#काम की बात : लड़कियां फोरप्‍ले पर इतना जोर क्‍यों देती हैं?

सेक्‍स सलाह
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सेक्‍स का दूसरा नाम संभोग है. सम यानी बराबरी. आनंद तो तभी है, जब दोनों साथी इस खेल में बराबरी के हिस्‍सेदार हों

  • Last Updated: August 16, 2018, 3:08 PM IST
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प्रश्‍न : मेरी पार्टनर को फोरप्‍ले बहुत पसंद है. इतना कि अगर सेक्‍स न भी करो तो सिर्फ फोरप्‍ले ही उसके लिए काफी होता है, जबकि मुझे उसकी जरूरत ही नहीं महसूस होती. कई बार लगता है कि लंबे फोरप्‍ले के बाद मेरा एक्‍साइटमेंट ही कम हो जाता है.

फोरप्ले दरअसल प्ले की शुरुआत है. कोई भी खेल शुरू करने से पहले वार्मअप करना बहुत जरूरी है. लेकिन यहां हमें ये भी याद रखना और समझना जरूरी है कि पुरुष माचिस की तीली की तरह होते हैं. जो बहुत तेजी के साथ सुलगते हैं, लेकिन जितनी जल्‍दी सुलगते हैं, उतनी ही जल्‍दी बुझ भी जाते हैं. लेकिन महिलाएं प्रेस की तरह होती हैं. उन्‍हें गर्म होने में काफी वक्‍त लगता है और उसके बाद वह ठंडा होने में भी उतना ही समय लेती हैं.

अगर आप अपने साथी से प्रेम करते हैं और उनकी खुशी का सम्‍मान करते हैं तो आपको उनकी खुशी के लिए फोरप्‍ले में ज्‍यादा वक्‍त देना बुरा नहीं लगेगा, भले खुद आपको उसकी ज्‍यादा जरूरत न हो. याद रखें, सेक्‍स का दूसरा नाम संभोग है. सम यानी बराबरी. आनंद तो तभी है, जब दोनों साथी इस खेल में बराबरी के हिस्‍सेदार हों.



महिलाओं के लिए फोरप्‍ले अंतरंगता का सबसे अभिन्‍न और सबसे महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है. उनके लिए यह सेक्‍स के एक्‍ट से भी ज्‍यादा जरूरी है. अगर फोरप्ले में ज्यादा समय नहीं दिया जाए तो महिला के प्राइवेट पार्ट में गीलापन नहीं होगा और ऐसा होने की स्थिति में महिला को लिंग प्रवेश के समय दर्द का अनुभव होगा. और कई बार उसे ऑर्गेज्‍म यानी चरम सुख का अनुभव भी नहीं होगा. इसलिए फोरप्ले में ज्यादा से ज्यादा समय देना बहुत जरूरी है.
फोरप्ले के समय एक-दूसरे से बात करनी भी जरूरी है. एक-दूसरे की पसंद-नापसंद जानना भी जरूरी है. किसी महिला को कान के कोनों के स्पर्श से आनंद का अनुभव होता है तो किसी को पीठ पर हाथ लगाने से अच्छा लगता है. कई महिलाएं छाती के स्‍पर्श से उत्‍तेजित हो जाती हैं. किसी को उग्र तो किसी को नाजुक स्‍पर्श पसंद होता है. अब आपके साथी को किस प्रकार का स्‍पर्श पसंद है, वो तो आपको ही पता लगाना पड़ेगा. इसके लिए आपको फोरप्ले के समय और उसके बाद भी अपने साथी से बात करनी होगी. महिलाएं आमतौर पर संकोची स्‍वभाव की होती हैं. उन्‍हें खुलने में वक्‍त लगता है. इसके लिए जरूरी है कि उन्‍हें सहजता और सुरक्षा का एहसास कराया जाए. भावनात्‍मक रूप से सुरक्षित महसूस करने पर वह ज्‍यादा खुलकर अपने मन को जाहिर कर पाती हैं. इसीलिए अपनी महिला साथी से बात करें. उनसे पूछें कि उन्‍हें कैसा लगा, उन्‍हें क्‍या पसंद आया और क्‍या पसंद नहीं आया. यह सब जानना बेहद जरूरी है. ऋषि वात्‍स्‍यायन ने भी अपनी पुस्‍तक कामसूत्र में लिखा है कि विवाह के बाद पहले चार दिन तक पति-पत्‍नी को सिर्फ आपस में बात करनी चाहिए. अपनी पसंद-नापसंद बतानी चाहिए और उसके बाद अपना ज्यादा से ज्यादा समय फोरप्ले में बिताना चाहिए.

(डॉ. पारस शाह सानिध्‍य मल्‍टी स्‍पेशिएलिटी हॉस्पिटल, अहमदाबाद, गुजरात में चीफ कंसल्‍टेंट सेक्‍सोलॉजिस्‍ट हैं.) 

अगर आपके मन में भी कोई सवाल या जिज्ञासा है तो आप इस पते पर हमें ईमेल भेज सकते हैं. डॉ. शाह आपके सभी सवालों का जवाब देंगे.
ईमेल – Ask.life@nw18.com

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