World Tuberculosis (TB) Day 2021: जानलेवा है यूट्रस की टीबी, बचाव है जरूरी

World Tuberculosis (TB) Day 2021: पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस  टीबी का पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है. 
Image Credit: pexels-c-technical

World Tuberculosis (TB) Day 2021: पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस टीबी का पकड़ में आना थोड़ा मुश्किल होता है. Image Credit: pexels-c-technical

Pelvic Tuberculosis: टीबी हर किसी के लिए बेहद संक्रामक रोग हैं, लेकिन महिलाओं के रीप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) में इसका असर उनके मां बनने की क्षमता को भी खत्म कर सकता है, इसलिए इसके बारे में जागरूकता होना बेहद जरूरी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 24, 2021, 2:16 PM IST
  • Share this:
World Tuberculosis (TB) Day 2021: फेफड़ों से जुड़ी बीमारी टीबी यानी ट्यूबरक्लोसिस हालांकि ये बीमारी शरीर में कहीं भी हो सकती है. जैसे कि ये औरतों के रीप्रोडक्टिव सिस्टम (Reproductive System) में भी सेंध लगाती है औरतों में होने वाली इस तरह की टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस (Pelvic Tuberculosis) कहते हैं.शोधों के मुताबिक इंफेक्शन इस टीबी की मुख्य वजह है. नतीजन भारत में 25-30 फीसदी महिलाएं बांझपन का शिकार हो रही हैं. ऐसे में यह जरूरी है कि महिलाओं को गर्भाशय (Uterus) टीबी बारे में पूरी जानकारी हो. इसके बारे में जानने के लिए हमनें बात की नोएडा मेट्रो हॉस्पिटल की सीनियर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अंजु सूर्यपाणी से.

जानें पेल्विक ट्यूबरक्लोसिसः  

डॉक्टरी भाषा में महिलाओं को होने वाले इस टीबी को पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस या जेनिटल ट्यूबरक्लोसिस (Genital Tuberculosis) कहते हैं. जिसमें टीबी का बैक्टीरिया माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस महिलाओं के रीप्रोडक्टिव ऑर्गंस को प्रभावित करता है. यह महिलाओं की ओवरीज़ से जुड़े फैलोपियन ट्यूब (गर्भनाल जो गर्भाशय के ऊपरी हिस्से के दोनों तरफ से निकलकर दोनों ओर कूल्हे की हड्डियों तक जाती हैं), गर्भाशय के मुंह, वजाइना या वजाइना के मुंह के आसपास के लिम्फ नोड्स में होती है. अगर हम गौर करें तो गर्भाशय और वजाइना या शरीर के किसी हिस्से जैसे फेफड़ों में इन्फेक्शन होना इस बीमारी का कारण होता है. ख़ासतौर पर औरतों में बच्चा पैदा करने के दौरान इस तरह की टीबी के चपेट में आने की अधिक संभावना होती है.

ये भी पढ़ेंःWorld Tuberculosis (TB) Day 2021: विश्व तपेदिक दिवस मनाने का मकसद है दुनिया से इस बीमारी का हो खात्मा


लक्षण नहीं दिखते आसानी सेः  

डॉक्टर अंजु बताती हैं कि शुरुआती स्टेज में गर्भाशय टीबी के लक्षणों को आप आसानी से नहीं पकड़ पाते हैं,लेकिन 7-8 महीने बाद इसके लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं. अक्सर यह तब सामने आती है. जब किसी औरत को मां बनने में दिक्कत पेश आने लगती है. इसके लक्षणों में थकान, पेट के निचले हिस्से में बेहद दर्द रहना, वजाइना से सफ़ेद पानी आना, पीरियड्स का गड़बड़ा जाना, एमेनोरिया,हेवी ब्लीडिंग, सेक्स के बाद दर्द, उबकाई या उल्टी, वजन का कम होना, हल्का बुखार, हार्ट की पल्स रेट का तेज हो जाना जैसी दिक्कते पेश आती हैं.इस बीमारी प्रेगनेंसी के वक्त होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है.



कौन से टेस्ट से लगता है पताः  

इस टीबी का पता लगाने के लिए ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट किया जाता है. यह टेस्ट शरीर में किसी भी भाग में होने वाले टीबी बारे में बताता है. इसके साथ ही पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड भी इस टीबी का पता लगाने में कारगर होता है. इनके अलावा और भी कई तरह के टेस्ट इस तरह की टीबी की जांच के लिए किए जाते हैं. अगर ऊपर बताए गए सारे लक्षण महसूस हो रहे हैं तो डॉक्टर के पास जाने में कोताही न करें वो आपकी परेशानी की गंभीरता को देखते हुए आपके लिए सटीक टेस्ट करवाने को कहेंगे.

ये भी पढ़ेंःWorld Tuberculosis Day 2020: वक्त रहते पहचानें टी.बी के ये लक्षण, जानें बचाव के उपाय  

क्या है इलाजः  

इस टीबी के होने पर महिला की बीमारी की कंडीशन के आधार पर पर ही उसका इलाज किया जाता है. अगर कंडीशन सीरियस है तो, दवाइयों से लेकर सर्जरी तक की नौबत आ सकती है.

कैसे हो रोकथामः

कहते हैं न कि इलाज से बेहतर बचाव है तो पेल्विक ट्यूबरक्लोसिस टीबी की बीमारी के लिए इस जुमले को अमल में लाना ही बेहतर विकल्प हो सकता है. इसे रोकने का एक तरीका ये सुनिश्चित करना है कि शरीर का कोई भी हिस्सा टीबी से प्रभावित तो नहीं है.क्योंकि टीबी फैलने वाली बीमारी है. इसलिए ज़रूरी है कि आप टीबी के मरीजोंं से दूरी बनाएं. इससे मतलब है उनका जूठा खाना न खाएं. उनके आसपास होने पर उनके खांसने या छींकने पर एहतियात बरतें. टीबी से ग्रस्त इंसान से सेक्स करते वक्त कॉन्डम का इस्तेमाल करें, क्योंकि अगर फिजिकल रूप से आप संक्रमित व्यक्ति के करीब हैं तो इसके होने के चांस बढ़ जाते हैं.कमजोर इम्यून सिस्टम वाली औरतों को यह जल्दी अपना शिकार बनाती है.इसलिए प्राइवेट पार्ट की साफ-सफाई का ध्यान रखें.रेगुलर चेकअप को तवज्जो दें.हरी सब्जियां और फल खाएं,पोषक आहार ले जंक और फास्ट फूड्स से दूरी बनाएं,रोज एक्सरसाइज करें.पॉल्यूशन से बचें.

ये भी पढ़ेंःवर्ल्‍ड टीबी डे: सोशल मीडिया पर एक आवाज- आओ इसे मिलकर खत्‍म करें

बांझपन की वजह भी बन सकती है ये टीबीः 

टीबी से फैलोपियन ट्यूब को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचता है. इस वजह से महिलाओं में किसी भी तरह की टीबी होने पर 30 फीसदी को यूट्रस टीबी का सामना करना पड़ता है. पांच से 10 फीसदी महिलाओं में हाइड्रो साल्पिंगिटिस होता है. इसमें वॉटर ट्यूब में भर जाता है, जिससे बांझपन का खतरा बढ़ जाता है.  एक्सपर्ट के मुताबिक कि टीबी से ग्रसित 10 महिलाओं में से 2 प्रेग्नेंट नहीं हो पाती हैं. भारत में जननांगों की टीबी के 40.80% मामले महिलाओं में देखे जाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 में टीबी की बीमारी के मामले में भारत 27.9 लाख मरीजों के साथ टॉप पर था.




अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज