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जानिए रात में सोने और सुबह जागने का सही टाइम टेबल, इस समय का पालन करने से बीमारियां रहेंगी दूर

सोने और जागने का समय निश्‍चित होना चाहिए
(image-canva)

सोने और जागने का समय निश्‍चित होना चाहिए (image-canva)

सुबह जल्‍दी उठना और रात में जल्‍दी सोने की आदत कई हेल्‍थ प्रॉब्‍लम से छुटकारा दिला सकती है. लेकिन व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

हर व्‍यक्ति की नींद की आवश्‍यकता अलग-अलग होती है.
पर्याप्‍त नींद के लिए 6-7 घंटे सोना जरूरी है.
अधिक सोने से भी सेहत को नुकसान पहुंच सकता है.

Best Time To Sleep And Wake Up-  बचपन से ही हम सुनते आ रहे हैं अर्ली टू बेड एंड अर्ली टू राइजयानी रात में जल्‍दी सोना और सुबह जल्‍दी जागना हेल्‍थ और वेल्‍थ दोनों के लिए फायदेमंद होता है. लेकिन वर्तमान में इस प्रोवर्ब यानी कहावत को कितने लोग फॉलो कर पा रहे हैं. व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल के चलते अब लोग अपनी सहूलियत के अनुसार सोते और जागते हैं. लेकिन अब भी एक बड़ा सवाल ये उठता है कि हेल्‍दी रहने के लिए सोने और जागने का बेस्‍ट टाइम क्‍या होना चाहिए. जिसे वर्तमान में भी फॉलो किया जा सके. चलिए जानते हैं जल्‍दी सोने और जल्‍दी उठने के फायदे और समय के बारे में.

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सोने और उठने का सही समय
हेल्‍दी रहने के लिए लोगों को रात में जल्‍दी बिस्‍तर पर जाना चाहिए और सुबह जल्‍दी उठना चाहिए. हेल्‍थलाइन के अनुसार नींद और सूर्य का पैटर्न हमारी बायोलॉजिकल टेंडेंसी के साथ मेल खाता है. लोग ये महसूस कर सकते हैं कि सूर्यास्‍त के बाद स्‍वाभाविक रूप से अधिक नींद आती है. सोने का सही समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि आप सुबह कब उठते हैं. इसके अलावा शरीर को नींद की कितनी आवश्‍यकता है. रात में सोने का सबसे अच्‍छा समय उम्र के अनुसार तय किया जा सकता है. हर व्‍यक्ति को 7 घंटे की नींद लेना जरूरी है. व्‍यस्‍त लाइफस्‍टाइल होने के बावजूद सुबह 6 बजे उठना और रात में 11 बजे तक सोना हेल्‍थ की दृष्टि से बेहतर माना जाता है.

कितनी नींद की आवश्‍यकता है
हर व्‍यक्ति को उसकी फिजिकल एक्टिविटी और उम्र के अनुसार नींद की आवश्‍यकता होती है. जैसे 3-12 महीने के बच्‍चों को 12 से 16 घंटे की नींद जरूरी है. वहीं 1 से 5 साल तक के बच्‍चे को 10 से 13 घंटे, 9-18 वर्ष को 8 से 10 घंटे की और 18-60 वर्ष के व्‍यक्ति को 7 से 8 घंटे की पर्याप्‍त नींद लेना आवश्‍यक है.

कम नींद के साइडइफेक्‍ट
यदि व्‍यक्ति दिन में भी नींद का अनुभव करता है तो ये संकेत है कि वे रात में पर्याप्‍त नींद नहीं ले रहा है. नींद पूरी न होने के कारण चिड़चिड़ापन, भूलने की बीमारी और डिप्रेशन की समस्‍या हो सकती है. इसके अलावा अधिक बीमार रहना, हाई बीपी, डायबिटीज, हार्ट डिजीज, मोटापा और डिप्रेशन होने का खतरा बढ़ जाता है.

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अधिक नींद के साइडइफेक्‍ट
अधिक सोना भी कम सोने के समान ही नुकसानदायक हो सकता है. 7-8 घंटे की नींद लेने के बाद भी यदि नींद का अहसास होता है तो ये डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, हार्ट डिजीज, चिंता, स्‍लीप एप्निया, डायबिटीज, मोटापा, थायराइड और दमा का शिकार हो सकते हैं.
शरीर की थकान मिटाने और हेल्‍दी रहने के लिए नींद बेहद जरूरी होती है. लेकिन रात में सोने और सुबह उठने का क्‍या सही समय होना चाहिए ये जानना भी बेहद जरूरी है.

Tags: Better sleep, Health, Lifestyle

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