PCOS के बाद भी महिलाएं हो सकती हैं प्रेग्नेंट, गर्भवती होने के लिए अपनाएं ये उपाय

PCOS के बाद भी महिलाएं हो सकती हैं प्रेग्नेंट, गर्भवती होने के लिए अपनाएं ये उपाय
अगर पीसीओएस से पीड़ित महिला मोटापे का शिकार है तो बेहद जरूरी है कि पहले वह अपना वजन कम करे.

जिन महिलाओं को पीसीओएस (PCOS) है उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि पीसीओएस होने के बावजूद प्रेग्नेंसी (Pregnancy) संभव है. कुछ महिलाएं नैचुरल तरीके से ही गर्भवती हो जाती हैं जबकी बाकियों को चिकित्सीय मदद की जरूरत पड़ती है.

  • Last Updated: September 11, 2020, 11:26 AM IST
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पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस (PCOS) बेहद कॉमन हॉर्मोनल बीमारी है जो प्रजनन की उम्र वाली हर 5 में से 1 महिला में देखने को मिलती है. इसमें अंडाशय के सही तरीके से कार्य करने की क्षमता प्रभावित होती है. पीसीओएस से जुड़ी एक सबसे बड़ी परेशानी है इन्फर्टिलिटी (Infertility) या बांझपन. इसके अलावा भी पीसीओएस से जुड़ी कई और जटिलाएं हैं जैसे- मिसकैरेज का खतरा बढ़ना, गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज की समस्या, प्रेगनेंसी के दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या और प्रीमैच्योर डिलिवरी आदि.

आंकड़ों की मानें तो पीसीओएस से पीड़ित करीब 80 प्रतिशत महिलाओं को इन्फर्टिलिटी का सामना करना पड़ता है. इसका कारण ये है कि उन महिलाओं का अंडाशय विकसित अंडों का उत्पादन करने में अक्षम हो जाता है और अगर स्वस्थ अंडे का उत्पादन ही नहीं होगा तो वह स्पर्म के द्वारा फर्टिलाइज कैसे होगा. हालांकि जिन महिलाओं को पीसीओएस है उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि पीसीओएस होने के बावजूद प्रेगनेंसी संभव है. कुछ महिलाएं नैचुरल तरीके से ही गर्भवती हो जाती हैं जबकी बाकियों को चिकित्सीय मदद की जरूरत पड़ती है. ऐसे में पीसीओएस आपकी फर्टिलिटी को किस तरह से प्रभावित करता है इस बारे में जानने के लिए आगे पढ़ें.



1. पीसीओएस फर्टिलिटी को कैसे प्रभावित करता है?
अगर किसी महिला को पीसीओएस की समस्या हो तो इन 3 कारणों से उनके लिए गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है :

  • हॉर्मोन्स का असंतुलन : पीसीओएस होने पर महिलाओं के शरीर में लुटेनाइजिंग हार्मोन (अग्रपीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित एक हॉर्मोन जो महिलाओं में ओव्यूलेशन को उत्तेजित करता है) की अधिकता हो जाती है, फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन कम हो जाता है और साथ ही में एस्ट्रोजेन और इंसुलिन की भी अधिकता हो जाती है. ये सारी चीजें मिलकर अंडाशय द्वारा हेल्दी और मैच्योर अंडों के उत्पादन की क्षमता में रूकावट डालती हैं जिस कारण महिला के लिए गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है.

  • ओव्यूलेशन न होना : एंड्रोजन पुरुष सेक्स हार्मोन है लेकिन कम मात्रा में महिलाओं के शरीर में भी इसका उत्पादन होता है. जब महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन का लेवल बढ़ जाता है तो अंडाशय में अंडों के उत्पादन की प्रक्रिया में रुकावट आ जाती है. सभी अपरिपक्व अंडे अंडाशय के अंदर ही सिस्ट के रूप में रह जाते हैं. ओव्यूलेशन की प्रक्रिया न होने के कारण महिला के लिए गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है.

