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किडनी की सेहत का हाल बता देगा ये 'टेस्ट', साल में एक बार जरूर करवा लें वरना...

किडनी की सेहत का हाल बताए किडनी फंक्शन टेस्ट. जानें कब करवाएं ये टेस्ट.

किडनी की सेहत का हाल बताए किडनी फंक्शन टेस्ट. जानें कब करवाएं ये टेस्ट.

Kidney Function Test: किडनी शरीर का एक बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है, जिसका काम होता है शरीर में मौजूद ब्लड से टॉक्सिक पदार्थों को निकालना, जो पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं. किडनी डिजीज होने पर लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं. ऐसे में किडनी स्वस्थ है या नहीं, इसके लिए 'किडनी फंक्शन टेस्ट' करवाना जरूरी होता है.

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What is Kidney Function Test: किडनी शरीर का एक बेहद ही महत्वपूर्ण अंग है. किडनी का काम होता है शरीर में मौजूद ब्लड से टॉक्सिक पदार्थ को निकालना. ये व्यर्थ और हानिकारक पदार्थ बाद में पेशाब के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं. स्वस्थ रहने के लिए किडनी का सही तरीके से काम करना बहुत जरूरी होता है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर रोग ग्रस्त हो जाती है, लेकिन उसके लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं. ऐसे में जरूरी है ‘किडनी फंक्शन टेस्ट’ करवाना, जिससे पता चल जाता है कि आपकी किडनी कितनी स्वस्थ और सही तरीके से सभी कार्य कर रही है. आइए जानते हैं किडनी फंक्शन टेस्ट या केएफटी क्या है, इसमें किस तरह के टेस्ट किए जाते हैं और कब कराएं ये टेस्ट.

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क्या है किडनी फंक्शन टेस्ट
फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल (वाशी, मुंबई) के कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट एंड ट्रांसप्लांट फिजिशियन, डायरेक्टर- डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रोलॉजी डॉ. अतुल इंगले कहते हैं कि किडनी फंक्शन टेस्ट को दो भागों में बांट सकते हैं, एक मास स्क्रीनिंग, जिसमें क्रोनिक किडनी डिजीज का पता लगाया जाता है और दूसरी कैटेगरी के टेस्ट में जब किसी व्यक्ति के शारीरिक संकेतों या लक्षणों को देखकर ये लगे कि इसे किडनी रोग हो सकता है. ऐसे में इन डेप्थ जाकर एनालिसिस करने के लिए टेस्ट किया जाता है. स्क्रीनिंग में सिर्फ यूरिन रूटीन, यूरिन एल्ब्यूमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो (Urine albumin-to-creatinine ratio) और सीरम क्रिएटिनिन (Serum creatinine) इतना ही जरूरी होता है. इससे पता लगा सकते हैं कि किडनी प्रभावित है या नहीं. उदाहरण के लिए यूरिन रूटीन में प्रोटीन लीक हो रहा है या नहीं ये जान सकते हैं. पेशाब में खून आना या इंफेक्शन होने के पता चलता है.

वहीं, यूरिन एल्ब्यूमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो में सही मात्रा में प्रोटीन लीक होने के बारे में पता लगाया जाता है. यह किडनी प्रॉब्लम का निदान है. किडनी का काम कैसा है, उसका पता लगाने के लिए जीएफआर यानी ग्लोमेरुलर फिल्टरेशन रेट (GFR) कैल्कुलेट किया जाता है. इसे ईजीएफआर (eGFR) भी कहा जाता है. इसमें उम्र, जेंडर, हाइट, साइज, वजन, प्रोटीन लेवल आदि क्रिएटिनिन लेवल की मदद से देखा जाता है. उसके बाद जो भी जीएफआर आता है, उससे किडनी के फंक्शन, वर्किंग के बारे में पता चलता है. जिन लोगों को किडनी समस्या होने की संभावना नजर आती है, उनमें यूरिन टेस्ट, ब्लड टेस्ट और स्क्रीनिंग की जाती है.

