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मौसम का बदलता मिजाज अस्थमा रोगियों की बढ़ा सकता है परेशानी, डॉक्टर के अनुसार बरतें ये सावधानियां

अस्थमा के मरीज रोजाना प्राणायाम करने और स्टीम लेने की आदत डालें

अस्थमा के मरीज रोजाना प्राणायाम करने और स्टीम लेने की आदत डालें

इन दिनों पल-पल बदल रहा मौसम का मिजाज केवल सर्दी-ज़ुकाम और वायरल फीवर जैसी दिक्कतों की ही वजह नहीं बन रहा है. अस्थमा के म ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

स्टीम लेने के लिए भगौने या वेपोराइजर का इस्तेमाल सही तरीका नहीं है.
बदल रहे इस मौसम में कूलर में पानी का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करें.

Health tips for asthma patients: मौसम का मिजाज हर पल बदल रहा है. दिन में किसी समय गर्मी का अहसास होने के चलते जहां लोग एसी और कूलर में ही समय बिता रहे हैं. तो वहीं रात को कुछ लोगों के लिए पंखे में रहना भी मुश्किल हो रहा है. दरअसल मौसम अब धीरे-धीरे सर्दियों की ओर रुख करने लगा है. इस बदलते मौसम में जहां एक ओर सर्दी-ज़ुकाम, वायरल फीवर और डेंगू, मलेरिया जैसी दिक्कतें आम हो रही हैं. तो वहीं अस्थमा के मरीजों को भी मौसम का ये मिजाज परेशान करने लगा है. ऐसे में अस्थमा पेशेंट्स (Asthma patients) के लिए ये जरूरी हो जाता है कि मौसम के इस बदलते मूड से सावधान रहें.

दरअसल बारिश का मौसम विदाई की ओर है और सर्दियों के मौसम की आहट सुनाई देने लगी है. ऐसे में जहां वातावरण में पराग कणों और धूल-मिट्टी की मौजूदगी अस्थमा के मरीजों को परेशान कर सकती है. तो वहीं आने वाले दिवाली के त्योहार के चलते घरों की साफ-सफाई, डेंटिंग-पेंटिंग, धुआं और प्रदूषण जैसी चीजें भी उनकी परेशानी को बढ़ा सकती हैं. ऐसे में स्वस्थ रहने के लिए अस्थमा मरीजों को किस तरह की सावधानी बरतने की जरूरत है, ये बता रहे हैं डॉक्टर सूर्यकान्त, विभागाध्यक्ष रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ. नेशनल वायस चेयरमैन आई एम ए- ए एम एस. तो आइये जानते हैं, डॉक्टर सूर्यकांत के अनुसार अस्थमा के मरीजों को बदल रहे इस मौसम में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.

ये वजह बन सकती है परेशानी का सबब
बदलते मौसम के चलते अस्थमा के मरीजों के लिए जो चीजें परेशानी का सबब बन सकती हैं. उनमें ह्यूमिडिटी, मौसम के टेम्प्रेचर में बदलाव, हवा में मौजूद पराग के कण, धूल-मिट्टी, धुआं, पॉल्यूशन जैसी चीजें शामिल हैं. वहीं त्योहारों के चलते घरों में होने वाली साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, जाले, हवन, धूपबत्ती, आतिशबाज़ी जैसी चीजें भी अस्थमा के मरीजों की दिक्कत बढ़ा सकती हैं. डॉक्टर सूर्यकांत के मुताबिक केवल मौसम बदलने और दिवाली के समय ही नहीं बल्कि नार्मल दिनों में भी अस्थमा के मरीजों को जिन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए, उनमें एक्टिव एंड पैसिव स्मोकिंग, डियोडरेंट, परफ्यूम, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, मॉस्किटो रिप्लेंट जैसी चीजें शामिल हैं. इसके साथ ही ज्यादा सोफे, पर्दे, सॉफ्ट टॉयज़, कालीन और पालतू जानवरों से भी उनको दूरी बनाकर रखनी चाहिए.

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ये बरतें सावधानियां
डॉक्टर के अनुसार बदल रहे इस मौसम में कूलर में पानी का इस्तेमाल बिल्कुल न करें, एसी का टेम्प्रेचर नार्मल रखें, ज्यादा ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम का सेवन न करें, जिस क्षेत्र में ज्यादा प्रदूषण हो उस जगह जाने से बचें, धुएं वाली जगह से दूर रहें, मास्क का इस्तेमाल हमेशा करें, स्मोकिंग न करें और न ही उन लोगों के आस-पास रहें जो स्मोकिंग करते हों, केवल सिगरेट-बीड़ी ही नहीं बल्कि हुक्का, सिगार, चिलम जैसी चीजों से भी दूरी बनाकर रखें, परफ्यूम-डियोडरेंट और मच्छर मारक चीजों का इस्तेमाल भी न करें और फूलों वाले गार्डन से दूर रहें.

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इन चीजों से मिलेगी राहत
अस्थमा के मरीजों को सांस की परेशानी से राहत मिल सके इसके लिए उनको रोज़ाना सुबह कुछ देर प्राणायाम जरूर करना चाहिए. इसके लिए भस्त्रिका प्राणायाम और अनुलोम-विलोम प्राणायाम सबसे बेहतर हैं. ये प्राणायाम आपके सांस की नली में जमा धूल-मिट्टी के कणों को साफ करने में मदद करेंगे. इसके साथ ही रोजाना स्टीम लेने के आदत भी जरूर डालें. प्राणायाम और स्टीम सांस के रोगी को राहत देने में काफी हद तक मददगार होंगे. इसके साथ ही अपने डॉक्टर की सलाह से अपने साथ इन्हेलर भी जरूर रखें.

स्टीम लेने का सही तरीका
स्टीम लेने के लिए भगौने या वेपोराइजर का इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है. ऐसा करने से ज्यादातर स्टीम फेस पर जाती है जबकि स्टीम की जरूरत सांस की नली को होती है. सही तरीके से स्टीम लेने के लिए करवाचौथ वाले करवे का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए आप बाजार से नल में लगाए जाने वाली रबर की नलकी ले आएं और करवे को गर्म पानी से आधा भर लें. फिर करवे की नलकी में रबर की नलकी लगाकर मुंह से स्टीम लें. इससे स्टीम अच्छी तरह से पूरी मात्रा में आपकी सांस की नली में जाएगी. अगर आप स्टीम के लिए वेपोराइजर का इस्तेमाल करना ही चाहते हैं. तो इस तरह का वेपोराइजर इस्तेमाल करें, जिसमें नोज़ल भी साथ में हो. जिससे स्टीम फेस पर न लगकर नाक के ज़रिये सीधे सांस की नली तक पहुंचेगी.

Tags: Health News, Health tips, Lifestyle

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