ब्रेन स्ट्रोक के बाद एक्टर राहुल रॉय में दिखे अफेजिया के लक्षण, जानें क्या है ये बीमारी

ब्रेन स्ट्रोक के बाद एक्टर राहुल रॉय में दिखे अफेजिया के लक्षण, जानें क्या है ये बीमारी
ब्रेन स्ट्रोक के बाद राहुल रॉय में अफेजिया (Aphasia) यानी वाचाघात के लक्षण भी दिखायी दे रहे हैं.

अफेजिया (Aphasia) या वाचाघात की स्थिति अचानक ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) होने या सिर में चोट लगने के बाद देखने को मिलती है. हालांकि यह धीरे-धीरे फैलने वाले ब्रेन ट्यूमर या किसी ऐसी बीमारी की वजह से भी हो सकता है जो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचाता है.

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  • Last Updated : December 1, 2020, 2:30 pm IST
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    बॉलीवुड एक्टर राहुल रॉय (Rahul Roy) को करगिल (Kargil) में फिल्म की शूटिंग के दौरान अचानक ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) हुआ जिसके बाद उन्हें एयरलिफ्ट करके करगिल से मुंबई लाया गया और फिलहाल राहुल रॉय मुंबई के नानावटी अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती हैं. ब्रेन स्ट्रोक के बाद राहुल रॉय में अफेजिया (Aphasia) यानी वाचाघात के लक्षण भी दिखायी दे रहे हैं. आपको बता दें कि वाचाघात एक ऐसी स्थिति है जो व्यक्ति के संचार करने यानी कम्यूनिकेशन की शक्ति को छीन लेती है. इतना ही नहीं अफेजिया होने पर व्यक्ति की लिखने, बोलने और समझने की शक्ति भी प्रभावित हो जाती है.

    अफेजिया या वाचाघात की स्थिति अचानक ब्रेन स्ट्रोक होने या सिर में चोट लगने के बाद देखने को मिलती है. हालांकि यह धीरे-धीरे फैलने वाले ब्रेन ट्यूमर या किसी ऐसी बीमारी की वजह से भी हो सकता है जो मस्तिष्क को स्थायी नुकसान पहुंचाता है. वाचाघात की गंभीरता कई बातों पर निर्भर करती है जिसमें इसके होने का कारण और इसकी वजह से किस हद तक मस्तिष्क को नुकसान पहुंचा है, जैसी बातें शामिल हैं. साधारण शब्दों में समझें तो अफेजिया, कम्यूनिकेशन से जुड़ी समस्या है जो मस्तिष्क के उस हिस्से को जो भाषा को कंट्रोल करता है, उसे नुकसान पहुंचने के कारण होता है. यह व्यक्ति की निम्नलिखित क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है:

    • पढ़ना

    • लिखना

    • बोलना

    • दूसरों की बातें और भाषा समझना

    • सुनना


    अमेरिका के नैशनल अफेजिया एसोसिएशन की मानें तो अमेरिका के करीब 10 लाख लोगों में अफेजिया का कोई न कोई प्रकार जरूर देखने को मिलता है. एक बार जब अफेजिया होने का कारण पता चल जाता है उसके बाद इस स्थिति का प्रमुख इलाज स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी होती है. अफेजिया से पीड़ित व्यक्ति को भाषा से जुड़े स्किल्स को दोबारा सीखने में मदद की जाती है और उन्हें संचार के अलग-अलग माध्यम के जरिए लोगों से कम्यूनिकेट करना भी सिखाया जाता है.



    अफेजिया के लक्षण
    अफेजिया के लक्षण हल्के भी हो सकते हैं और गंभीर भी. मस्तिष्क में होने वाला नुकसान किस स्तर का है और कितना गंभीर है इस पर निर्भर करता है कि अफेजिया के लक्षण किस तरह के होंगे. अफेजिया व्यक्ति की निम्नलिखित क्षमताओं को प्रभावित करता है:

    • बोलने की क्षमता

    • समझ-बूझ की क्षमता

    • पढ़ना

    • लिखना

    • अर्थपूर्ण या भावपूर्ण संवाद जिसमें शब्दों और वाक्यों का उपयोग करना शामिल है

    • ग्रहणशील संवाद जिसमें दूसरों की बातों और शब्दों को समझना शामिल है


    अर्थपूर्ण संवाद को प्रभावित करने वाले लक्षणों में शामिल है:

