दिल के साथ याददाश्त के लिए भी बुरा है तनाव, जानिए बचाव का तरीका

तनाव व्यक्ति के मूड को प्रभावित करता है. Image Credit/Pexels Keenan-Constance
तनाव व्यक्ति के मूड को प्रभावित करता है. Image Credit/Pexels Keenan-Constance

तनाव (Stress) जैसे-जैसे बढ़ने लगता है और दीर्घकालिक हो जाता है, यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (Immune Response) को कम कर देता है, जिस कारण व्यक्ति को बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.

  • Last Updated: October 26, 2020, 10:07 AM IST
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तनाव (Stress) क्या है ये तो हम सबने स्कूल में सातवीं क्लास में बायोलॉजी की क्लास के दौरान जरूर पढ़ा होगा जिसमें बताया गया था कि तनाव नई चुनौतियों और खतरों के लिए शरीर की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है. किसी भी समय जब हम अपने कंफर्ट जोन यानी आराम क्षेत्र से बाहर निकलकर कुछ करने की कोशिश करते हैं, तो थोड़ा तनाव होना तो स्वाभाविक सी बात है. लेकिन आज दुनिया भर में जो महामारी (Corona Epidemic) फैली है उसने लोगों की शारीरिक सेहत (Physical Health) के साथ ही मानसिक सेहत को भी इस कदर प्रभावित कर दिया है कि लोगों का तनाव बढ़ा हुआ है. इस तनाव की वजह से लोग डिप्रेशन, ऐंग्जाइटी, पीटीएसडी, जैसी मानसिक समस्याओं से पीड़ित हो रहे हैं.

लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर के लिए मुसीबत बन सकता है
मेडिकली देखा जाए तो तनाव या स्ट्रेस, भावनात्मक या शारीरिक खिंचाव या परेशानी की एक स्थिति है. आपका शरीर कुछ समय के लिए तो तनाव को संभाल सकता है, लेकिन जब यही तनाव किसी च्यूइंग गम की तरह लंबे समय तक खिंचता चला जाए तो यह आपके मस्तिष्क और शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों के लिए मुसीबत बन सकता है, भारत की बात करें तो साल 2018 में हुए एक सर्वे में पाया गया कि 89 प्रतिशत भारतीय ऐसे हैं जो लंबे समय से स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं, तो वहीं स्ट्रेस में रहने वाले लोगों का वैश्विक औसत 86 प्रतिशत है. सर्वे में यह बात भी सामने आयी कि बुजुर्गों और पुरानी पीढ़ी के लोगों की तुलना में युवाओं और 21वीं शताब्दी के लोगों में तनाव की समस्या और भी ज्यादा बदतर है.
तनाव का कारण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है. कारण चाहे जो हो- काम का जबरदस्त बोझ, रिश्तों से जुड़ी समस्याएं, आर्थिक तंगी, भावनात्मक परेशानी, बीमारी का डर आपकी परेशानियां जितने अधिक समय तक रहेंगी, उतना ही अधिक आपके शरीर को स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल से निपटना होगा. कुछ मामलों में, स्ट्रेस, क्रॉनिक स्ट्रेस यानी लंबे समय तक जारी रहने वाले तनाव में भी बदल जाता है. तनाव आपके शरीर के अलग-अलग हिस्सों को किस तरह से प्रभावित करता है, यहां जानें-



1. याददाश्त और मूड पर असर: तनाव मस्तिष्क के कुछ हिस्सों में तीव्र (एक्यूट) और पुराने (क्रॉनिक) परिवर्तन का कारण बन सकता है जिसकी वजह से ब्रेन में दीर्घकालिक नुकसान की आशंका बनी रहती है. तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का अधिक स्राव कई बार याददाश्त को भी बाधित करने का काम करता है. साथ ही तनाव अनुभूति, ध्यान और स्मृति (मेमोरी) के साथ भी हस्तक्षेप करने लगता है. जब कोई व्यक्ति तनावग्रस्त होता है तो वह चिंता, भय, क्रोध, उदासी, या हताशा सहित कई अलग-अलग भावनाओं का अनुभव करता और ये सारी चीजें मिलकर उसके मूड को प्रभावित करती हैं.

2. इम्यून सिस्टम पर असर: जैसे-जैसे तनाव बढ़ने लगता है और दीर्घकालिक हो जाता है, यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (इम्यून रिस्पॉन्स) को कम कर देता है, जिस कारण व्यक्ति को बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. शरीर में लंबे समय तक बने रहने वाला तनाव साइटोटॉक्सिक टी लिम्फोसाइट्स की प्रभावकारिता को भी कम कर देता है, जो शरीर को कैंसर और ट्यूमर से लड़ने में मदद करते हैं.

