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SARS के मरीज में मिली नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 की संभावित काट, स्टडी में हुआ खुलासा

Myupchar
Updated: May 25, 2020, 3:44 PM IST
SARS के मरीज में मिली नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 की संभावित काट, स्टडी में हुआ खुलासा
दुनियाभर की कई लैब्स में कोविड-19 के इलाज के लिए कारगर एंटीबॉडी खोजने की कोशिशें हो रही हैं.

शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की मदद से एक अमेरिकन बायोटेक कंपनी वीर बायोटेक्नोलॉजी 17 साल पहले 2003 में फैली बीमारी SARS के एक मरीज के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी (Antibody) की मदद से कोविड-19 का इलाज ढूंढने की कोशिश कर रही है.

  • Last Updated: May 25, 2020, 3:44 PM IST
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नए कोरोना वायरस (New Coronavirus) सार्स-सीओवी-2 (SARS-COV-2) की वजह से होने वाली बीमारी कोविड-19 (Covid-19) की संभावित काट इसी कोरोना वायरस परिवार के सदस्य 'सार्स-सीओवी-1' से फैली बीमारी सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी SARS से मिल सकती है. शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की मदद से एक अमेरिकन बायोटेक कंपनी वीर बायोटेक्नोलॉजी 17 साल पहले 2003 में फैली बीमारी SARS के एक मरीज के शरीर में मौजूद एंटीबॉडी (Antibody) की मदद से कोविड-19 का इलाज ढूंढने की कोशिश कर रही है.

मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का नाम है 'S309'
कंपनी द्वारा किए गए शोध के मुताबिक, 2003 में फैले SARS से संक्रमित हुए इस मरीज के ब्लड सैंपल में ऐसी एंटीबॉडी मिली है, जो नए कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 को रोक सकती है. कंपनी द्वारा जारी किए बयान के मुताबिक, इस मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का नाम है 'S309'. शोध में शामिल यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन के अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि उन्हें इस एंटीबॉडी में सार्स-सीओवी-2 के स्पाइक प्रोटीन को बांध कर उसे बेअसर करने की मजबूत क्षमता दिखी है. गौरतलब है कि इसी स्पाइक प्रोटीन की मदद से नया कोरोना वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश करता है.

प्रभावकारी रोगनिरोधी और चिकित्सीय एजेंट



शरीर में मौजूद मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज वे होते हैं जो सिंगल पैरंट से बने होते हैं और एंटीजेन यानी शरीर पर हमला करने वाले बाहरी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करते हैं. हालांकि, यह परिणाम लैब में किए गए टेस्ट के हैं. मानव शरीर में फैले सार्स-सीओवी-2 पर यह एंटीबॉडी काम करेगा या नहीं, इसके लिए अभी काफी अध्ययन करना होगा. इस स्टडी के नतीजों को पीयर रिव्यूड पत्रिका 'नेचर' में प्रकाशित किया गया है. मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को प्रभावकारी रोगनिरोधी और चिकित्सीय एजेंट के तौर पर देखा जाता है, जिनका इस्तेमाल संक्रामक बीमारियों के खिलाफ किया जा सकता है. मौजूदा समय में कैंसर और इन्फ्लेमेटरी बीमारियों के इलाज में 20 से ज्यादा मोनोक्लोनल एंटीबॉडी प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.



गंभीर वायरल इंफेक्शन्स के खिलाफ असरदार
एक्सपर्ट्स की मानें तो मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज को गंभीर वायरल इंफेक्शन्स के खिलाफ असरदार माना जाता है. हालांकि, कई अध्ययनों की मानें तो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी असरदार साबित हो, इसके लिए सिंगल एंटीबॉडी की जगह मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के ग्रुप का इस्तेमाल करने की जरूरत होगी. वीर बायोटेक्नोलॉजी की स्टडी में भी यही कहा गया कि वायरस को निष्क्रिय करने के लिए अकेले मोनोक्लोनल एंटीबॉडी 309 नहीं, बल्कि मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज का ग्रुप ज्यादा असरदार साबित हो सकता है.

शरीर ने सार्स को खत्म करने वाले एंटीबॉडीज पैदा कर लिए हैं
रिपोर्ट्स की मानें तो जिस मरीज के शरीर में S309 एंटीबॉडी मिला है, उस पर शोधकर्ता 2004 से नजर बनाए हुए थे. इस दौरान उन्हें पता चला कि उसके शरीर ने सार्स को खत्म करने वाले एंटीबॉडीज पैदा कर लिए हैं. इस जानकारी ने उन्हें तेजी से अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया. अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने 25 एंटीबॉडीज की जांच की. इनमें से कइयों में सार्स-सीओवी-2 को बांधने की क्षमता दिखाई दी थी, लेकिन एस309 की क्षमता ने शोधकर्ताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया.

कोविड-19 के इलाज के लिए कारगर एंटीबॉडी खोजने की कोशिश
आगे के अध्ययन में उन्होंने पाया कि जब एस309 को बाकी एंटीबॉडीज के साथ मिलाया गया तो इससे सार्स-सीओवी-2 को बेअसर करने की उसकी क्षमता और ज्यादा बढ़ गई. अब वे इस एंटीबॉडी से बनाई गई दो दवाइयों के क्लिनिकल ट्रायल इसी सीजन में करने की तैयारी कर रहे हैं. दुनियाभर की कई लैब्स में कोविड-19 के इलाज के लिए कारगर एंटीबॉडी खोजने की कोशिशें हो रही हैं, जो सार्स-सीओवी-2 को इंसान के शरीर में मौजूद कोशिकाओं को संक्रमित होने से रोक सकें लेकिन यह कोशिश उन लोगों की मदद से की जा रही है, जो कोविड-19 से बीमार होकर इससे उबर चुके हैं. वहीं, मौजूदा शोध के तार सार्स बीमारी से जुड़े हैं, जो साल 2003 में सार्स-सीओवी-1 वायरस के संक्रमण के चलते फैली थी.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, कोविड-19 से लड़ने के लिए मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का महत्व पढ़ें.

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First published: May 23, 2020, 7:17 AM IST
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