Plastic Surgery Day 2020: क्या होता है ब्रेस्ट इम्प्लांट, जानें इससे जुड़े 7 मिथक और उनकी सच्चाई

Plastic Surgery Day 2020: क्या होता है ब्रेस्ट इम्प्लांट, जानें इससे जुड़े 7 मिथक और उनकी सच्चाई
ब्रेस्ट इम्प्लांट सजर्री

ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट में सिलिकॉन या सलाइन का इम्प्लांट लगाया जाता है ताकि ब्रेस्ट को भरा हुआ और बेहतर आकार दिया जा सके.

  • Last Updated: July 15, 2020, 6:17 AM IST
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स्तन को बढ़ाना (ब्रेस्ट ऑगमेंटेशन) एक सर्जिकल प्रक्रिया है और उन महिलाओं के लिए की जाती है जो अपने स्तनों (Breast) का आकार बदलना या उन्हें नया आकार देना चाहती हैं. इस तरह के ज्यादातर मामलों में ब्रेस्ट में सिलिकॉन या सलाइन का इम्प्लांट लगाया जाता है ताकि ब्रेस्ट को भरा हुआ और बेहतर आकार दिया जा सके. इम्प्लांट करवाने वाली महिलाओं को सबसे बेस्ट और प्राकृतिक दिखने वाले नतीजे मिल पाएं, इसके लिए इम्प्लांट्स अलग-अलग साइज, आकार और शैली में मिलते हैं. इम्प्लांट करवाने वाली महिला के शरीर के ढांचे और उनके सौंदर्य लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक सर्जन यह निर्धारित करते हैं कि कौन सा प्रत्यारोपण वांछित परिणाम देगा.

कई कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से कोई महिला ब्रेस्ट इम्प्लांट यानी स्तन प्रत्यारोपण का फैसला लेती है या तो वे अपने शारीरिक दिखावट में बदलाव करना चाहती हैं या फिर ब्रेस्ट कैंसर से बचने के लिए या ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए उनका स्तन-उच्छेदन (मैस्टेक्टोमी) किया जाता है जिसकी वजह से उन्हें स्तन की पुनर्रचना की जरूरत पड़ती है. ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाने का किसी का कारण चाहे जो हो, लेकिन आपने ब्रेस्ट इम्प्लांट के बारे में हो सकता है कि बहुत सी बातें सुनी हों जो वास्तव में सिर्फ मिथक हों. आज, 15 जुलाई को प्लास्टिक सर्जरी दिवस के मौके पर, हम ब्रेस्ट इम्प्लांट से जुड़े ऐसे ही मिथकों की हकीकत आपको बता रहे हैं.



मिथक 1 : एक बार करवाया गया इम्प्लांट जीवनभर टिकता है
हकीकत :
इसमें कोई शक नहीं कि ब्रेस्ट इम्प्लांट की उपयोग होने की अवधि (शेल्फ-लाइफ) लंबी होती है, लेकिन वे हमेशा के लिए या जीवनभर के लिए नहीं होता. सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट आमतौर पर 10 से 15 साल तक ही रहता है. हालांकि अगर 15 साल के बाद भी आपको अपने ब्रेस्ट में किसी तरह की समस्या उत्पन्न नहीं होती तो आपको दोबारा इम्प्लांट करवाने की जरूरत नहीं है. अगर सही ढंग से उचित देखभाल की जाए, तो स्तन प्रत्यारोपण जीवन भर भी चल सकता है.

मिथक 2 : इम्प्लांट के साथ ब्रेस्टफीडिंग नहीं करवायी जा सकती
हकीकत :
ब्रेस्ट इम्प्लांट के साथ ब्रेस्टफीडिंग करवाना पूरी तरह से संभव है, क्योंकि प्रत्यारोपण ब्रेस्ट की संरचना या बनावट को नहीं बदलता है. ब्रेस्ट के पुनर्निमाण के कुछ मामलों में और कई बार जब स्तन में चीरा या टांका लगता है तो इस तरह के कुछ मामलों में ब्रेस्टफीडिंग करवाना चुनौतिपूर्ण हो सकता है. आप चाहें तो इस बारे में पहले से ही अपने प्लास्टिक सर्जन से चर्चा कर सकती हैं.