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कब कराएं किडनी टेस्ट
डॉ. अतुल इंगले कहते हैं कि किडनी डिजीज में लक्षण बहुत देर से नजर आते हैं. जब भी कोई मरीज नेफ्रोलॉजिस्ट या डॉक्टर के पास आता है, उसका किडनी फंक्शन 90 प्रतिशत तक खराब हो चुका होता है. किडनी की समस्याओं के बारे में पता लगाना पड़ता है. किडनी की कुछ एक्यूट समस्याएं जैसे इंफेक्शन, पथरी आदि ये सब रूटीन लक्षण जैसे पेट में दर्द, बुखार आने में पता चल जाती हैं, लेकिन क्रोनिक किडनी डिजीज में किडनी फेल होने की संभावना काफी ज्यादा होती है. इसके होने का मुख्य कारण होता है, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर. इन दोनों बीमारियों में किडनी की समस्या साइलेंट रहती है, जिसे सही समय पर पहचानना पड़ता है.

इसे पहचानने के लिए ही स्क्रीनिंग कैटेगरी की टेस्ट की जाती है यानी यूरिन रूटीन और यूरिन एल्ब्यूमिन टू क्रिएटिनिन रेशियो और सीरम क्रिएटिनिन जीएफआर करना जरूरी होता है. ऐसे में हर किसी को 30-35 वर्ष की उम्र से ही किडनी की स्क्रीनिंग करवानी चाहिए. जिनके परिवार में स्ट्रोक, हार्ट की समस्या, डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री है, उन्हें 25-30 की उम्र में ही प्रत्येक साल एक बार किडनी की स्क्रीनिंग करानी चाहिए, ताकि कोई समस्या सामने आए तो इलाज समय पर शुरू हो सके. साथ ही 40 की उम्र के बाद तो हर किसी को किडनी चेकअप, स्क्रीनिंग करानी बेहद जरूरी है.

किडनी फंक्शन टेस्ट का नॉर्मल रेंज क्या है
डॉ. इंगले बताते हैं कि हर लैब का पैरामीटर थोड़ा सा अलग होता है. सीरम क्रिएटिनिन का औसत 1.2 मिली ग्राम पर डेसी लीटर कट ऑफ लिमिट होता है. यदि 1.2 के ऊपर क्रिएटिनिन की वैल्यू जाती है, तो इसका मतलब है किडनी का फंक्शन डाउन है. हालांकि, क्रिएटिनिन वैल्यू से किडनी फंक्शन को निर्धारित नहीं करना चाहिए. इसमें जीएफआर कैल्कुलेट करके किडनी फंक्शन को निर्धारित करना चाहिए. क्रिएटिनिन एक तरह का टॉक्सिक पदार्थ है, जो शरीर के लिए हानिकारक होता है. इसके बढ़ जाने से किडनी की समस्या होने लगती है. सामान्य रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट 500 से लेकर 700 के बीच हो जाती है.

जीएफआर का क्या उपयोग है
जीएफआर परीक्षण से प्रारंभिक अवस्था में गुर्दे की बीमारी का निदान करने में मदद मिलती है. जीएफआर का उपयोग क्रोनिक किडनी रोग या अन्य स्थितियों से पीड़ित लोगों की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है, जो किडनी डैमेज का कारण बनते हैं, इनमें डायबिटीज और उच्च रक्तचाप शामिल हैं.

जीएफआर टेस्ट की आवश्यकता क्यों होती है
प्रारंभिक चरण में किडनी की बीमारी होने पर लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं, लेकिन अगर आपको गुर्दे की बीमारी होने का अधिक खतरा है, तो आपको जीएफआर टेस्ट करवाने की जरूरत हो सकती है. इसके जोखिम कारकों में शामिल हैं:
डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
किडनी फेलियर का पारिवारिक इतिहास

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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