सर्दियों में सीजनल डिप्रेशन हो सकता है घातक? सोशल डिस्टेंसिंग है वजह

सोशल डिस्टेंसिंग के कारण सर्दियों में सीजनल डिप्रेशन का असर हो सकता है बदतर
सोशल डिस्टेंसिंग के कारण सर्दियों में सीजनल डिप्रेशन का असर हो सकता है बदतर

सोशल डिस्टेंसिंग जहां कोविड-19 (Coronavirus) के प्रसार को कम करने में प्रभावी माना जा रहा है वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल डिस्टेंसिंग के कारण सर्दियों में सीजनल डिप्रेशन (Seasonal Depression Effect) का असर और गंभीर हो सकता है...

  • Last Updated: October 27, 2020, 6:31 AM IST
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सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर (एसएडी), अवसाद से जुड़ा एक ऐसा विकार है जो मौसम में परिवर्तन के साथ लोगों को प्रभावित करता है. चूंकि यह ज्यादातर सर्दियों के मौसम में होता है, इसलिए इसे 'विंटर डिप्रेशन या विंटर ब्लूज़' के नाम से भी जाना जाता है. एसएडी को सीजनल डिप्रेशन भी कहा जाता है. मौजूदा समय में दुनियाभर में फैले कोविड-19 महामारी के कारण लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग यानी सामाजिक दूरी के नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है. एक ओर सोशल डिस्टेंसिंग जहां कोविड-19 के प्रसार को कम करने में प्रभावी माना जा रहा है वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल डिस्टेंसिंग के कारण सर्दियों में एसएडी का असर और गंभीर हो सकता है.

एसएडी का प्रभाव पतझड़ के मौसम के आखिरी दिनों और सर्दियों की शुरुआत में अधिक देखने को मिलता है. महिलाएं और युवा, एसएडी के अधिक शिकार होते हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. आइए एसएडी के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं.



सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर में कौन से लक्षण नजर आते हैं?
ज्यादातर मामलों में एसएडी के लक्षण पतझड़ के मौसम के आखिरी दिनों और सर्दियों की शुरुआत में ज्यादा दिखाई देते हैं और गर्मियों के दिनों में स्वत: ही ठीक हो जाते हैं. हालांकि, कुछ लोगों में इसके लक्षण वसंत या गर्मियों में शुरू हो सकते हैं.

सामान्यत: एसएडी की पहचान इन लक्षणों और संकेतों के आधार पर की जा सकती है -

  • उदास महसूस करना

  • हर समय दुखी रहना

  • नकारात्मक विचार आना

  • ऊर्जा की कमी

  • हाई कार्ब्स वाले खाद्य पदार्थों को खाने की तीव्र इच्छा

  • अनिद्रा की शिकायत

  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई


सर्दियों के दौरान एसएडी के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं

  • ऊर्जा की कमी

  • दिन में बहुत अधिक नींद आना

  • भूख में वृद्धि

  • लोगों से दूर रहने की इच्छा होना


सीजनल डिप्रेशन किन कारणों से होता है?

सीजनल डिप्रेशन किन कारणों से होता है यह स्पष्ट नहीं है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ लोगों में आनुवंशिक असामान्यताओं के कारण इस प्रकार की समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा निम्न कारणों से भी एसएडी का खतरा बढ़ जाता है.

सर्कैडियन रिदम

विशेषज्ञों के मुताबिक सीजनल डिप्रेशन का धूप से गहरा संबंध होता है. पतझड़ और सर्दियों में धूप की कमी के ​कारण एसएडी का खतरा बढ़ जाता है. इन मौसमों में धूप में कमी शरीर के इंटरनल क्लॉक को बाधित कर देती है जिसके कारण अवसाद की भावना जन्म लेने लगती है.

सेरोटोनिन के स्तर में गिरावट

मस्तिष्क में मौजूद, मूड को प्रभावित करने वाले रसायन सेरोटोनिन में गिरावट के कारण भी सीजनल डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. धूप की कमी के कारण सेरोटोनिन के स्तर में गिरावट आ जाती है जो अवसाद को बढ़ावा दे सकती है.

मेलाटोनिन के स्तर में परिवर्तन

मौसम में परिवर्तन के कारण शरीर के मेलाटोनिन का संतुलन भी बाधित हो जाता है. मेलाटोनिन, नींद के पैटर्न और मनोदशा को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.



इसके अलावा एसएडी का खतरा इन लोगों में अधिक होता है -

  • पुरुषों की तुलना में महिलाओं को एसएडी का खतरा चार गुना अधिक होता है

  • उत्तरी या दक्षिणी ध्रुवों के पास रहने वाले लोगों में एसएडी की आशंका बढ़ जाती है

  • जिन लोगों के परिवार में किसी को पहले से एसएडी की समस्या रही हो, उनमें भी खतरा अधिक होता है

  • वृद्ध लोगों की तुलना युवाओं को एसएडी होने का खतरा ज्यादा होता है

  • विटामिन डी की कमी से अवसादग्रस्तता का खतरा बढ़ जाता है




सीजनल डिप्रेशन का निदान और इलाज

चूंकि सीजनल डिप्रेशन और अन्य प्रकार के अवसाद या मानसिक स्थितियों के लक्षण लगभग समान होते हैं ऐसे में इसका निदान कर पाना थोड़ा कठिन होता है. हालांकि, कुछ परीक्षणों के माध्यम से इसकी पुष्टि की जा सकती है. सीजनल डिप्रेशन की पुष्टि के लिए डॉक्टर फिजिकल टेस्ट के अलावा ब्लड टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं. ब्लड टेस्ट के माध्यम से यह पता चल जाता है कि शरीर में थॉयराइट ठीक से फंक्शन कर रहा है या नहीं? इन्हीं परीक्षणों के आधार पर इलाज की प्रक्रियाओं को प्रयोग में लाया जाता है.

सीजनल डिप्रेशन का इलाज

सीजनल डिप्रेशन के इलाज के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली सबसे प्रचलित चिकित्सा है- लाइट थेरपी. इसे फोटोथेरेपी के नाम से भी जाना जाता है. इस उपचार विधि में रोगी को कृत्रिम प्रकाश स्रोत के संपर्क में रखा जाता है. अवसाद के इलाज में इस थेरपी को काफी प्रभावी माना जाता है. प्रभावी परिणाम प्राप्त करने के लिए इस चिकित्सा विधि को दैनिक रूप से प्रयोग में लाने की सलाह दी जाती है. इसके अलावा रोगी को अवसाद रोधी और विटामिन डी की खुराक दी जाती है. रोगी में सकारात्मक भावनाओं के संचार के लिए आवश्यकतानुसार कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) का उपयोग किया जा सकता है. विशेषज्ञों के मुताबिक चूंकि एएसएडी विकार मौसम परिवर्तन से संबंधित है इसलिए इसपर विशेष ध्यान देकर ट्रिगर होने से रोका जा सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, सीजनल अफेक्टिव डिसऑर्डर क्या है, इसके लक्षण क्या हैं, इलाज कैसे होता है पढ़ें।)  (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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