PCOS की समस्या से हैं परेशान, जानें क्या खाएं और क्या नहीं

PCOS की समस्या से हैं परेशान, जानें क्या खाएं और क्या नहीं
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए.

पीसीओएस (PCOS) की समस्या हार्मोन्स (Hormones) के असंतुलन के कारण होती है इसलिए अपनी डाइट (Diet) में सुधार करना इस बीमारी के इलाज का सबसे अहम हिस्सा है.

  • Last Updated: September 15, 2020, 11:23 AM IST
  • Share this:


पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस (PCOS) इंडोक्राइन से जुड़ी एक बीमारी है जो प्रजनन की आयु वाली यानी 15 से 45 साल के बीच की महिलाओं को होने का खतरा होता है. जैसा की बीमारी के नाम से ही पता चलता है इसमें महिला के एक या दोनों अंडाशय में छोटे-छोटे फॉलिकल्स या सिस्ट बन जाते हैं और इन सिस्ट के बनने का कारण है महिला के शरीर में 2 हार्मोन्स का अत्यधिक उत्पादन- पहला- पुरुष हार्मोन एन्ड्रोजन और दूसरा- इंसुलिन. इतना ही नहीं फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन का उत्पादन भी घट जाता है जिस वजह से महिला का मासिक धर्म चक्र भी प्रभावित होता है.

चूंकि पीसीओएस की समस्या हार्मोन्स के असंतुलन के कारण होती है इसलिए अपनी डाइट में सुधार करना इस बीमारी के इलाज का सबसे अहम हिस्सा है. खाने पीने से जुड़ी ऐसी कई चीजें हैं जो पीसीओएस के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकती हैं जबकी कुछ आहार ऐसे भी हैं जिनका लगातार सेवन करने से आपकी बीमारी और ज्यादा बिगड़ सकती है. ऐसे में अगर किसी महिला को पीसीओएस की समस्या हो तो उन्हें क्या खाना चाहिए और किन चीजों से परहेज करना चाहिए इस बारे में यहां जानें.



1. पीसीओएस के लिए बेस्ट फूड
चूंकि पीसीओएस इंसुलिन और एंड्रोजन के बढ़े हुए लेवल के कारण होता है इसलिए डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करना चाहिए जो इन हार्मोन्स के उत्पादन को कम कर सकें. साथ ही ऐसी चीजें भी खानी चाहिए जिससे प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजेन हार्मोन का उत्पादन बढ़ाया जा सके.

- फाइबर से भरपूर चीजें खाए
फाइबर से भरपूर चीजें इंसुलिन को कंट्रोल करने में मदद करती हैं  इसलिए ऐसे कार्बोहाइड्रेट वाले भोजन का सेवन करें जिसमें फाइबर की मात्रा अधिक हो. फल और सब्जियां, साबुत अनाज और दालें आदि. इसके अलावा आपको अपनी डाइट में ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी, सेब, पपीता, संतरा और नींबू जैसे खट्टे फल, तरबूज, अनार जैसे फल, टमाटर, ब्रोकली, फूलगोभी, पालक, कद्दू, शिमला मिर्च और बीन्स आदि सब्जियां, बार्ली, कीन्वा, ओट्स, ब्राउन राइस, दलिया, बाजरा, रागी, ज्वार आदि अनाज और राजमा, छोला, सोया बीन्स, लोबिया, उड़द दाल, मसूर दाल, अरहर दाल आदि का सेवन करें.

- बिना चर्बी वाला प्रोटीन
हाई प्रोटीन से युक्त डाइट एन्ड्रोजन और टेस्टोस्टेरॉन के लेवल को शरीर में कम करने में मदद करते हैं लेकिन रेड मीट और ऐनिमल प्रोटीन में फैट कॉन्टेंट भी अधिक होता है जो इंसुलिन लेवल को बढ़ा सकता है. इसलिए पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को अपने प्रोटीन इनटेक के लिए बिना चर्बी वाले प्रोटीन पर निर्भर रहना चाहिए. लिहाजा पीसीओएस की डाइट में चिकन, अंडा, साल्मन मछली, सार्डिन मछली, ट्यूना मछली, टोफू, टर्की आदि को शामिल करना चाहिए.

- एंटी-इंफ्लेमेटरी खाद्य पदार्थ
इन्फ्लेमेशन यानी आंतरिक सूजन और जलन की समस्या भी पीसीओएस का हिस्सा है इसलिए एंटी-इन्फ्लेमेटरी फूड्स को डाइट में शामिल करना बेहद जरूरी है. ग्रीन टी और ब्लैक टी में भी पावरफुल एंटी-इन्फ्लेमेटरी तत्व होते हैं. इसके अलावा अदरक, हल्दी, काली मिर्च, तेजपत्ता, सौंफ, अजवाइन, जीरा, धनिया, चक्रफूल, लौंग, दालचीनी, रोजमेरी, थाइम आदि मसालों को भी डाइट में शामिल करना चाहिए.

