महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन की बीमारी है पीसीओएस, जानिए कैसे करें बचाव

पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारण से भी होता है.
पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारण से भी होता है.

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारण से भी होता है. इसके अतिरिक्त अगर शरीर में नर हार्मोन एंड्रोजन (Hormone Androgen) का अति उत्पादन होता है, तब भी पीसीओएस की समस्या हो सकती है.

  • Last Updated: October 17, 2020, 8:42 AM IST
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पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) एक प्रकार का होर्मोनल विकार है. इसमें महिलाओं के दो खास हार्मोन्स (Hormones) प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन के बीच संतुलन बिगड़ने की वजह से उनके अंडाशय में सिस्ट बनने लगते हैं. इससे शरीर में कई समस्याएं होने लगती हैं. अधिकतर महिलाओं को इस समस्या की जानकारी नहीं है, इस वजह वे सही इलाज नहीं करवाती हैं. आइए जानते हैं कि पीसीओएस की समस्या क्या होती है और इसके कारण किस प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

पीसीओएस से होने वाली समस्याएं
-पीसीओएस के कारण महिलाओं का मासिक चक्र बिगड़ जाता है, इसके अतिरिक्त महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है. पीसीओएस के कारण हृदय पर भी प्रभाव पड़ता है. इस तरह की समस्या 15-30 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है.
-पीसीओएस समस्या होने पर महिलाओं को मुंहासे होने लगते हैं. इसके अलावा अचानक वजन बढ़ने लगता है.


-इसमें चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बाल उगने लगते हैं. यह बाल अधिक मोटे और काले दिखाई देते हैं, लेकिन इसके विपरीत सिर के बाल झड़ने लगते हैं.
-महिलाओं को शरीर के कई हिस्सों में जैसे नाभि, पीठ पर भी बाल उगने लगते हैं.
-पीसीओएस में महिलाओं को अवसाद जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं. निश्चित ही हार्मोनल बदलाव के कारण स्वभाव में भी बदलाव देखे जा सकते हैं.

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पीसीओएस के कारण
myUpchar के अनुसार अधिकतर डॉक्टरों का यह मानना है कि पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन और आनुवंशिक कारण से भी होता है. इसके अतिरिक्त यदि शरीर में नर हार्मोन एंड्रोजन का अति उत्पादन होता है, तब भी पीसीओएस की समस्या हो सकती है. पीसीओएस का एक कारण अधिक तनावग्रस्त जिंदगी भी हो सकती है, क्योंकि तनाव भी शरीर में हार्मोन्स को असंतुलित करने में खास भूमिका निभाते हैं.

ऐसे कम करें पीसीओएस
पीसीओएस में हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए ज्यादा से ज्यादा पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए. पौष्टिक आहार लेने से मासिक चक्र भी ठीक होगा. इसके अलावा नियमित व्यायाम करने के साथ ही वजन को नियंत्रित करने की कोशिश करें, जिससे यह समस्या ठीक होने में मदद मिलेगी. जिन महिलाओं को यह पीसीओएस की तकलीफ है, उन्हें फाइबरयुक्त आहार का ज्यादा सेवन करना चाहिए और साथ ही शरीर में हीमोग्लोबिन के स्तर को संतुलित रखना चाहिए. इसके लिए विटामिन सी और आयरन से भरपूर आहार जरूर लेना चाहिए.

myUpchar से के अनुसार गर्भनिरोधक गोलियों से भी पीसीओएस का उपचार किया जा सकता है. इन दवाइयों को लेने से मुहांसे और बाल आने की समस्या ठीक हो सकती है क्योंकि गर्भ निरोधक गोलियां महिलाओं के शरीर में बढ़ने वाले पुरुष हार्मोन्स टेस्टोटेरोन को कम करती है, लेकिन किसी भी दवा के इस्तेमाल से पहले डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है.

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पीसीओएस के इलाज के लिए सर्जरी का सहारा भी लिया जा सकता है. इस सर्जरी में महिला के अंडाशय में ड्रिलिंग करके छेद किया जाता है, जिससे ओव्यूलेशन सामान्य किया जा सकता है. इसके साथ ही नर हार्मोन्स भी कम होने लगते हैं. इसके अतिरिक्त इस सर्जरी के माध्यम से अंडाशय में होने वाले सिस्ट को भी हटाया जाता है.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पीसीओएस क्या है, इसके कारण, लक्षण, प्रकार, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें।

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