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कहीं आप भी तो नहीं 'इमोशनल ईटिंग' के शिकार, जानें इसकी वजह और इससे उबरने के उपाय

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इमोशनल ईटिंग के लक्षण ज्यादा आम हैं.

पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इमोशनल ईटिंग के लक्षण ज्यादा आम हैं.

काम के तनाव, आर्थिक चिंता, स्वास्थ्य के मुद्दों से लेकर रिश्ते के संघर्ष तक, इनमें से कोई भी आपके इमोशनल ईटिंग का मूल कारण हो सकता है. अगर इमोशनल ईटिंग की आदत को जल्‍दी कंट्रोल नहीं किया गया, तो ये वजन बढ़ने और फिर कई खतरनाक बीमारियों का भी कारण बन सकता है. शोधों के मुताबिक, यह एक ऐसी समस्‍या है, जो दोनों लिंगों को प्रभावित करती है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके लक्षण ज्यादा आम हैं.

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How To Stop Emotional Eating : अक्‍सर ये देखा जाता है कि लोग तनाव और निगेटिव इमोशन से उबरने के लिए खाने को सबसे अच्‍छा जरिया मान बैठते हैं. स्‍ट्रेस हुआ नहीं कि उन्‍हें कुछ खास चीज खाने की क्रेविंग (Food Craving) होने लगती है. ऐसे में वे या तो ऑनलाइन पिज्‍जा या कोई फेवरेड डेजर्ट ऑर्डर करते हैं या फ्रिज में आइसक्रीम, चॉकलेट आदि खंगालने लगते हैं. लेकिन, इन्‍हें खाने के बाद भी आत्‍मसंतुष्‍टी नहीं होती और फिर पछतावा का दौर शुरू हो जाता है. दरअसल, ये ही इमोशनल ईटिंग के लक्षण हैं.

हेल्‍थलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, काम के तनाव से लेकर वित्तीय चिंताओं तक, स्वास्थ्य के मुद्दों से लेकर रिश्ते के संघर्ष, इनमें से कोई भी आपके इमोशनल ईटिंग का मूल कारण हो सकता है. अगर इमोशनल ईटिंग की आदत को जल्‍दी कंट्रोल नहीं किया गया, तो ये वजन बढ़ने और फिर कई खतरनाक बीमारियों के होने के खतरे को बढ़ा सकता है. शोधों के मुताबिक, यह एक ऐसी समस्‍या है, जो दोनों लिंगों को प्रभावित करती है, लेकिन पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसके लक्षण ज्यादा आम हैं.

 इमोशनल ईटिंग और भूख में क्‍या है अंतर
मायो क्‍लीनिक में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, इंसान को भूख लगना स्‍वाभाविक है. ऐसे में अगर इमोशनल और फिजिकल भूख में अंतर की बात करें तो फिजिकल भूख के लक्षण हैं- यह एक निश्चित समय पर हमें महसूस होता है, भूख लगने पर हमें वेरायटी फूड खाने की इच्‍छा होती है, खाने के बाद पेट भरा महसूस होता है, खाने के बाद निगेटिव फीलिंग नहीं होती, जबकि इमोशनल हंगर के लक्षण हैं- यह भूख एकाएक महसूस होती है. कुछ खास चीज खाने की ही क्रेविंग होती है. खाने के बाद भी मन भरा नहीं लगता और खाने के बाद गिल्‍टी जैसी फीलिंग होती है.

इमोशनल ईटिंग को कैसे करें कंट्रोल

ढूंडें विकल्‍प
तनाव दूर करने के लिए कुछ अन्‍य उपाय ढूंडें. मसलन आप किताबें पढ़ें, संगीत सुनें, किसी से फोन पर बात करें, गेम खेलें आदि.

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बॉडी को करें एक्टिव
शोधों में पाया गया है कि अगर आप अत्‍यधिक तनाव में हैं तो फिजिकल एक्टिविटी आपकी मदद कर सकती है. आप अगर 8 सप्‍ताह तक योगा करें तो आप इमोशनल ईटिंग और स्‍ट्रेस से खुद को उबार सकते हैं.

ध्‍यान करें
खुद को शांत रखने के लिए आप रोज ध्‍यान कर सकते हैं. कई शोधों में ये पाया गया है कि ध्‍यान की मदद से आप तनाव और ईटिंग डिसऑर्डर से उबर सकते हैं.

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फूड डायरी
आप जो भी खाते हैं उसे डायरी में लिखें. आपको कौन सी चीजें या बात ट्रिगर करती हैं या आप तनाव में कैसी चीजों के लिए क्रेविंग फील करते हैं ये सब उसमें मेंटेन करें. इसे आप अपने डॉक्‍टर के साथ भी शेयर कर सकते हैं.

फ्रिज में रखें हेल्‍दी चीजें
घर पर उन चीजों को ना रखें जो आपकी सेहत के लिए अच्‍छी नहीं. आप अपने फ्रिज में कुछ हेल्‍दी फूड ऑप्‍शन रखें.

खुद को करें ट्रेन्‍ड
जब भी आपको इमोशनल ईटिंग फील हो तो गहरी सांस लें और खुद पर कंट्रोल करने की कोशिश करें. आप ट्रिगर होने वाली बातों से खुद को उबारने के प्रयास करें. खुद से बात करें और खुद को सकारात्‍मक बात बोलें.

कब लें डॉक्‍टर की सलाह
दरअसल जब हम तनाव आदि में अनहेल्‍दी फूड  हैबिट के शिकार हो जाते हैं तो इससे कई तरह की सेहत से जुड़ी समस्‍या हो सकती है. यही नहीं, ये आपके शारीरिक और मानसिक दोनों ही सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं. ऐसे में खुद को नियंत्रित करने का प्रयास करें वरना आप कई जानलेवा डिजीज के भी शिकार हो सकते हैं. अगर आप खुद के इमोशन को कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं तो आप डॉक्‍टर की सलाह ले सकते हैं. इसके लिए आप जनरल डॉक्‍टर और साइक्रेटिस्‍ट दोनों की सलाह लेने मे हिचकें नहीं.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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