फर्राटेदार बोलने के लिए ऐसे खाएं फल और हरी सब्जियां: स्टडी

हरी सब्जियां और फल खाने के फायदे

हरी सब्जियां और फल खाने के फायदे (Benefits of Eating Fruits And Green Vegetables): शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना फल और सब्जी की औसत खपत में हर बढ़ोतरी वर्बल स्कोर से जुड़ी थी, लेकिन सबसे अच्छे परिणाम उन लोगों में पाए गए जिन्होंने एक दिन में कम से कम 6 सर्विंग का सेवन किया.

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    हरी सब्जियां और फल खाने के फायदे (Benefits of Eating Fruits And Green Vegetables): आमतौर बच्चे अपने माता-पिता से यह सुनते हुए ही बड़े होते हैं कि उन्हें खूब सब्जियां खानी चाहिए. वे जरूर सही कहते हैं, लेकिन उन्हें शायद खुद नहीं पता होगा कि सब्जियों का सेवन बोलने के प्रवाह यानी वर्बल फ्लुएंसी बढ़ाने में मदद कर सकती है. दूसरे शब्दों में कहें तो ज्यादा सब्जियां और फल खाने वाले फर्राटेदार बोलते हैं. वर्बल फ्लुएंसी से मतलब है मेमोरी से सूचना प्राप्त करने की क्षमता से भी है. बच्चों में सब्जियां और फल खाने का यह एक और बड़ा फायदा हो सकता है.

    एक अध्ययन में सामने आया है कि जिन लोगों ने ज्यादा सब्जियां, फलों, सूखे मेवों और दालों का सेवन किया, उन्होंने वर्बल फ्लुएंसी टेस्ट में अधिक स्कोर किया. अध्ययन में 45 से 85 वर्ष की आयु के अंग्रेजी बोलने वाले कनाडाई लोगों को शामिल किया गया था. इसमें वर्बल फ्लुएंसी से जुड़े कारकों की जांच की गई थी. वर्बल फ्लुएंसी टेस्ट में व्यक्ति से एक मिनट में ज्यादा से ज्यादा शब्द बताने के लिए कहा जाता है.

    जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन हेल्थ एंड एजिंग में प्रकाशित इस अध्ययन में 8574 प्रतिभागियों का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 1126 अप्रवासी थे जो 20 साल या उससे ज्यादा समय पहले कनाडा आए थे. सभी प्रतिभागी डेमेंशिया (भूलने की बीमारी) से मुक्त थे. उनके दो टेस्ट किए गए, एक था कंट्रोल्ड ओरल वर्ड एसोसिएशन टेस्ट जिसमें व्यक्ति को एक शब्द दिया गया और उन्हें इससे जुड़े उनके दिमाग में आने वाले पहले शब्द को बताना था. दूसरा टेस्ट एनिमल फ्लुएंसी टेस्ट था जिसमें उन्हें एक मिनट में ज्यादा से ज्यादा जानवरों के नाम बताने थे.

    शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना फल और सब्जी की औसत खपत में हर बढ़ोतरी वर्बल स्कोर से जुड़ी थी, लेकिन सबसे अच्छे परिणाम उन लोगों में पाए गए जिन्होंने एक दिन में कम से कम 6 सर्विंग का सेवन किया. पोषण के अलावा शोधकर्ताओं ने अन्य कारकों जैसे अप्रवासी स्थिति, आयु, रक्तचाप, मोटापा और शरीर में वसा को भी देखा.

    अध्ययन का एक तरीका यह भी

    वे वयस्क जिन्हें भूख की कमी या जो कम गुणवत्ता वाले आहार का सेवन करते हैं, उन्हें कुपोषण का जोखिम हो सकता है और अंडर-न्यूट्रीशन (कम पोषक तत्व) का आकलन करने के लिए ग्रिप स्ट्रेंथ का इस्तेमाल किया जा सकता है. अध्ययन में जिन प्रतिभागियों की कमजोर पकड़ थी, उनमें वर्बल फ्लुएंसी कम पाई गई.

    आहार में फल और सब्जियां इसलिए भी जरूरी 

    myUpchar से जुड़े डॉ. आयुष पांडे का कहना है कि शरीर को कई विटामिन और मिनरल्स की जरूरत होती है जो कि शरीर के विकास और बीमारियों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं. इन विटामिन और मिनरल्स को अक्सर सूक्ष्म पोषक तत्वों के रूप में जाना जाता है. वे शरीर में स्वाभाविक रूप से उत्पादित नहीं होते हैं, इसलिए इन्हें अपने आहार से प्राप्त करना होता है.

    myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. अनुराग शाही का कहना है कि कुपोषण तब होता है जब किसी व्यक्ति के आहार में पोषक तत्वों की सही मात्रा नहीं होती है. यदि प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और मिनरल्स सहित पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते हैं तो कुपोषण से पीड़ित हो सकते हैं. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, शुगर की बीमारी के लिए घरेलू उपाय पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

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