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क्या है थायरॉइड आई डिजीज? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज

थायरॉइड नेत्र रोग आंखों की मांसपेशियों और ऊतकों को प्रभावित करता है.

थायरॉइड नेत्र रोग आंखों की मांसपेशियों और ऊतकों को प्रभावित करता है.

Thyroid Eye Disease: थायरॉइड आई डिजीज होने पर आंखों की मांसपेशियां और टिशूज प्रभावित हो जाती हैं. यह बीमारी ओवरएक्टिव थायरॉइड यानी हाइपरथायरॉइडिज्म के कारण होती है. इस बीमारी का इलाज ना करवाया जाए, तो आंखें खराब भी हो सकती हैं.

What is Thyroid Eye Disease: थायरॉइड बीमारी के बारे में तो आपने सुना होगा, लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि थायरॉइड की बामारी आपके आंखों को भी बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है. कई तरह की समस्याएं आंखों में हो सकती हैं. आप थायरॉइड आई डिजीज से ग्रस्त हो सकते हैं. इसमें आंखों की मांसपेशियां और टिशूज प्रभावित हो जाती हैं. यह बीमारी ओवरएक्टिव थायरॉइड यानी हाइपरथायरॉइडिज्म के कारण होती है. इस बीमारी का इलाज ना करवाया जाए, तो आंखें खराब भी हो सकती हैं. थायरॉइड आई डिजीज का उपचार नेत्र रोग विशेषज्ञ, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट, सर्जन आदि विशेषज्ञ करते हैं. आइए जानते हैं थायरॉइड आई डिजीज के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में यहां.

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क्या है थायरॉइड आई डिजीज
फोर्टिस हॉस्पिटल (मुंबई) की कंसल्टेंट एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एंड डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. श्वेता बुडयाल कहती हैं कि जिन लोगों को ओवरएक्टिव थायरॉइड ग्लैंड यानी हाइपरथायरॉइडिज्म होता है, उन्हें ये समस्या अधिक होती है. ऐसे लोगों में कभी-कभी आंखों में सूजन आती है, पलकों में समस्या होती है, आंखों को हिलाने-डुलाने में दर्द होता है, आंखें लाल हो जाती हैं. आंखों के मूवमेंट को कंट्रोल करने वाली मांसपेशियों में भी सूजन, दर्द, इंफ्लेमेशन हो जाता है. वैसे यह माइल्ड होता है, जो थायरॉइड का इलाज करने से कंट्रोल हो जाता है, लेकिन गंभीर है, तो इसका इलाज अलग से होता है. आंखों से संबंधित ये समस्याएं बहुत अधिक होंगी, तो इन्हें स्टेरॉएड दवाओं से ठीक किया जाता है. यदि इलाज प्रॉपर ना मिले तो आंखों की साइज बड़ी रह सकती है, चीजें डबल नजर आती हैं, जो लगातार बनी रह सकती है. थायरॉइड आई डिजीज 99 प्रतिशत लोगों में हाइपरथायरॉइडिज्म में होता है, लेकिन 1-2 प्रतिशत लोगों में यह हाइपोथायरॉइडिज्म में भी हो सकता है.

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थायरॉइड आई डिजीज के लक्षण
डॉ. श्वेता बुडयाल कहती हैं कि जब भी हाइपरथायरॉइडिज्म की शुरुआत होती है, तभी थायरॉइड आई डिजीज के भी लक्षण नजर आने लगते हैं. रेयर केसेस में ही थायरॉएड की समस्या होने के 5-10 साल बाद थायरॉइड आई डिजीज होता है. आमतौर पर जो लोग बहुत ज्यादा स्मोक करते हैं, उनमें इस बीमारी के होने की संभावना बहुत ज्यादा होती है. ऐसे लोगों को गंभीर रूप से थायरॉइड आई डिजीज होती है. ऐसे में इनमें दवाओं के प्रति रिस्पॉन्स भी सही नहीं नजर आता है, जबकि जो लोग धूम्रपान नहीं करते हैं, उनमें दवाओं का असर होता है. ऐसे में हम स्मोकिंग बंद करने की सलाह देते हैं.

थायरॉइड आई डिजीज का इलाज
माइल्ड समस्या है, तो सिम्पटोमैटिक ट्रीटमेंट दिया जाता है. आर्टिफिशियल टियर, आई ड्रॉप, थायरॉएड हार्मोन लेवल की मात्रा को कंट्रोल में लाना, एंटी-इंफ्लेमेटरी मेडिकेशंस आदि. यदि समस्या बहुत अधिक गंभीर है, इंफ्लेमेशन अधिक है, दृष्टि सही नहीं है, तो स्टेरॉएड के जरिए इलाज किया जाता है. गंभीर समस्या में आंखों की मसल्स में इतनी अधिक सूजन होती है कि आंखों की नस (ऑप्टिक नर्व) भी डैमेज हो सकती है. आंखों का काला हिस्सा कॉर्निया ब्रेकडाउन होकर पूरी तरह से आंखों को खराब कर सकता है. ऐसे मरीजों को तुरंत हाई डोज स्टेरॉएड देना पड़ता है. इसमें फॉलोअप बहुत जरूरी होता है.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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