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पेप्सी और कोक को टक्कर देगा मेड इन इंडिया गन्ने का रस

पेप्सी और कोक को टक्कर देगा मेड इन इंडिया गन्ने का रस

पेप्सी और कोका कोला को टक्कर देने जल्द ही मेड इन इंडिया गन्ने का जूस बाजार में आएगा. इसके लिए परीक्षण शुरू कर दिया गया है.

पेप्सी और कोका कोला को टक्कर देने जल्द ही मेड इन इंडिया गन्ने का जूस बाजार में आएगा. इसके लिए परीक्षण शुरू कर दिया गया है.

पेप्सी और कोका कोला को टक्कर देने जल्द ही मेड इन इंडिया गन्ने का जूस बाजार में आएगा. इसके लिए परीक्षण शुरू कर दिया गया है.

पेप्सी और कोका कोला को टक्कर देने जल्द ही मेड इन इंडिया गन्ने का जूस बाजार में आएगा. इसके लिए परीक्षण शुरू कर दिया गया है.

दुकानों में जल्द ही कोल्ड ड्रिंक के साथ गन्ने के जूस से भरी बोतलें भी सजी नजर आएंगी. अगर ऐसा होता है तो इससे करोड़ों की इंडस्ट्री खड़ी हो जाएगी.

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के निदेशक डॉ. आलोक धवन का मानना है कि गन्ने के रस को तीन से चार महीने तक प्रिजर्व रखते हुए और इससे स्वास्थ्य को होने वाले लाभ व लोकप्रियता के कारण करोड़ों की कंपनी खड़ी की जा सकती है. इसका सीधा फायदा किसानों को होगा.

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद की सात प्रयोगशालाएं मिलकर इस ओर काम कर रही हैं. इसके अलावा खाद्य सुरक्षा से संबंधित अन्य प्रयोग भी किए जा रहे हैं. हालांकि, ये काम आसान नहीं होगा.

सीएसआईआर के महानिदेशक डॉ. गिरीश साहनी का कहना है कि, "यह सच है विभिन्न विषयों से वैज्ञानिकों, उदाहरण के लिए, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान, जीव विज्ञान, अक्सर आपस में मिलना और उनके सामूहिक ज्ञान को एक साथ रखा करने का अवसर नहीं मिलता है. "

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों ने मिलावट और खराब हो जाने के कारण होने वाली खाने की बर्बादी को रोकने पर काम करने का फैसला किया है. हर साल 92 हजार करोड़ रुपए का खाना ग्राहकों तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है.

वहीं करीब 13 हजार "मेड इन इंडिया" के ऐसे आइटम हैं, जिन्हें 2011-2015 के दौरान अमेरिकी एफडीए ने अस्वीकार कर दिया. ये  भारत के आर्थिक हितों पर एक गंभीर चोट है.

'फोकस' नाम के खाद्य सुरक्षा मिशन अमूल, आईटीसी और एफसीआई के साथ मिलकर काम कर रहा है. इससे गरीबों और कुपोषण से पीड़ित लोगों को खाना मुहैया कराने की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी.

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