- हेल्दी फैट
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए. जैसे- मैकेरेल मछली, ट्यूना, साल्मन, स्टर्गन, सार्डिन मछली, अखरोट, चिया सीड्स, अलसी के बीज, ऐवोकाडो, जैतून का तेल आदि को शामिल करें.

2. पीसीओएस है तो क्या न खाएं
पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को मोटापा, वजन बढ़ने, डायबिटीज आदि का भी खतरा अधिक होता है. इसलिए इंसुलिन और एंड्रोजेन के उत्पादन को कम करने के साथ ही ऐसे फूड्स खाने चाहिए जो इनके लेवल को शरीर में न बढ़ाएं. इसके लिए कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ हैं जिनका सेवन हमें नहीं करना चाहिए.

- चीनी के सेवन से बचें
मिठाइयां और डेजर्ट्स हों या प्रोसेस्ड फूड जैसे- चिप्स, मफिन्स, ब्रेड आदि इन सबमें चीनी की मात्रा अधिक होती है और चीनी का सेवन अधिक करने से ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है और इंसुलिन के लेवल पर नकारात्मक असर पड़ता है. चीनी वाले ड्रिंक्स और फ्रूट जूस भी पीने से परहेज करना चाहिए क्योंकि इससे भी वजन बढ़ने का खतरा हो सकता है.
- कार्बोहाइड्रेट्स
वैसे कार्बोहाइड्रेट्स जिसमें फाइबर नहीं होता वह भी इंसुलिन के लेवल को बढ़ाते हैं और इनका ज्यादा सेवन करने से मोटापा और वजन बढ़ने का भी खतरा हो सकता है. सफेद चावल और आलू जैसी चीजों का ग्लाइसिमिक इंडेक्स ज्यादा होता है इसलिए ऐसी डाइट का सेवन करें जिसका ग्लाइसिमिक इंडेक्स कम हो.
- तला-भुना भोजन
तले-भुने खाद्य पदार्थ में फैट और कैलोरीज अधिक होता है जिससे वजन बढ़ सकता है. इन चीजों को खाने से पीसीओएस के लक्षण और बिगड़ सकते हैं और इन्हें मैनेज करना मुश्किल हो सकता है.
- शराब और धूम्रपान
अधिक मात्रा में शराब का सेवन करने से भी ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है और वजन बढ़ने, इनफ्लेमेशन और हृद रोग का खतरा रहता है. धूम्रपान करने से न सिर्फ एंड्रोजेन और इंसुलिन का लेवल बढ़ता है बल्कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम होने का खतरा भी बढ़ जाता है. इसलिए जहां तक संभव हो शराब और सिगरेट का सेवन करने से बचें.

3. क्या पीसीओएस में अंडा खाना चाहिए?
जैसा कि हमने पहले ही बताया कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को बिना चर्बी वाले प्रोटीन का सेवन करना चाहिए और अंडा बिना चर्बी वाले लीन प्रोटीन का सस्ता और बेहतरीन सोर्स है. अगर आपको पीसीओएस के साथ ही हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या न हो तो आप अंडे का सफेद वाला और पीला वाला दोनों हिस्सा खा सकती हैं. अंडे के पीले वाला हिस्सा ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होता है इसलिए अंडा, कम्प्लीट प्रोटीन है जिसे पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए.

4. क्या दूध और डेयरी उत्पाद पीसीओएस में खाना सेफ है?
जैसा कि हमने पहले ही बताया कि पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं को लो-ग्लाइसिमिक इंडेक्स और लो-कार्ब्स वाली चीजें खानी चाहिए जबकि दूध और डेयरी उत्पाद का जीआई या ग्लाइसिमिक इंडेक्स अधिक होता है जिससे इंसुलिन और एंड्रोजन का लेवल शरीर में बढ़ सकता है और इन्फ्लेमेशन में भी बढ़ोतरी हो सकती है. इसलिए दूध और डेयरी उत्पाद के सेवन से बचना चाहिए.

5. क्या पीसीओएस में कॉफी पीना चाहिए?
कैफीन का सेवन शरीर में स्ट्रेस हार्मोन और इंसुलिन के लेवल के उत्पादन को बढ़ा सकता है. साथ ही कॉफी में ज्यादातर टाइम हम दूध और चीनी भी डालते हैं और ये दोनों ही चीजें पीसीओएस के लक्षणों को और बिगाड़ सकती हैं इसलिए अगर आफको पीसीओएस है तो आपको कॉफी का सेवन कम से कम करना चाहिए या बिलकुल परहेज करना चाहिए.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पीसीओएस में क्या खाएं क्या नहीं पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज