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क्या है विंटर वजाइना? जानें आपकी लाइफ पर कैसे पड़ सकता है इसका बुरा असर

कोविड के दौरान ट्रॉमा के लक्षण पैदा होने से लोगों की लाइफ पर असर पड़ रहा है.

कोविड के दौरान ट्रॉमा के लक्षण पैदा होने से लोगों की लाइफ पर असर पड़ रहा है.

Winter Vagina: जब हम वातानुकूलित कमरों में बहुत समय बिताते हैं, या हीटिंग चालू रखते हैं, तो हम हवा में रहते हैं जिसमें बहुत कम नमी होती है.ऐसे में जो सूखापन हम अनुभव करते हैं वह अक्सर हमारे शरीर के हर इंच तक फैल सकता है जिसमें हमारे सबसे निजी अंग भी शामिल होते हैं. हालांकि यह एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन यह उन महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है जो रजोनिवृत्ति से गुजर रही हैं या पहले से ही रजोनिवृत्ति का अनुभव कर चुकी हैं.

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Winter Vagina: सर्दी अपनी तेजी पर है और इसके साथ ही यह स्किन के लिए एक सर्द चेतावनी भी है. सर्दियों का सबसे अधिक असर सेहत के साथ साथ स्किन और बालों पर पड़ता है. ठंड के मौसम में स्किन और बाल रूखे होने लगते हैं. हम सभी जानते हैं कि जैसे-जैसे तापमान गिरता है और घरेलू हीटिंग चालू होती है, यह आपकी त्वचा के साथ खिलवाड़ कर सकता है. ऐसे में ड्राई स्किन और फटे होंठ एक समस्या बन जाते हैं, जिसे हम हैंड क्रीम और लिप बाम लगाकर दूर करते हैं. लेकिन क्या वह सूखा, शरीर के सभी हिस्सों को प्रभावित कर सकता है, जिसमें आपके निजी अंग भी शामिल हों. न्यूयॉर्क पोस्ट की खबर के अनुसार सर्दियों में वजाइना भी ड्राई हो सकती है. क्या आपने कभी विंटर वजाइना के बारे में सुना है. आइए आपको बताते हैं क्या होता है विंटर वजाइना, क्या हैं इसके लक्षण और कैसे पाएं इससे छुटकारा.

क्या होता है विंटर वजाइना
मैरी बर्क, लंदन ब्रिज प्लास्टिक सर्जरी एंड एस्थेटिक क्लिनिक में वरिष्ठ ​​नर्स, ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सर्दियों के महीनों में महिलाओं को वजाइना में ड्राईनेस का अधिक सामना करना पड़ सकता है. शुष्क शरद ऋतु और सर्दियों की हवा शरीर से नमी को कम कर देती है, जिससे त्वचा हाईड्रेटेड नहीं रहती और टूट जाती है. हमारे साइनस भी सूख जाते हैं. वहीं इस दौरान वजाइना भी शूष्क मोड में प्रवेश कर सकती है. जब हम वातानुकूलित कमरों में बहुत समय बिताते हैं, या हीटिंग चालू रखते हैं, तो हम हवा में रहते हैं जिसमें बहुत कम नमी होती है.ऐसे में जो सूखापन हम अनुभव करते हैं वह अक्सर हमारे शरीर के हर इंच तक फैल सकता है जिसमें हमारे सबसे निजी अंग भी शामिल होते हैं. वहीं इस मामले में डॉ. जेन गुंटर का कहना है कि मौसम परिवर्तन एक महिला के निजी अंगों को प्रभावित कर सकता है लेकिन विंटर वजाइना की तरह समर वजाइना भी होना चाहिए.

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डॉ. जेन गुंटर के अनुसार वजाइना के सूखेपन का बाहर के तापमान से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि यह कम एस्ट्रोजन के स्तर, कुछ दवाओं और थ्रश के कारण होता है. उनके अनुसार वजाइना सभी मौसमों में काफी अच्छी तरह से काम करती है. वजाइना एक स्थिर तापमान बनाए रखती है क्योंकि आपके शरीर के अंदर होता है और मानव शरीर का तापमान केवल बाहरी तापमान के साथ बढ़ता है जब कोई हीट स्ट्रोक से पीड़ित होता है. वहीं वजाइना का सूखापन एक गंभीर रूप से दुर्बल करने वाली स्थिति है जो सभी उम्र की महिलाओं को प्रभावित कर सकती है.

