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खुशखबरी! मोटापे से छुटकारा दिलाने आने वाला है ऐप


Updated: October 30, 2019, 2:02 PM IST
खुशखबरी! मोटापे से छुटकारा दिलाने आने वाला है ऐप
fat man

अब आपके इस काम में मदद करने को लिए नया ऐप (Mobile Application) आ सकता है. जो आपके दिमाग को नई तकनीक से अनुशासन बनाए रखने की ट्रेनिंग देगा. इस तकनीक का नाम है 'गो/नो-गो' ट्रेनिंग (GO/No-Go Training).

  • Last Updated: October 30, 2019, 2:02 PM IST
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लंटन. मोटापे (Obesity) से झुटकारा पाने के लिए लोग क्या जतन नहीं करते. डाइटिंग(Dieting), कसरत (Workout) से लेकर हर वो चीज जो उन्हें वजन कम करने में मदद करे. लेकिन वजन घटाने में सबसे बड़ी अड़चन होती है अनुशासन. दिमाग को इतना स्थिर कर देना कि वो कहीं और न भटके. अब आपके इस काम में मदद करने को लिए नया ऐप (Mobile Application) आ सकता है. जो आपके दिमाग को नई तकनीक से अनुशासन बनाए रखने की ट्रेनिंग देगा. इस तकनीक का नाम है 'गो/नो-गो' ट्रेनिंग (GO/No-Go Training).

जिस तरह खिलाड़ियों के फिटनेस का पैमाना यो-यो टेस्ट (Yoyo Test) बनाया गया है उसी तरह दिमाग के लिए इस नई तकनीक के जरिए 'गो/नो-गो' ट्रेनिंग की बात विशेषज्ञ कर रहे हैं. ब्रटेन में हर तीसरा व्यक्ति या तो मोटापे से पीड़ित है या फिर उसका वजह जरूरत से कहीं ज्यादा है. ऐसे में  वैज्ञानिको ने ऐप के जरिए 'गो/नो-गो' ट्रेनिंग की वकालत कर रहे हैं.

कार्डिफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का दावा है कि क्रिस्प्स, चॉकलेट और मिठाइयों खाने की तलब को 'गो/नो-गो' तकनीक से कम किया जा सकता है. इसमें यह किसी व्यक्ति को खाने का चित्र दिखाकर ऐप का बटन पुश करने के लिए कहता है. कुछ समय बाद यह मस्तिष्क को अच्छे खाने की बटन दबाने की आदत हो जाती है और इससे उसकी इच्छाशक्ति में बदलाव होता है.

हालांकि इसके काम करने के तरीके की बारीकियां अभी तक साफ नहीं है लेकिन शोध में इस तकनीक को वजन घटाने में मददगार पाया गया. स्मार्टफोन ऐप के जरिए वैज्ञानिक अपने लक्ष्य को बारीकी से शुरुआती अध्ययन करने में सफल रहे.

 

Go No Go
कोई इच्छा रखना और उसे व्यवहार में लागू करने में जो अंतर होता है
कार्डिफ़ विशेषज्ञ इसे 'इंटेशन बिहेवियर गैप' कहते हैं.

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अब वैज्ञानिक ब्रिटेन में बड़े पैमाने पर परीक्षण शुरू करने जा रहे हैं. इसके जरिए वो प्रतिभागियों को गो/नो-गो तकनीक का उपयोग करते हुए अपने वजन को ट्रैक करने के लिए कहेंगे. ब्रिटेन सरकार पर लोगों का वजन कम करने में मदद करने का दबाव है.

कैसे काम करती है गो/नो-गो तकनीक

स्वस्थ भोजन की जानकारी होने के बावजूद लोग इसे लेने में दृण नहीं रहे पाते. कोई इच्छा रखना और उसे व्यवहार में लागू करने में जो अंतर होता है. कार्डिफ़ विशेषज्ञ इसे 'इंटेशन बिहेवियर गैप' कहते हैं. यह उन लोगों के हालात को दर्शाता है जिनके पास वजन कम करने की इच्छाएं हैं, फिर भी वे अपने साथ घोखा करने से बाज नहीं आते.

डॉ. लिंडसे वॉकर और सहकर्मियों का कहना है कि मस्तिष्क प्रशिक्षण लोगों की निर्णय लेने में सुधार करने के लिए पहेल कदम है. इसे 'बूस्टिंग इंटरवेन्शनस्' कहते हैं जो लोगों के निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करता है ताकि वे अपने स्वयं के लक्ष्यों के अनुरूप बनें.

एक उदाहरण 'गो/नो-गो ट्रेनिंग' या जीएनजीटी है, जो नुकसानदेह खाद्य पदार्थों के मामले में लोगों का व्यवहार बदलने में सफल साबित हुआ है. खासकर ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें वसा, चीनी और नमक अधिक हो.

Go No Go
प्रशिक्षण में, एक क्यू के साथ एक खाद्य पदार्थ की एक तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई जाती है.


प्रशिक्षण में, एक क्यू के साथ एक खाद्य पदार्थ की एक तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई जाती है. यदि भोजन स्वस्थ है, तो क्यू 'गो' है, और प्रतिभागी को एक बटन दबाना होगा. यदि भोजन स्वस्थ नहीं है, तो क्यू 'नो-गो' है, और प्रतिभागी को बटन दबाने से बचना चाहिए.

रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस नामक पत्रिका में लिखते हुए, टीम ने कहा: 'बहुत से लोग अभी भी परिवर्तन करने के लिए जागरूकता, इरादा और क्षमता होने के बावजूद स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार को बदलने के लिए संघर्ष करते हैं.

शोधकर्ताओं का कहना है कि 'गो/नो-गो ट्रेनिंग' उन लोगों के लिए बेहद सस्ता और टिकाऊ तरीका है जो अपना वजन घटाना चाहते हैं. वे यह भी कहते हैं कि वजन कम करने वाले लोग मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप के लिए तैयार हैं क्योंकि वे अपने स्वयं के बार-बार 'लैप्स' होने से तंग आ चुके हैं.

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First published: October 30, 2019, 2:02 PM IST
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