World Anaesthesia Day 2020: एनेस्थीसिया क्या है, इसके प्रकार, देने का तरीका और साइड इफेक्ट्स के बारे में जानें

एनेस्थीसिया क्या है और इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं, जानें
एनेस्थीसिया क्या है और इसके साइड इफेक्ट्स क्या हैं, जानें

World Anaesthesia Day 2020: मरीज की सर्जरी या फिर कोई ऐसी मेडिकल प्रक्रिया जिसमें टांके लगाने की जरूरत हो उसमें मरीज को दर्द या तकलीफ कम महसूस हो इसके लिए कुछ दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है और इसे ही एनेस्थीसिया कहते हैं.

  • Last Updated: October 16, 2020, 1:28 PM IST
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World Anaesthesia Day 2020 : किसी भी तरह की मेडिकल प्रक्रिया के दौरान, खासकर सर्जरी में, मरीज को किसी तरह का दर्द या असुविधा महसूस न हो और चिकित्सीय प्रक्रिया आसानी से पूरी हो जाए इसके लिए मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है. तो आखिर एनेस्थीसिया है क्या? मरीज की किसी तरह की जांच या ऑपरेशन के दौरान शरीर के किसी भाग को सुन्न करने के लिए या मरीज को सुलाने के लिए जिसका उपयोग किया जाता है उसे ही एनेस्थीसिया कहते हैं. एनेस्थीसिया का शाब्दिक अर्थ होता है- बेहोशी या शारीरिक अचेतना.

एनेस्थीसिया क्या है?

मरीज की सर्जरी या फिर कोई ऐसी मेडिकल प्रक्रिया जिसमें टांके लगाने की जरूरत हो उसमें मरीज को दर्द या तकलीफ कम महसूस हो इसके लिए कुछ दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है और इसे ही एनेस्थीसिया कहते हैं. एनेस्थीसिया गैस या वाष्प के रूप में होता है जिसे इंजेक्शन के माध्यम से मरीज को दिया जाता है या फिर सुंघाया जाता है. ऐसा नहीं कि सर्जरी से पहले कोई भी डॉक्टर एनेस्थीसिया देकर सर्जरी को शुरू कर सकता है.



एनेस्थीसियोलॉजी की पूरी पढ़ाई होती है और ट्रेन्ड प्रफेशनल्स होते हैं जिन्हें एनेस्थीसियोलॉजिस्ट कहा जाता है और उनकी निगरानी में ही मरीज को एनेस्थीसिया दिया जाता है. एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, मरीज की मेडिकल कंडिशन और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लेते हैं कि मरीज के लिए कौन सा एनेस्थीसिया उचित रहेगा. मरीज को सर्जरी या मेडिकल प्रक्रिया से पहले एनेस्थीसिया देने से लेकर जब तक मरीज होश में नहीं आ जाता तब तक मरीज, एनेस्थीसियोलॉजिस्ट की निगरानी में रहता है.
दरअसल, एनेस्थीसिया 2 प्रकार का होता है- लोकल एनेस्थीसिया और जनरल एनेस्थीसिया.
1. लोकल या स्थानीय एनेस्थीसिया का उपयोग छोटी सर्जरी या किसी सामान्य मेडिकल प्रक्रिया में किया जाता है जिसमें मरीज के शरीर के सिर्फ किसी एक हिस्से को ही सुन्न किया जाता है और इस दौरान मरीज पूरी तरह से होश में रहता है.
2. जनरल या सामान्य एनेस्थीसिया में मरीज को पूरी तरह से बेहोश कर दिया जाता है और उपचार प्रक्रिया के दौरान उसके साथ क्या हुआ उसे कुछ पता नहीं होता. बड़ी और गंभीर सर्जरी के दौरान जनरल एनेस्थीसिया का उपयोग किया जाता है.

इन दोनों के अलावा रीजनल एनेस्थेटिक, एपिड्यूरल एनेस्ठेटिक, स्पाइल एनेस्ठेटिक और सिडेशन भी एनेस्थीसिया के विभिन्न प्रकार हैं. इसमें अलग-अलग प्रकार के एनेस्थीसिया को कई बार एक साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. ऑपरेशन के बाद मरीज को दर्द से राहत दिलाने के लिए कई बार रीजनल एनेस्थेटिक को जनरल एनेस्ठेटिक के साथ या फिर सिडेशन के साथ मिलाकर मरीज को दिया जा सकता है. मरीज के लिए कौन सा एनेस्ठेटिक सही है इसका फैसला एनेस्थीसियोलॉजिस्ट करते हैं.

कैसे दिया जाता है एनेस्थीसिया?

  • एनेस्थीसियोलॉजिस्ट, मरीज से उनकी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी के साथ ही उन दवाइयों के बारे में भी पूछते हैं जिनका सेवन वो कर रहे हों.

  • इसके बाद एनेस्थीसिया को नसों में सुई के माध्यम से या फिर सांस के साथ गैस के रूप में दिया जाता है.

  • जब मरीज बेहोश हो जाता है तो एनेस्थीसियोलॉजिस्ट मरीज के मुंह में एक ट्यूब डालते हैं जिसे विंड पाइप कहते हैं. इस ट्यूब के माध्यम से शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलता रहता है.

  • एनेस्थीसियोलॉजिस्ट और उनकी टीम हर वक्त मरीज की निगरानी करती है और उनका ब्लड प्रेशर, शरीर का तापमान, सांस की दर आदि पर नजर रखती हैं ताकि पता लगाया जा सके कि सर्जरी के दौरान मरीज को किसी तरह की कोई दिक्कत तो नहीं हो रही है.

  • जब सर्जरी पूरी हो जाती है तो एनेस्थीसिया को रोक दिया जाता है और फिर मरीज धीरे-धीरे होश में आने लगता है. हालांकि होश में आने के बाद भी कुछ समय के लिए सिर घूमना या नशे में रहने जैसा महसूस हो सकता है.


एनेस्थीसिया के साइड इफेक्ट्स
वैसे तो एनेस्थीसिया को पूरी तरह से सुरक्षित माना जाा है लेकिन जैसा कि किसी भी दवा या चिकित्सिय प्रक्रिया के साथ होता है एनेस्थीसिया के भी कुछ साइड इफेक्ट्स हैं जो कुछ समय के लिए भी हो सकते हैं (शॉर्ट टर्म) और लंबे समय तक भी जारी रह सकते हैं (लॉन्ग टर्म).

सर्जरी या ऑपरेशन के तुरंत बाद मरीज में दिखने वाले एनेस्थीसिया के शॉर्ट टर्म साइड इफेक्ट निम्नलिखित हैं:

  • जी मिचलाना या उल्टी आना

  • चक्कर आना या बेहोशी महसूस करना

  • मुंह सूखना (ड्राई माउथ)

  • गले में खराश

  • ठंड लगना, कंपकंपी महसूस होना

  • भ्रम या कन्फ्यूजन महसूस होना

  • मांसपेशियों में दर्द

  • खुजली

  • त्वचा के नीचे चोट जैसे निशान दिखना

  • पेशाब करने में परेशानी


वैसे तो ज्यादातर लोगों में एनेस्थीसिया के कोई भी लॉन्ग टर्म साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिलते हैं. लेकिन कई बार बुजुर्गों में लंबे समय तक रहने वाले कुछ दुष्प्रभाव नजर आ सकते हैं, जैसे:

-ऑपरेशन के बाद अचेतना : एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद कुछ लोग भ्रमित महसूस कर सकते हैं, अस्त-व्यस्त हो सकते हैं, या फिर सर्जरी के बाद उन्हें चीजों को याद रखने में परेशानी हो सकती है. यह भटकाव आ-जाता रह सकता है लेकिन यह आमतौर पर लगभग एक सप्ताह के बाद पूरी तरह से खत्म हो जाता है.

-ऑपरेशन के बाद संज्ञानात्मक शिथिलता (POCD): कुछ लोगों को सर्जरी के बाद स्मृति या याददाश्त से जुड़ी समस्याएं या अन्य प्रकार की संज्ञानात्मक हानि का अनुभव हो सकता है. लेकिन इस बात की आशंका कम होती है कि यह एनेस्थीसिया का परिणाम हो, यह सर्जरी के परिणामस्वरूप भी हो सकता है. अगर मरीज को स्ट्रोक, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, अल्जाइमर्स आदि हों तब भी उन्हें पीओसीडी (पोस्ट-ऑपरेटिव कॉग्निटिव डिस्फंक्शन) की समस्या हो सकती है.
पिछले कुछ सालों में एनेस्थीसिया देना काफी सुरक्षित हो गया है. अडवांस साधन, दवाइयां और बेहतर प्रशिक्षण के कारण बिना किसी गंभीर परेशानी के मरीज को आसानी से एनेस्थीसिया दिया जा सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल एनेस्थीसिया क्या है, इसके बारे में पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)

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