हल्के फ्लू जैसे होते हैं नॉन पैरालिटिक पोलियो के लक्षण, इन बातों का रखें ध्यान

सांकेतिक तस्‍वीर (Image Credit/Pexels alexandre-saraiva-carniato)
सांकेतिक तस्‍वीर (Image Credit/Pexels alexandre-saraiva-carniato)

पोलियो (Polio) के दो प्रकार होते हैं- एक नॉन पैरालिटिक पोलियो (Non Paralytic Polio) और दूसरा पैरालिटिक पोलियो (Paralytic Polio). नॉन पैरालिटिक पोलियों में व्यक्ति के गर्दन और पीठ में ऐंठन हो सकती है, जिसके कारण व्यक्ति लकवाग्रस्त (Paralyzed) भी हो सकता है.

  • Last Updated: October 19, 2020, 12:44 PM IST
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पोलियो वायरस (Polio Virus) एक प्रकार का गंभीर संक्रमण (Infection) होता है, जो एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है. पोलियो एक खतरनाक वायरस है, जो व्यक्ति को संक्रमित कर उसके मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) को नुकसान पहुंचाता है. इससे व्यक्ति को लकवा जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. पोलियो के दो प्रकार होते हैं- एक नॉन पैरालिटिक पोलियो (Non Paralytic Polio) और दूसरा पैरालिटिक पोलियो (Paralytic Polio) . यह दोनों ही गंभीर होते हैं. नॉन पैरालिटिक पोलियों में व्यक्ति के गर्दन और पीठ में ऐंठन हो सकती है, जिसके कारण व्यक्ति लकवाग्रस्त (Paralyzed) भी हो सकता है. पैरालिटिक पोलियो में कुछ ही मामलों में लकवा होने की आशंका होती है, लेकिन इसमें रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क दोनों में लकवा हो सकता है. हालांकि शुरुआत में दोनों ही पोलियो में लक्षण समान हो सकते हैं, लेकिन कुछ सप्ताह बाद पैरालिटिक पोलियो के लक्षण गंभीर हो सकते हैं. आइए जानते हैं पोलियो बीमारी के लक्षणों के बारे में-

पोलियो के लक्षण
myUpchar से जुड़े डॉ. अजय मोहन के अनुसार नॉन पैरालिटिक पोलियो में लक्षण फ्लू की तरह दिखाई देते हैं. इसमें व्यक्ति को बुखार, गले में खराश, उल्टी, थकान, सिरदर्द होना, गर्दन, पीठ, बाहों या पैरों में दर्द और ऐंठन होना और मांसपेशियों में कमजोरी महसूस होना आदि लक्षण पाए जाते हैं.
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पैरालिटिक पोलियो में बहुत ही कम मामलों में पोलियो वायरस संक्रमण के कारण व्यक्ति को लकवा लगने जैसी परेशानी होती है, लेकिन जिन लोगों को गंभीर रूप से पोलियो होता है, तो इसका असर उनकी रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क दोनों पर पड़ता है. इसमें शुरुआत में होने वाले लक्षणों में बुखार और सिर दर्द होता है. शुरुआती 1 हफ्ते में ही पैरालिटिक पोलियो के लक्षण दिखने लगते हैं. इसमें मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन के साथ ही किसी अंग का विकृत हो जाना या अचानक से लकवा हो जाना आदि लक्षण हो सकते हैं.

पोस्ट पोलियो सिंड्रोम, जो पोलियो होने के बाद के लक्षण भी हो सकते हैं. इसमें मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और कमजोरी महसूस होती है. इसके साथ ही सांस लेने या निगलने में कठिनाई होने लगती है, नींद की कमी हो जाती है और अवसाद जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं. थोड़े कार्य करने पर भी थकान की अनुभूति होती है.

पोलियो के कारण
myUpchar के अनुसार पोलियो होने के क्या कारण हो सकते हैं, इस बारे में समझना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि अगर इसकी सही जानकारी नहीं होगी तो यह संक्रामक रोग फैलने के साथ ही कई परेशानियां खड़ी कर सकता है. पोलियो वायरस का संक्रमण गंदगी से फैलता है. साथ ही पोलियो वायरस दूषित पानी और भोजन या इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति से संपर्क में आने के कारण भी फैल सकता है. यह वायरस इतना अधिक संक्रामक होता है कि आसानी से किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से संक्रमण हो सकता है.

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पोलियो वायरस मल के माध्यम से भी फैल सकता है. इसके अतिरिक्त पोलियो वायरस से संक्रमित व्यक्ति के छींकने या खांसने पर भी फैल सकता है, लेकिन ऐसा होने की आशंका काफी कम होती है. यह वायरस कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों, गर्भवती महिलाओं या छोटे बच्चों को अधिक प्रभावित कर सकता है. इसके लिए आसपास साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है, इसके अतिरिक्त टीकाकरण भी करवाना चाहिए, जो निशुल्क नवजात शिशु से 5 साल के सभी बच्चों के लिए उपलब्ध है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पोलियो क्या है, इसके प्रकार, लक्षण, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें।

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