गेहूं की रोटी क्यों है फायदेमंद, पूरा पोषण चाहिए तो ऐसे खाएं

गेहूं की रोटी (Wheat Bread or Roti) बनने के बाद इसे 12 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. इस समय यह अधिक पौष्टिक (Nutritious) होती है, लेकिन कई लोग बासी रोटी के सेवन को लेकर काफी भ्रमित रहते हैं.

गेहूं की रोटी (Wheat Bread or Roti) बनने के बाद इसे 12 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. इस समय यह अधिक पौष्टिक (Nutritious) होती है, लेकिन कई लोग बासी रोटी के सेवन को लेकर काफी भ्रमित रहते हैं.

गेहूं की रोटी (Wheat Bread or Roti) बनने के बाद इसे 12 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. इस समय यह अधिक पौष्टिक (Nutritious) होती है, लेकिन कई लोग बासी रोटी के सेवन को लेकर काफी भ्रमित रहते हैं.

  • Last Updated: December 14, 2020, 2:01 PM IST
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गेहूं (Wheat) काफी पौष्टिक होता है, इसलिए गेहूं की रोटी (Wheat Bread or Roti) खाना सेहतमंद होता है. myUpchar के अनुसार, इसमें इस बात का ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि गेहूं की रोटी खाने का तरीका कैसा होना चाहिए. गेहूं की रोटी बनने के बाद इसे 12 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. इस समय यह अधिक पौष्टिक होती है, लेकिन कई लोग बासी रोटी के सेवन को लेकर काफी भ्रमित रहते हैं. आइए जानते हैं गेंहू की बासी रोटी खाना सेहत के लिए फायदेमंद है या नहीं.

गांव में बासी रोटी खाने का रिवाज

गांव में बहुत पहले से बासी रोटी खाने का रिवाज है. दरअसल, बासी रोटी उस भोजन को कहा जाता था, जिसे किसान खेत पर काम करने जाने से पहले सुबह नाश्ते में खाकर जाते थे. लेकिन यह बासी रोटी किसी सब्जी के साथ नहीं बल्कि गर्म दूध के साथ खाई जाती थी, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने के बजाए फायदा पहुंचाती है.
गर्म दूध के साथ ठंडी रोटी

गांव में रातभर दूध गर्म करने के लिए रख दिया जाता था, जिसे दूध-ओटाना कहते हैं और जिस जगह पर इस दूध को रातभर गर्म किया जाता था, उस स्थान को बरोसी कहते हैं. बरोसी चिकनी मिट्टी से बनी एक भट्टी जैसी ही होती है, जिसमें रात को कंडे और छोटी लकड़ियां जलाकर रख दी जाती थीं. ये रात पर धीमी आंच से जलती है और यह दूध को लगातार आंच देती रहती है.

किसान सुबह खेत पर काम करने जाने से पहले इस गर्म दूध के साथ गेहूं की रात में बनी रोटी खा लेते थे. बासी रोटी गर्म दूध के साथ खाने में स्वादिष्ट तो लगती ही है साथ ही यह फायदेमंद भी होती है.



गेंहू की बासी रोटी इसलिए सेहत के लिए फायदेमंद

बासी रोटी अधिक पौष्टिक होती है, यह बात हैरान कर देने वाली है लेकिन यह सच है कि गेहूं की बनी रोटी बासी होने के बाद अधिक पौष्टिक हो जाती है. myUpchar के अनुसार, गेहूं को जब पकाया जाता है तो पकने के करीब 8 घंटे तक स्टोर करने के बाद उसकी पोषण क्षमता प्राकृतिक रूप से बढ़ जाती है.

भारत में गेहूं की रोटी खाने का चलन ज्यादा है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि यहां ज्यादातर गेहूं की खेती की जाती है. गेहूं के आटे में कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होता है. साथ ही इससे प्रोटीन भी होता है. इसके अतिरिक्त बिना छाने हुए आटे की रोटियां बनाने से फाइबर भी प्रचुर मात्रा में मिलता है. गेहूं के ऊपर की महीन परत प्राकृतिक और पौष्टिक फाइबर से बनी होती है.

यह भी देखा गया है कि प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट के मिश्रण को जब एक निश्चित तापमान पर गर्म करने के बाद निश्चित समय तक ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है तो उससे शरीर की आंतों के लिए महत्वपूर्ण अच्छे बैक्टीरिया का निर्माण हो जाता है, इसलिए भी गेहूं की बासी रोटी सेहतमंद होती है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, रोटी या चावल क्या है सेहत के लिए बेहतर पढ़ें. न्यूज 18 हिंदी पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.


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