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World Down Syndrome Day: क्या होता है डाउन सिंड्रोम? ये हैं बच्चों में नजर आने वाले इसके लक्षण

क्या है डाउन सिंड्रोम? जानें इसके कारण, लक्षण

क्या है डाउन सिंड्रोम? जानें इसके कारण, लक्षण

World Down Syndrome Day 2022: आज है 'वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे'. इस दिवस को वर्ष 2012 से ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक तौर पर मनाया जा रहा है. इस दिन डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उनके सपोर्ट, समर्थन के लिए कई तरह के ईवेंट्स आयोजित किए जाते हैं. आइए जानते हैं क्या है डाउन सिंड्रोम और इसके लक्षणों के बारे में यहां.

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What is  Down Syndrome: आज (21 मार्च) है ‘वर्ल्ड डाउन सिंड्रोम डे’ (World Down Syndrome Day 2022). ‘विश्व डाउन सिंड्रोम दिवस’ (WDSD) एक वैश्विक जागरूकता दिवस है, जिसे वर्ष 2012 से ही संयुक्त राष्ट्र द्वारा आधिकारिक तौर पर मनाया जा रहा है. तीसरे महीने (मार्च) के 21वें दिन होने की तिथि को 21वें गुणसूत्र के त्रिगुणन (ट्राइसोमी) की विशिष्टता को दर्शाने के लिए चुना गया था, जो डाउन सिंड्रोम का कारण बनता है. इस दिन डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उनके सपोर्ट, समर्थन के लिए कई तरह के ईवेंट्स आयोजित किए जाते हैं. आइए जानते हैं क्या है डाउन सिंड्रोम और इसके लक्षणों  (Symptoms of Down Syndrome) के बारे में यहां.

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क्या है डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम को ट्राइसॉमी 21 (Trisomy 21) भी कहते हैं. यह एक अनुवांशिक डिसऑर्डर है, जो बच्चों को प्रभावित करता है. नेशनलटुडे में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, डाउन सिंड्रोम एक डिसऑर्डर है, जो तब होता है, जब 21वें गुणसूत्र का दोहराव (duplication of 21 chromosome) होता है. यह विकार प्रत्येक वर्ष जन्म के समय लगभग 6,000 बच्चों को प्रभावित करता है. इसमें बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है. इस विकार से ग्रस्त बच्चे के चेहरे की विशिष्ट विशेषताएं होती हैं, साथ ही उनकी बौद्धिक क्षमता भी कमजोर होती है. इस समस्या को बच्चे के जन्म से पहले स्क्रीनिंग, कुछ टेस्ट के जरिए और जन्म के बाद जेनेटिक टेस्ट से पहचाना जा सकता है.

डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में नजर आने वाली समस्याएं
डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों में चेहरे के फीचर्स अलग तरह के नजर आते हैं. इससे बौद्धिक अक्षमता और शारीरिक विकास देर से होता है. कई बार यह थायरॉइड या हृदय रोग से भी जुड़ा हो सकता है. इसमें सोचने, सीखने-समझने में मुश्किल आती है, बच्चा बोलना देर से शुरू करता है, सुनने में समस्या, इम्यून डेफिशिएंसी, गर्दन के पिछले हिस्से पर अतिरिक्त त्वचा होना, कान की बनावट में समस्या, मुंह से सांस लेना, मोटापा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, हथेलियों और तलवों की त्वचा का मोटा होना, थायरॉयड, दृष्टि विकार जैसी समस्याएं हो सकती हैं.

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डाउन सिंड्रोम के लक्षण

  • जीभ की बनावट अलग होती है.
  • आंखों की बनावट भी सामान्य लोगों से अलग नजर आती हैं.
  • सिर, मुंह और कान का आकार छोटा या बड़ा होना.
  • गर्दन के साथ ही उंगलियां भी छोटी-छोटी होती हैं.
  • हाथ-पैर छोटे-छोटे होना.

डाउन सिंड्रोम का निदान और इलाज
यदि समय से गर्भ धारण किया जाए, तो बच्चे को इस समस्या से बचाया जा सकता है. प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ स्क्रीनिंग, टेस्ट के जरिए यह पता लगाने में आसानी होती है कि शिशु को डाउन सिंड्रोम संबंधित कोई लक्षण हैं या नहीं. जेनेटिक अल्ट्रासाउंड, ब्लड टेस्ट आदि किए जाते हैं. डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चे को कुछ दवाएं, स्पीच और फिजिकल थेरेपी, बिहेवियरल थेरेपी दी जाती है, ताकि वह जरूरी चीजों, सीखने-समझने की क्षमता विकसित कर सके.

Tags: Health, Health tips, Lifestyle

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