  • अनियमित मासिक धर्म : पीसीओएस से पीड़ित सभी महिलाओं में ओव्यूलेशन न होने की समस्या नहीं होती. कुछ महिलाओं में ओव्यूलेशन होता है लेकिन नियमित रूप से नहीं होता जिस कारण मासिक धर्म अनियमित हो जाता है. माहवारी से जुड़ी अनियमितताओं के कारण महिला को गर्भधारण करने में सामान्य से ज्यादा वक्त लगता है.


2. पीसीओएस में गर्भधारण करने में कितना समय लगता है?
अगर किसी महिला को पीसीओएस की समस्या है लेकिन उनकी उम्र 35 साल से कम है और पीसीओएस के बावजूद अगर महिला की ओव्यूलेशन की प्रक्रिया नियमित रूप से काम कर रही है और दोनों पार्टनर में से किसी को भी प्रजनन शक्ति को प्रभावित करने वाली कोई और समस्या नहीं है तो महिला 1 साल या इससे भी कम समय में गर्भधारण कर सकती है.

लेकिन अगर महिला को पीसीओएस के साथ ही गर्भाशय में रसौली की भी समस्या है या पुरुषों में शुक्राणुओं की कमी की दिक्कत है तो ऐसे में महिला को गर्भवती होने में 1 साल से अधिक का वक्त लग सकता है. 35 साल के बाद महिलाओं की प्रजनन क्षमता वैसे भी प्राकृतिक रूप से कम होने लगती हैं.

3. पीसीओएस में गर्भवती होने के लिए क्या करें?
पीसीओएस का मतलब ये नहीं कि आपके लिए गर्भवती होना नामुमकिन है लेकिन कई बार कुछ स्थितियां गर्भधारण के लिए प्रतिकूल जरूर हो जाती हैं. इस तरह के मामलों में ओव्यूलेशन (परिपक्व अंडों का उत्पादन) होना बेहद जरूरी है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए डॉक्टर आपको निम्नलिखित चीजों को फॉलो करने की सलाह दे सकते हैं :

वजन कम करें : अगर पीसीओएस से पीड़ित महिला मोटापे का शिकार है तो बेहद जरूरी है कि पहले वह अपना वजन कम करे तभी अंडाशय से हेल्दी और परिपक्व अंडे रिलीज हो पाएंगे. अगर वजन में सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत की भी कमी कर ली जाए तो प्रजनन क्षमता में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. 18.5 से 24.9 के बीच के बीएमआई को आदर्श माना जाता है.

जीवनशैली में बदलाव : स्वस्थ और संतुलित आहार का सेवन करें, नियमित रूप से एक्सरसाइज करें, फिजिकल ऐक्टिविटी में शामिल हों, धूम्रपान न करें, अल्कोहल का सेवन करने से बचें, जहां तक संभव हो तनाव से दूर ही रहें, डायबिटीज की समस्या हो तो उसे कंट्रोल में रखें. इस तरह जीवनशैली में सुधार करने से भी प्रजनन क्षमता बेहतर होती है.

दवाइयां : आपके गर्भवती होने के चांसेज को बढ़ाने के लिए डॉक्टर आपको कुछ दवाइयां भी प्रिस्क्राइब कर सकते हैं -

  • क्लोमीफीन टैबलेट जो एक प्रकार की एंटी एस्ट्रोजन दवा है जो ओव्यूलेशन की प्रक्रिया को सामान्य बनाने में मदद करती है.

  • पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ओव्यूलेशन को उत्तेजित करने के लिए मेटफॉर्मिन दवा भी दी जाती है. इस दवा को अकेले या क्लोमीफीन के साथ मिलाकर भी दिया जा सकता है.

  • लेट्रोजोल नाम की भी एक दवा है जो ओव्यूलेशन को बढ़ाने में मदद करती है और एस्ट्रोजन के उत्पादन को कम करती है.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, पीसीओएस में गर्भधारण के बारे में पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.


अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

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