क्या होता है श्वसन संकट सिन्ड्रोम, जानें कैसे करें बचाव

शिशु में श्वसन संकट सिंड्रोम (आरडीएस) होता है, जिसमें फेफड़ों की खराबी के कारण शिशु को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.
शिशु में श्वसन संकट सिंड्रोम (आरडीएस) होता है, जिसमें फेफड़ों की खराबी के कारण शिशु को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम, श्वसन प्रक्रिया (Respiration System) को बुरी तरह से प्रभावित करता है, जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ होती है. यह फेफड़ों (Lungs) को नुकसान भी पहुंचा सकता है और यदि ध्यान नहीं दिया गया तो समस्या को और भी बढ़ा सकता है.

  • Last Updated: October 9, 2020, 6:55 AM IST
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वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों को फेफड़ों (Lungs) से संबंधित अनेक बीमारियां घेर रही हैं. इनमें अस्थमा (Asthma), एलर्जी (Allergy) और ब्रोंकाइटिस शामिल हैं. इन्हीं में से एक ऐसी ही बीमारी है, जिससे रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रभावित होता है. इस बीमारी को श्वसन संकट सिंड्रोम कहते हैं, जिसे क्लीनकल भाषा में रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम कहा जाता है. यह फेफडों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे अन्य समस्याएं हो सकती हैं. आइए जानते हैं इस समस्या के बारे में.

रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम



रेस्पिरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम, श्वसन प्रक्रिया को बुरी तरह से प्रभावित करता है, जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ होती है. यह फेफड़ों को नुकसान भी पहुंचा सकता है और यदि ध्यान नहीं दिया गया तो समस्या को और भी बढ़ा सकता है. यह दो प्रकार से हो सकते हैं, एक तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) और दूसरा शिशु श्वसन संकट सिंड्रोम (आरडीएस).
तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम

तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम (एआरडीएस) फेफड़ों में वायु की थैली होती है, जिसे एल्वियोली कहा जाता है. इसे नुकसान होने के कारण होता है. यह वायु थैली क्षतिग्रस्त होने पर फेफडों में तरल पदार्थ जाने पर ऑक्सीजन शरीर के सभी अंगों तक ठीक तरह से नहीं पहुंच पाती है, जिसके कारण कई शारीरिक समस्याएं होने लगती हैं. इसके कारण हृदय गति भी प्रभावित हो सकती है. इसके कारण व्यक्ति की जान तक जा सकती है. इसलिए मरीज को तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

शिशु का श्वसन संकट सिंड्रोम

शिशु में श्वसन संकट सिंड्रोम (आरडीएस) होता है, जिसमें फेफड़ों की खराबी के कारण शिशु को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. इसका कारण होता है उनके फेफड़ों का सिकुड़ जाना. शिशु श्वसन संकट सिंड्रोम एक प्रकार का फेफड़ों का विकार है, जो नवजात शिशु पर बुरा प्रभाव डालता है. इसके लिए उन्हें वेंटीलेशन या पॉजिटिव एंड एक्सपीरेटरी प्रेशर पीईईपी की आवश्यकता होती है.

श्वसन संकट सिंड्रोम के अन्य कारण

इसके अलावा अन्य संक्रमण के कारण भी फेफड़ों को नुकसान हो सकता है. यदि किसी को निमोनिया या छाती की चोट लगी हो तो उसे भी यह समस्या हो सकती है. इसके अतिरिक्त हार्ट की समस्या हो या ड्रग्स के ओवरडोज के कारण भी यह समस्या होने की आशंका रहती है. जिन्हें श्वसन संकट सिंड्रोम है, उनमें से कुछ मरीजों को यह भी हो सकता है सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने पर हमेशा ही वेंटीलेटर की आवश्यकता हो. इसके अतिरिक्त जो लोग अत्यधिक धूम्रपान की आदत से मजबूर होते हैं, उनका भी रेस्पिरेटरी सिस्टम खराब होने लगता है. इसमें क्षतिग्रस्त फेफडे दोबारा ठीक नहीं हो सकते हैं. कभी-कभी तो यह हालात तक आ जाते हैं कि आरडीएस से ग्रसित मरीजों को फेफडों के खराब होने पर कृत्रिम फेफड़ों का ट्रान्सप्लान्ट करवाना पड़े.

श्वसन संकट सिंड्रोम के लिए दवा

श्वसन संकट सिंड्रोम होने पर आजकल कई दवाएं उपलब्ध हैं, जो फेफड़ों में सुधार करने में सहायक होती हैं. एक्टीक्रेट, एनासिन पेन, डेकॉन्जिन, बी होल्ड, एपिहिस्ट, डार्ट और फ्लूरिड जैसी कई दवाएं इस समस्या के लिए दी जा सकती हैं. लेकिन ध्यान रहे कि इन दवाओं को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवाई लेना हानिकारक हो सकता है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, हांफना क्या होता है, इसके लक्षण, कारण, बचाव, निदान, उपचार और जोखिम पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

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