जानलेवा बीमारी है पेरिटोनाइटिस, हो सकते हैं अंग खराब

जानलेवा बीमारी है पेरिटोनाइटिस, हो सकते हैं अंग खराब
यह रोग आमतौर पर बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन की वजह से होता है.

पेरिटोनाइटिस (Peritonitis) रोग आमतौर पर बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन (Bacterial or Fungal Infections) की वजह से होता है. इस तरह की समस्या पेट में चोट लगने, पहले से किसी बीमारी की वजह से भी हो सकती है.

  • Myupchar
  • Last Updated : November 24, 2020, 6:25 am IST
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    पेरिटोनाइटिस (Peritonitis) एक गंभीर स्थिति है जिसमें तत्काल इलाज की जरूरत होती है. इसका इलाज न करने पर यह रोग तेजी से खून ओर अन्य अंगों में फैल सकता है, जिसके कारण अंगों के खराब होने का डर रहता है. पेरिटोरियम में सूजन आने की स्थिति को पेरिटोनिटिस कहते हैं. पेरिटोरियम पेट की आंतरिक दीवार के साथ-साथ एक झिल्ली नुमा ऊतक का आवरण है. यह रोग आमतौर पर बैक्टीरिया या फंगल इंफेक्शन (Bacterial or Fungal Infections) की वजह से होता है. इस तरह की समस्या पेट में चोट लगने, पहले से किसी बीमारी की वजह से भी हो सकती है. myUpchar के अनुसार डायलिसिस के पहले उसके दौरान या बाद में स्वच्छता का ध्यान नहीं रखा गया, तो ऐसे में पेरिटोनाइटिस की समस्या हो सकती है.

    जानलेवा है पेरिटोनाइटिस के दोनो प्रकार
    पेरिटोनाइटिस दो तरह का होता है पहला 'स्पॉन्टेनियस बैक्टीरियल पेरिटोनाइटिस' जो कि गुहा में तरल पदार्थ के संक्रमण के कारण होता है. हालांकि यह लिवर या किडनी के फेल होने की वजह से भी हो सकता है. दूसरा 'सेकेंडरी पेरिटोनाइटिस' जो कि पाचन तंत्र से फैले संक्रमण के कारण होता है. बता दें, दोनों ही प्रकार जानलेवा हो सकते हैं.



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    पेरिटोनाइटिस का जोखिम
    पेट में घाव या चोट, पेट का अल्सर, अग्नाशय की सूजन, लिवर सिरोसिस, पित्ताशय की थैली में संक्रमण, किडनी खराब होना, सर्जरी या फीडिंग ट्यूब का इस्तेमाल, पेल्विक इंफ्लामेट्री डिजीज जैसी कई स्थितियों में पेरिटोनाइटिस होने का जोखिम रहता है.

    पेरिटोनाइटिस के सामान्य लक्षण
    इस रोग में पेट दर्द, मतली और उल्टी, दस्त, कब्ज, पेट फूलना, ज्यादा प्यास लगना, बुखार और ठंड लगना, भूख न लगना, बहुत कम पेशाब आना आदि लक्षण नजर आते हैं. लक्षणों के दिखाई देने पर चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें. इलाज में जरा भी देरी करने से जीवन खतरे में पड़ सकता है.

    ऐसे होता है निदान
    डॉक्टर पेरिटोनाइटिस के निदान के लिए शारीरिक परीक्षण करेंगे और मेडिकल हिस्ट्री चेक करेंगे. वे सफेद रक्त कोशिकाओं की बढ़ी हुई मात्रा को जानने के ​लिए सीबीसी यानी कम्प्लीट ब्लड काउंट नामक ब्लड टेस्ट करवाने का सुझाव दे सकते हैं. साथ ही बैक्टीरिया की पहचान के लिए 'ब्लड कल्चर टेस्ट' की मदद ले सकते हैं. इस रोग से नुकसान या छेद का पता करने के लिए सीटी स्कैन और एक्स रे भी किया जा सकता है. डायलिसिस पर होने पर डॉक्टर डायलिसिस द्रव में मौजूद झाग के आधार पर इस रोग का निदान कर सकते हैं.

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    ये है इलाज का तरीका
    इस रोग के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है. डॉक्टर एंटीबायोटिक्स या एंटीफंगल दवाओं के साथ ट्रीटमेंट शुरू कर सकते हैं. अगर इस रोग का अंगों पर प्रभाव पड़ा है और अंग खराब होना शुरू हो गए हों, तो ऐसे में अतिरिक्त सहायक उपचार की जरूरत हो सकती है. कुछ गंभीर मामलों में इमरजेंसी सर्जरी करनी पड़ सकती है. किडनी डायलिसिस पर होने पर संक्रमण खत्म होने तक आगे के उपचार के लिए इंतजार करना पड़ता है. संक्रमण बना रहता है, तो अलग-अलग तरह के डायलिसिस पर रोगी रखा जाता है.

    अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पेरिटोनाइटिस पढ़ें।

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