्रतिशत मरीजों में बॉडी का वेट 5 प्रतिशत तक कम हुआ है. कोरोना के कारण गंभीर रूप से पीड़ित करीब आधे मरीजों पर कुपोषण का खतरा मंडरा रहा है.

    भाटिया अस्पताल में इंटरनल मेडीसिन के डॉ अभिषेक सुभाष ने बताया कि अधिकांश कोविड मरीजों में स्वाद और गंध चले जाने के कारण वजन कम हो रहा है. उन्होंने बताया कि यह समस्या उन मरीजों में ज्यादा गंभीर है जो म्यूकरमाइकोसिस (mucormycosis) यानी ब्लैक फंगस के शिकार हुए थे. ऐसे मरीजों में बीमारी के कारण हाई डोज एंटी फंगल दवाई दी गई, जिसके कारण मरीज में बेचैनी बढ़ गई और भूख लगने में दिक्कत हुई.

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    स्वाद और गंध में बदलाव के कारण भूख में कमी
    अध्यन में पाया गया कि स्वाद और गंध में बदलाव के कारण मरीज में थकान बहुत ज्यादा होने लगी और भूख की कमी हो गई. इसके अलावा घर पर आने के बाद फिजिकल गतिविधियां भी पूरी तरह बंद हो गई. इससे वजन में कमी आना स्वभाविक है. इसके साथ ही शरीर के अंदर सूजन की समस्या ने कुपोषण के जोखिम को भी बढ़ा दिया. यहां तक कि जिन कोरोना मरीजों को अस्पताल नहीं जाना पड़ा, उनमें से भी कुछ मरीजों में कुपोषण जैसी समस्याएं देखी गई.

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