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Bowel Cancer: घातक हो सकता है बाउल कैंसर के इन 12 लक्षणों को नजरअंदाज करना, जानें कारण, इलाज

क्या है बाउल कैंसर और कैसे नजर आते हैं इसके लक्षण, जानिए यहां.

क्या है बाउल कैंसर और कैसे नजर आते हैं इसके लक्षण, जानिए यहां.

What is Bowel Cancer: कैंसर कई तरह के होते हैं, उन्हीं में से एक है बाउल या आंत्र कैंसर (Bowel Cancer). बाउल कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर (colorectal cancer) के रूप में भी जाना जाता है. यह कैंसर आंतों की अंदरूनी परत से विकसित होता है और आमतौर पर इसमें पॉलिप्स (Polyps) की वृद्धि होती है. आइए जानते हैं क्या है बाउल कैंसर, इसके कारण, लक्षण और इलाज.

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What is Bowel Cancer: कैंसर (Cancer) शब्द सुनते ही लोग डर जाते हैं, क्योंकि यह बीमारी इतनी घातक होती है कि इसका इलाज समय पर ना शुरू किया जाए तो लोगों की जान चली जाती है. कैंसर कई तरह के होते हैं, उन्हीं में से एक है बाउल या आंत्र कैंसर (Bowel Cancer). बाउल कैंसर को कोलोरेक्टल कैंसर (colorectal cancer) के रूप में भी जाना जाता है. यह कैंसर आंतों की अंदरूनी परत से विकसित होता है और आमतौर पर इसमें पॉलीप्स (Polyps) की वृद्धि होती है. इसके बारे में सही समय पर पता ना चले तो यह घातर कैंसर बन सकता है. कैंसर की शुरुआत कहां से होती है, इसके आधार पर आंत्र कैंसर को कोलन (Colon cancer) या रेक्टल कैंसर (Rectal cancer) भी कहा जा सकता है.

कैंसर डॉट ओआरजी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों और महिलाओं में होने वाले कैंसर्स में से बाउल कैंसर तीसरा सबसे कॉमन कैंसर है और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह सबसे ज्यादा होता है. लगभग 90 % बाउल या आंतों का कैंसर एडेनोकार्सिनोमा (adenocarcinomas) होते हैं, जो आंत की लाइनिंग की ग्रंथियों के ऊतकों (Glandular tissues) में शुरू होते हैं. कुछ अन्य कम सामान्य प्रकार के कैंसर भी आंत को प्रभावित कर सकते हैं, जिसमें लिम्फोमा और न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर शामिल हैं. एक्सपर्ट के अनुसार, जिन लोगों को बाउल कैंसर होता है, उनके पांच साल तक जीवित रहने की संभावना 70% तक होती है.

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बाउल कैंसर के लक्षण

  • मल में खून आना
  • पेट में दर्द, क्रैम्प, ब्लोटिंग
  • गुदा या मलाशय में दर्द
  • बाउल हैबिट्स में बदलाव जैसे कब्ज, डायरिया होना
  • वजन का कम होना
  • बेवजह थकान महसूस करना
  • गुदा या मलाशय में गांठ
  • कमजोरी और थकान महसूस करना
  • एनीमिया, त्वचा का पीला होना
  • सांस लेने में तकलीफ महसूस करना
  • पेशाब में खून आना, बार-बार पेशाब लगना
  • पेशाब के रंग में बदलाव नजर आना

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बाउल कैंसर के कारण

  • अनुवांशिक जोखिम और पारिवारिक इतिहास
  • इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज जैसे क्रोन्स डिजीज
  • रेड मीट और प्रॉसेस्ड मीट का अधिक सेवन
  • पॉलिप्स
  • अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होना
  • अधिक एल्कोहल और धूम्रपान का सेवन

बाउल कैंसर का निदान
बाउल कैंसर के निदान में कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं. शुरुआत में डॉक्टर फिजिकल एग्जामिनेशन करके ये पता लगाने की कोशिश करते हैं कि मरीज को पेट में सूजन तो नहीं है. साथ ही डिजिटल रेक्टल एग्जामिनेशन के जरिए मलाशय (Rectum) या गुदा (Anus) में गांठ या सूजन होने की जांच करते हैं. इसके अलावा ब्लड टेस्ट, कोलोनोस्कोपी (Colonoscopy), एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan) आदि भी किया जाता है.

बाउल कैंसर का इलाज
शुरुआत में यदि बाउल कैंसर का पता चल जाए, तो इसे सर्जरी के जरिए ठीक करने की कोशिश की जाती है. कोलोन कैंसर के लिए सबसे कॉमन सर्जरी है कोलेक्टॉमी. इसके साथ ही रेडिएशन थेरेपी, कीमोथेरेपी आदि शामिल हैं.

बाउल कैंसर से बचाव के उपाय
बाउल कैंसर से बचना है तो धूम्रपान, एल्कोहल का सेवन कम से कम करना होगा. साथ ही हेल्दी डाइट लेनी होगी, जिसमें ताजे फल और सब्जियों भरपूर शामिल हों. रेड मीट का सेवन सीमित करना चाहिए. प्रोसेस्ड मीट से परहेज करें. स्वस्थ शरीर के लिए वजन कंट्रोल करें. इन उपायों को फॉलो करेंगे, तो काफी हद तक बाउल कैंसर होने के खतरे को कम किया जा सकता है.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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