    • बेहद छोटे और अधूरे वाक्यों में बोलना

    • ऐसी बातें या वाक्य बोलना जिसे दूसरे लोग न समझ सकें

    • गलत शब्दों या बे-सिर-पैर के शब्दों का उपयोग करना

    • गलत क्रम में शब्दों का उपयोग करना


    ग्रहणशील संवाद को प्रभावित करने वाले लक्षणों में शामिल है:

    • दूसरे लोग जो बोल रहे हैं उनकी भाषा को समझने में कठिनाई होना

    • तेजी से बोली जा रही भाषा को समझने में कठिनाई

    • औपचारिक या प्रतीकात्मक बातों के प्रति गलतफहमी होना


    अफेजिया का कारण
    हमारे ब्रेन का वह हिस्सा जो भाषा यानी लैंग्वेज को कंट्रोल करता है उस हिस्से के एक या अधिक क्षेत्रों को नुकसान पहुंचाने के कारण वाचाघात या अफेजिया की समस्या होती है. जब ब्रेन को किसी भी तरह की क्षति पहुंचती है तो इन क्षेत्रों में खून की आपूर्ति बाधित हो सकती है. खून की आपूर्ति बाधित होने के कारण ऑक्सीजन और पोषक तत्व ब्रेन के इस हिस्से को नहीं मिल पाते हैं जिस कारण यहां मौजूद कोशिकाएं मरने लगती हैं. वाचाघात इन कारणों से हो सकता है:

    • ब्रेन ट्यूमर

    • ब्रेन इंफेक्शन

    • डिमेंशिया या कोई और तंत्रिका संबंधी विकार

    • अपकर्षक या डीजेनेरेटिव बीमारी

    • सिर में लगी कोई चोट

    • ब्रेन स्ट्रोक


    ब्रेन स्ट्रोक ही वाचाघात का सबसे आम कारण है. अमेरिका के नैशनल अफेजिया एसोसिएशन के अनुसार, वाचाघात से पीड़ित 25 से 40 प्रतिशत लोगों में यह समस्या स्ट्रोक के बाद ही होती है. इसके अलावा दौरे पड़ना या माइग्रेन की वजह से भी अस्थायी अफेजिया की समस्या हो सकती है.

    अफेजिया का इलाज
    अगर ब्रेन को होने वाली क्षति माइल्ड है तो बिना किसी इलाज के भी व्यक्ति की लैंग्वेज स्किल्स को रिकवर किया जा सकता है. हालांकि अफेजिया से पीड़ित ज्यादातर लोगों को डॉक्टर स्पीच और लैंग्वेज थेरेपी की सलाह देते हैं ताकि उनकी बोलने की क्षमता और संचार अनुभवों को दोबारा स्थापित किया जा सके. किसी भी तरह की ब्रेन इंजूरी के बाद इस थेरेपी को जितनी जल्दी हो शुरू कर देना चाहिए. मौजूदा समय में अनुसंधानकर्ता अफेजिया से पीड़ित लोगों की सहायता के लिए दवाओं के उपयोग करने की जांच कर रहे हैं, फिर चाहे दवा का अकेले इस्तेमाल हो या फिर स्पीच थेरेपी के साथ मिलाकर. इसके अलावा ट्रीटमेंट प्लान में ये चीजें भी शामिल होती हैं:

    • अपने संचार कौशल को बेहतर बनाने के लिए व्यायाम करना

    • अपने संचार कौशल का अभ्यास करने के लिए समूह में काम करना

    • वास्तविक जीवन की स्थिति में संचार कौशल का परीक्षण करना

    • संचार के अन्य माध्यम जैसे- इशारे, चित्र और कंप्यूटर की मदद से होने वाले संचार जैसी चीजों को इस्तेमाल करना सीखना

    • शब्दों और ध्वनियों को दोबारा सीखने के लिए कंप्यूटर का उपयोग करना

    • घर पर संवाद करने में मदद करने के लिए परिवार के सदस्यों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल वाचाघात क्या है, प्रकार, लक्षण, इलाज के बारे में पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.