इसके लक्षण इस प्रकार हैंः

बेचैनी और वजाइना में जलन
वजाइना की सतह पीली और पतली दिखना
वजाइना का सिकुड़ना या छोटा होना
सामान्य से अधिक पेशाब करना
बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन

हालांकि यह एक बहुत ही आम समस्या है, लेकिन यह उन महिलाओं को सबसे अधिक प्रभावित करता है जो रजोनिवृत्ति से गुजर रही हैं या पहले से ही रजोनिवृत्ति का अनुभव कर चुकी हैं.
कुछ खास दवाएं, डायबिटीज, स्तनपान या प्रसव सहित अन्य कारक भी एक महिला के वजाइना में सूखेपन का अनुभव करने की संभावना को बढ़ा सकते हैं.

वहीं कुछ विशेषज्ञों की मानें तो विंटर वजाइना में किसी अच्छे मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा एस्ट्रोजन और हॉर्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे उपचार की मदद भी ली जा सकती है. वहीं लाइफस्टाइल में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करके वजाइना के सूखेपन के जोखिम को कम करने में मदद की जा सकती है, जिसमें आपकी डाइट भी शामिल है.

विंटर वजाइना होने पर फॉलो करें ये टिप्स

दिन में एक बार एप्पल जूस जरूर पिएं
वजाइना का सूखापन हॉर्मोन असंतुलन का परिणाम हो सकता है. लेकिन आप अपनी डाइट में फाइटोएस्ट्रोजेन (Phytoestrogens) युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करके इस असंतुलन को एक समान स्तर पर वापस ला सकते हैं. फाइटोएस्ट्रोजन से भरपूर खाद्य पदार्थों में एप्पल जूस, चेरी, अलसी के बीज और अन्य तिलहन शामिल हैं.

हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें
पत्तेदार साग लंबे समय तक शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. इसमें कई पोषक तत्व और नाइट्रेट्स भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं. यह वजाइना के सूखेपन को रोकने में मददगार होते हैं. साग में विटामिन ई, कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर होता है, जो आपकी अंतरंग मांसपेशियों को स्वस्थ रखता है.

खरबूजा और तरबूज जरूर खाएं
एक स्वस्थ वजाइना का पीएच लेवल 3.8 से 4.5 के बीच होता है. यदि यह इस स्तर से बाहर जाता है, तो आपको कुछ असुविधा का अनुभव हो सकता है. ऐसे में खरबूजा और तरबूज का सेवन जरूर करें. इन दोनों फलों में साइट्रलाइन होता है, जो वजाइना के लिए बहुत अच्छा होता है. साथ ही यह शरीर की रक्त वाहिकाओं को आराम देता है.

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नारियल का करें सेवन
नारियल शरीर से विषाक्त पदार्थों को साफ करने के लिए बहुत अच्छा माना जाता है और वजाइना में संक्रमण से लड़ने में भी मदद करता है. वहीं नारियल पानी में लॉरिक एसिड होता है, जो हानिकारक बैक्टीरिया को दूर कर सकता है.

स्ट्रेस लेवल को कम करें
जब महिलाएं तनावग्रस्त हो जाती हैं, तो उनकी यह स्थिति मिनी रजोनिवृत्ति के रूप में जानी जाती है. भले ही एक महिला जीवन में उस स्तर पर न हो. ऐसा इसलिए है क्योंकि एस्ट्रोजन का स्तर कम हो सकता है, जिसके कारण त्वचा रूखी हो जाती है. इससे निपटने का एक तरीका यह हो सकता है कि आप अपनी डाइट में विटामिन सी का सेवन बढ़ाएं और स्ट्रेस लेवल को कम करें.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle, Women Health

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