मिथक 3 : इम्प्लांट की वजह से ब्रेस्ट देखने में नकली लगता है
हकीकत :
आप जिस प्लास्टिक सर्जन से ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाती हैं वे आपके लिए बिलकुल सही इम्प्लांट का साइज, आकार और प्रकार चुनने में आपकी मदद करते हैं, ताकि वह आपके शरीर के लिए बिलकुल उपयुक्त हो. ब्रेस्ट इम्प्लांट का सही साइज और उसकी प्लेसमेंट (सही नियोजन) बेहद जरूरी फैक्टर्स हैं ताकि यह सुनिश्चित हो पाए कि आपका ब्रेस्ट प्राकृतिक दिखे, नकली नहीं.

मिथक 4 : इम्प्लांट करवाना और सर्जरी से रिकवर होना बेहद दर्दनाक और तकलीफदेह होता है
हकीकत :
हर मरीज के शरीर का घाव अलग-अलग तरह से भरता है. ज्यादातर लोगों के मन में यह गलतफहमी होती है कि ब्रेस्ट इम्प्लांट असुविधाजनक होता है. हां यह सच है कि शुरुआती कुछ दिनों में थोड़ा बहुत दर्द होता है, लेकिन उसे दर्दनिवारक दवाइयों की मदद से आसानी से मैनेज किया जा सकता है. सर्जरी की रिकवरी मरीज के हिसाब से अलग हो सकती है लेकिन कुछ ही हफ्तों में आप अपने रोजमर्रा के सामान्य कामों में वापस लौट सकती हैं.

मिथक 5 : सिर्फ कम उम्र की युवतियां हीं ब्रेस्ट इम्प्लांट करवा सकती हैं
हकीकत :
भारत की बात करें तो यहां पर ब्रेस्ट इम्प्लांट की सर्जरी 18 साल के उम्र के बाद की जा सकती है, लेकिन यह आमतौर पर 30 से 40 साल की उम्र की महिलाओं में ही की जाती है. वैसे तो ब्रेस्ट इम्प्लांट की सर्जरी किसी भी उम्र में की जा सकती है बशर्ते कि मरीज एक वयस्क हो, अच्छे स्वास्थ्य में हो और उसके लक्ष्य वास्तविक हों.

मिथक 6 : ब्रेस्ट इम्प्लांट सुरक्षित नहीं होते हैं
हकीकत :
सर्जरी से जुड़ी किसी भी तरह की प्रक्रिया अपने-अपने जोखिम और जटिलताओं के साथ आती है, ऐसे में प्लास्टिक सर्जरी इससे कोई अलग नहीं है लेकिन ब्रेस्ट इम्प्लांट प्लास्टिक सर्जरी के तहत की जाने वाली सबसे अधिक निष्पादित प्रक्रियाओं में से एक है, जिसमें सुरक्षा के बारे में काफी बातें की जाती हैं.

मिथक 7 : इम्प्लांट के नतीजे तुरंत मिल जाते हैं
हकीकत :
वैसे तो इम्प्लांट की प्रक्रिया करवाने के तुरंत बाद आपको खुद में ध्यान देने योग्य तत्काल अंतर दिखाई देने लगेगा, लेकिन सर्जरी की प्रक्रिया के परिणाम अलग-अलग लोगों में अलग तरह के हो सकते हैं. सर्जरी की प्रक्रिया के बाद मरीज में अक्सर सूजन हो जाती है इसलिए वास्तविक परिणाम कुछ हफ्तों के बाद ही नजर आते हैं. लिहाजा बेहद जरूरी है कि आप सर्वोत्तम परिणाम हासिल करने के लिए अपने प्लास्टिक सर्जन द्वारा दिए गए सभी पूर्व और बाद के निर्देशों का पालन करें. (इस आर्टिकल को डॉ प्रीति पांड्या ने माइ उपचार के लिए लिखा है जो गुरुग्राम स्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टिट्यूट में प्लास्टिक, कॉस्मेटिक और पुनर्निमाण सर्जरी की कंसल्टेंट हैं) अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, ब्रेस्ट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और मिथक जिनका आपको होना चाहिए पता पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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