भारतीय मूल की महिला ने बनाया अनोखा 'सुपर कॉन्डम'

भारतीय मूल की एक अमेरिकी महिला प्रोफेसर और उनकी टीम ने एक हाइड्रोजेल सुपर कॉन्डम विकसित किया है।

भारतीय मूल की एक अमेरिकी महिला प्रोफेसर और उनकी टीम ने एक हाइड्रोजेल सुपर कॉन्डम विकसित किया है।

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    नई दिल्ली। भारतीय मूल की एक अमेरिकी महिला प्रोफेसर और उनकी टीम ने एक हाइड्रोजेल 'सुपर कॉन्डम' विकसित किया है। ये कॉन्डम एचआईवी के घातक वायरस के फैलाव को रोकने में बेहद कारगर साबित हो सकता है।

    टेक्सास में 'ए एंड एम यूनिवर्सिटी' की प्रोफेसर महुआ चौधरी और उनकी टीम ने इस नॉन-लैटेक्स कॉन्डम का विकास किया है। इस कॉन्डम को इलास्टिक पोलिमर से बनाया गया है जिसे हाइड्रोजेल कहा जाता है।

    इस कॉन्डम की खास बात यह है कि सेक्स के दौरान इसके फटने पर भी वायरस का संक्रमण नहीं लगेगा। इसमें पौधों से लिए गए ऐंटिऑक्सिडेंट को शामिल किया गया है। इस ऐंटिऑक्सिडेंट में एचआईवी से लड़ने का विशेष गुण होता है, जो कॉन्डम फट जाने पर भी एचआईवी वायरस को मार देता है। साथ ही यह कॉन्डम सेक्स क्रिया को ज्यादा आनंददायक भी बनाता है।

    चौधरी ने कहा कि उन्होंने न केवल कॉन्डम के लिए एक शानदार पदार्थ बनाया है बल्कि इससे एचआईवी संक्रमण भी रुकेगा। यह एचआईवी संक्रमण के रोकथाम की दिशा में एक क्रांति साबित हो सकता है।

    महुआ उन 54 लोगों में शामिल हैं जिनको बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने ‘वैश्विक स्वास्थ्य में बड़ी चुनौतियां’ नामक अनुदान दिया है।

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