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लॉकडाउन के बाद आम हुई 'कान में सीटी बजने' और 'सिर दर्द' की समस्‍या, जानें असल वजह

लॉकडाउन के बाद आम हुई 'कान में सीटी बजने' और 'सिर दर्द' की समस्‍या, जानें असल वजह

Health Update: लॉकडाउन के बाद, बहुत से मरीज कान में सीटी बजने, सिर दर्द और चक्‍कर आने की शिकायत लेकर हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं.

केस : 1
कुछ महीनों पहले, ग्रेटर नोएडा की हिमालय प्राइड सोसाइटी में रहने वाले महेंद्र शुक्‍ला को अचानक ऐसा लगता है कि उनके कान में सीटी बज रही है. कुछ दिनों के बाद, उन्‍हें सिर में भारी पन और दर्द की शिकायत होने लगी. उन्‍होंने सिर दर्द की दवा ली, लेकिन उससे राहत नहीं मिला, बल्कि नींद न आने, ब्‍लड प्रेशर बढ़ने और घबराहट की शिकायत भी शुरू हो गई. महेंद्र शुक्‍ल ने फिजीशियन से लेकर न्‍यूरोलॉजिस्‍ट तक की सलाह पर पूरा इलाज किया, लेकिन आराम मिलने की वजह समस्‍या बढ़ती गई.

केस : 2
ग्रेटर नोएडा की हिमालय प्राइस सोसाइटी में ही रहने वाले अवधेश तिवारी को काम करते-करते अचानक चक्‍कर आना शुरू हो जाते हैं. आराम करने पर चक्‍कर में आराम तो मिल जाता है, लेकिन फौरीतौर पर. कुछ समय के बाद, उठने-बैठने और चलते वक्‍त चक्‍कर आने की समस्‍या होने लगती है. यह समस्‍या लगातार बढ़ती जाती है. अवधेश तिवारी को लगता है कि उन्‍हें ये चक्‍कर सरवाइकल या ब्रेन से जुड़ी किसी बीमारी की वजह से आ रहे हैं. लिहाजा, वे भी न्‍यूरोलॉजिस्‍ट से इलाज कराने पहुंच जाते हैं.

उपरोक्‍त दोनों ही केसों में, महेंद्र शुक्‍ल और अवधेश तिवारी को ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट को दिखाने की सलाह दी जाती है. ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट को दिखाने पर यह पता चलता है कि हेडफोन के लगातार इस्‍तेमाल की वजह से वे न केवल सेंसरी न्‍यूरल हियरिंग लॉस (Sensorineural hearing loss) और नर्व रिलेटेड हेयर लॉस (and nerve related hair loss) का शिकार हो गए हैं, बल्कि इयर बैलेसिंग सिस्‍टम पर भी इसका गहरा असर पड़ा है, जिसकी वजह से उन्‍हें लगातार इन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

महेंद्र शुक्‍ल या अवधेश तिवारी अकेले ऐसे शख्‍स नहीं हैं, बल्कि इस तरह की समस्‍या को लेकर बहुतायत की संख्‍या में मरीज लगातार हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं. ZORG Health के संस्‍थापक और इंद्रप्रस्‍थ अपोलो हॉस्पिटल के ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट डॉ. सुरेश सिंह नरूका बताते हैं कि खासतौर पर लॉकडाउन के बाद से, इस तरह के मरीजों की संख्‍या में तेजी से इजाफा हुआ है. दरअसल, लॉकडाउन के बाद ज्‍यादातर वक्‍त लोगों के कान में किसी न किसी वजह से हेडफोन लगाए रहते हैं, जिसके साइड इफेक्‍ट इस तरह की समयास्‍ओं के साथ सामने आ रहे हैं.

युवा हो रहे हियरिंग लॉस का शिकार
ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट डॉ. सुरेश सिंह नरूका बताते हैं कि हेडफोन में बहुत तेज आवाज के इस्‍तेमाल की वजह से युवा वर्ग में सेंसरी न्‍यूरल हियरिंग लॉस और नर्व रिलेटेड हेयर लॉस के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. पहले इस तरह की शिकायत बुजुर्गों को होती थी, लेकिन हेडफोन और ब्‍लूटूथके बढ़ते इस्‍तेमाल की वजह से अब युवा पीढ़ी भी इस समस्‍या से जूझ रही है. सेंसरी न्‍यूरल हियरिंग लॉस की गिरफ्त में आए मरीजों को सबसे पहले सिर में दर्द, सिर में भारीपन और टिनिटस (कान में आवाज आना) की समस्‍या हो रही है.

हेडफोन किस तरह बिगाड़ रहे हैं हमारी सेहत
ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट डॉ. सुरेश सिंह नरूका के अनुसार, हमारे कान दो तरह से काम करते हैं, उनका पहला काम आवाज को सुनना औैर दूसरा काम आंखें और दिमाग के साथ बैलेंस बनाने का है. जब किसी भी वजह से दोनों में से कोई भी एक सिस्‍टम प्रभावित होगा, तो दूसरा अपने आप प्रभावित हो जाएगा. इसी वजह से, जब भी किसी को सुनने में दिक्‍कत होती है, तो बैसेंस संबंधी दिक्‍कतें भी शुरू हो जाती हैं. इन दिक्‍कतों को चलते मरीजों में जो प्रारंभिक लक्षण दिखते हैं, उनमें बहरापन, कान में सीटी की आवाज आना और चक्‍कर आने जैसी समस्‍याएं शामिल हैं.

कितना बीमार कर सकते हैं आपके हेडफोन
ईएनटी स्‍पेशलिस्‍ट डॉ. सुरेश सिंह नरूका के अनुसार, बहरापन, कान में सीटी की आवाज आना और चक्‍कर आना हेडफोन के दुष्‍प्रभाव के शुरूआती लक्षण हैं. इतने के बाद भी आप नहीं चेते, तो समस्‍याएं गंभीर रूप लेना शुरू कर देंगी. शुरूआती लक्षणों से कुछ दिनों को बाद आपको सिर में दर्द – नींद नहीं आना की समस्‍या हो जाएगी और यह समस्‍या आपको साइको सोशल इश्‍यूज की तरफ ले जाती है. जिसका नतीजा डिप्रेशन और घबराहट (इंजाइटी) के रूप में सामने आते हैं. आप इतने में भी नहीं माने तो साइको सोशल डिटैचमेंट शुरू होना शुरू हो जाएगा.

हेडफोन का कितना इस्‍तेमाल है सुरक्षित
यहां यह सवाल उठता है कि कितने घंटे का हेडफोन इस्‍तेमाल आपको बहरा बना सकता है. इस सवाल के जवाब में डॉ. सुरेश सिंह नरूका का कहना है कि हेडफोन के इस्‍तेमाल की अवधि से ज्‍यादा उसकी आवाज की तीव्रता मायने रखती है. यदि आप 10 से 15 डेसिबल की साउंड पर हेडफोन से सॉफ्ट म्‍यूजिक सुनते हैं, तो आपके कान के पर्दों पर बुरा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन, यदि हम 80-90 डेसिबल की ऊंची आवाज में हेडफोन सुनते हैं तो वह हमें 5 मिनट में भी बहरा बना सकती है. चूंकि, लोग लाउड साउंड में म्‍यूजिक सुनना पसंद करते हैं, लिहाजा उन्‍हें न केवल तमाम दिक्‍कतों का न केवल सामना करना पड़ रहा है, बल्कि वे हमेशा के लिए बहरेपन का शिकार भी हो रहे हैं.

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Tags: COVID 19, Health, Health updates, Sehat ki baat

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