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3. हृदय संबंधी कार्यों पर असर: जब कोई व्यक्ति किसी तनावपूर्ण स्थिति में होता है तो उसका शरीर एड्रेनलिन रिलीज करता है. यह एक ऐसा हार्मोन है जो अस्थायी रूप से आपकी सांस लेने की दर और हृदय गति को तेज कर देता है और आपका ब्लड प्रेशर भी बढ़ने लगता है. ये सारी प्रतिक्रियाएं आपको एक खास तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार करती हैं जिसे "फाइट या फ्लाइट" प्रतिक्रिया कहते हैं. लेकिन तनाव के प्रति शरीर के इस रिऐक्शन के कारण शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ने लगती है और जब यह मांग पूरी नहीं होती है, तो यह खतरनाक हो सकता है और व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ सकता है.

4. पाचन तंत्र पर असर: गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जठरांत्र) या जीआई सिस्टम पर तनाव के प्रभावों को दो पहलुओं में वर्गीकृत किया जा सकता है. पहला- जो लोग तनाव में होते हैं उन्हें अक्सर भूख नहीं लगती और दूसरा- तनाव आपके सामान्य जीआई कामकाज को प्रभावित करता है. यह बदले में इरेटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी बीमारियों को जन्म देता है. इतना ही जब आप स्ट्रेस में होते हैं तो लिवर शरीर में ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त ब्लड शुगर (ग्लूकोज) का उत्पादन करता है. अगर आप लगातार लंबे समय तक स्ट्रेस में रहें तो आपका शरीर इस अतिरिक्त ग्लूकोज की वृद्धि को संभाल नहीं पाता और इस कारण टाइप 2 डायबिटीज का जोखिम बढ़ जाता है.

5. मांसपेशियों पर असर: जब आप तनाव में होते हैं तो आपकी मांसपेशियों में भी खिंचाव उत्पन्न होता है और मांसपेशियों खुद को चोट से बचाने के लिए ऐसा करती हैं. एक बार जब तनाव खत्म हो जाता है और आप रिलैक्स हो जाते हैं तो मांसपेशियां भी आराम की स्थिति में लौट आती हैं, लेकिन अगर आप लगातार तनाव में रहते हैं, तो आपकी मांसपेशियों को आराम करने का मौका नहीं मिल पाता. टाइट और खिंचाव वाली मांसपेशियों के कारण व्यक्ति को सिरदर्द, पीठ में दर्द, कंधे में दर्द और शरीर में दर्द होने लगता है.

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तनाव को मैनेज करने का तरीका
- लंबे समय तक रहने वाला तनाव आपके शरीर के लिए कितना खतरनाक हो सकता है, आपने देख लिया इसलिए जहां तक संभव हो अपने रोजाना के तनाव को कम करने की कोशिश करें, और आराम करने के लिए समय निकालें.

- अगर किसी बात को लेकर आपको तनाव महसूस हो रहा हो तो अपने परिवार के लोगों और दोस्तों से बात करें. कई बार बात करने से आप चीजों को सही परिप्रेक्ष्य में देख पाते हैं. कोई भी समस्या हो तो अपने प्रियजनों की सलाह लें और उनसे मदद मांगें.

- लंबे समय तक रहने वाले तनाव को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है एक्सरसाइज करना क्योंकि एक्सरसाइज के दौरान फील गुड (हैपी) हार्मोन एंडोर्फिन रिलीज होता है जो आपके मूड को बेहतर बनाता है. वॉकिंग, रनिंग, स्विमिंग जो पसंद हो वो एक्सरसाइज करें. रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज करना शरीर के साथ-साथ मानसिक सेहत के लिए भी फायदेमंद है. लिहाजा फिट रहें और स्वस्थ और संतुलित भोजन का सेवन करें.

- रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद लें. अच्छी नींद किस तरह से आपके हृदय और मस्तिष्क को स्वस्थ रख सकती है इस बारे में भी वैज्ञानिक कई रिसर्च कर चुके हैं. लिहाजा नींद भी तनाव को कम करने में मदद करती है.

- योग और मेडिटेशन भी तनाव को मैनेज करने में आपकी मदद कर सकते हैं.

- किसी भी काम को करने से पहले अच्छी तरह से योजना बनाएं. इससे पहले कि आप कुछ भी करें, उस काम के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं का विश्लेषण करें. जितना संभव हो, अनावश्यक रूप से तनावपूर्ण स्थितियों से बचें.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल तनाव क्या है, लक्षण, कारण, इलाज के बारे में पढ़ें।

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