World COPD Day 2020: इनडोर पॉल्यूशन बन सकता है सीओपीडी का कारण, कर सकता है बहुत बीमार

World COPD Day 2020: इनडोर पॉल्यूशन बन सकता है सीओपीडी का कारण, कर सकता है बहुत बीमार
इनडोर पॉल्यूशन बन सकता है सीओपीडी का कारण सांकेतिक तस्वीर

हर साल 18 नवंबर को वर्ल्ड सीओपीडी डे मनाया जाता है. दरअसल, सीओपीडी एक गंभीर बीमारी है जिसमें हमारी श्वसन प्रक्रिया बाधित हो जाती है.

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  • Last Updated : November 18, 2020, 6:15 pm IST
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    सीओपीडी यानी क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलाने और इस बीमारी के बोझ को कम करने के मकसद से हर साल 18 नवंबर को वर्ल्ड सीओपीडी डे मनाया जाता है. दरअसल, सीओपीडी एक गंभीर बीमारी है जिसमें हमारी श्वसन प्रक्रिया बाधित हो जाती है. जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे कंपाउंड के संपर्क में रहता है जो हमारे फेफड़ों को उत्तेजित करते हैं या चिड़चिड़ापन पैदा करते हैं तो इस कारण सीओपीडी की समस्या होती है. सीओपीडी के तहत 2 मुख्य स्थितियां आती हैं- क्रॉनिक ब्रॉन्काइटिस और एम्फिसेमा. मध्यम उम्र के या अधिक उम्र के बुजुर्ग जो धूम्रपान करते हैं उनमें सीओपीडी होने का खतरा अधिक होता है. आमतौर पर ब्रॉन्काइटिस और एम्फिसेमा ये दोनों समस्याएं एक साथ होती हैं और बीमारी की गंभीरता हर व्यक्ति में अलग-अलग लेवल की होती है.

    सीओपीडी की बीमारी होने में प्रदूषण की भूमिका
    सीधे तौर पर धूम्रपान करने के अलावा, सेकंडहैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग (खुद सिगरेट न पीना लेकिन सिगरेट के धुएं के संपर्क में रहना) भी वयस्कों में सीओपीडी के खतरे को बढ़ाता है. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं कि सिर्फ बाहरी प्रदूषण ही सीओपीडी का कारण है क्योंकि घर के अंदर का इंडोर प्रदूषण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है. वैश्विक स्तर पर देखें तो घर के अंदर की और आसपास मौजूद वायु प्रदूषण के संयुक्त प्रभाव की वजह से हर साल करीब 70 लाख (7 मिलियन) लोगों की समय से पहले मृत्यु हो जाती है.

    एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) के मुताबिक, हम अपने घरों और अन्य इमारतों में जिस हवा को सांस के जरिए शरीर के अंदर लेते हैं वह, बाहरी हवा की तुलना में कहीं ज्यादा प्रदूषित हो सकती है.



    बहुत से विकासशील देशों में अब भी लोग, खाना पकाने के लिए कोयला और लकड़ी जैसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं. खाना पकाने के दौरान इस्तेमाल होने वाले ये ईंधन और केरोसिन तेल जलाने का हमारे फेफड़ों पर सीधा असर पड़ता है. घर के अंदर इंडोर प्रदूषण का स्रोत ऐसी चीजें हैं जो हवा में गैस या कणों को छोड़ते हैं जैसे- लकड़ी के चूल्हे, बर्नर, वॉटर हीटर, ड्रायर आदि. ये अंदरूनी उपकरण कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी गैसें छोड़ते हैं, जिनकी वजह से अस्थमा और सांस से संबंधी कई दूसरी बीमारियों का भी खतरा बढ़ जाता है.

    घर के अंदर रहने के दौरान हम कई बार बायोलॉजिकल यानी जैविक प्रदूषण का भी सामना करते हैं जिसमें- फफूंद, पराग कण, पालतू जानवरों के बाल, धूल के कण और कॉकरोच के कण शामिल हैं. मच्छरों और अन्य कीड़ों को मारने के लिए हम कीटनाशकों और रिपेलेंट स्प्रे का उपयोग करते हैं, और ये सारी चीजें हमारी श्वसन प्रणाली पर प्रतिकूल असर डालती हैं. बिल्डिंग निर्माण में इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें जैसे ऐस्बेस्टॉस भी हमारे श्वसन अंगों के लिए हानिकारक है.

    आपको जानकर हैरानी होगी कि हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले एयर क्लीनर्स जिन्हें आप हवा को साफ करने के लिए खरीद कर लाते हैं वह भी ओजोन गैस को उत्पन्न करने का काम करते हैं. अभी तक किसी भी शोध में यह साबित नहीं हुआ है कि इस तरह के उपकरण हवा में मौजूद धूल और अन्य हानिकारक रसायनों को पूरी तरह से हटाने में सक्षम हैं. विडंबना यह है कि इस तरह के तथाकथित एयर क्लीनर्स हमारे फेफड़ों पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं क्योंकि हम इनके द्वारा उत्पन्न किए गए ओजोन गैस को सांस के जरिए शरीर के अंदर ले रहे हैं जो हमारे फेफड़ों के लिए हानिकारक है.

    इंडोर प्रदूषकों को कैसे करें कंट्रोल
    घर के अंदर मौजूद इंडोर पॉल्यूशन को कम करने के लिए आप कई ऐहतियाती कदम उठा सकते हैं. हमें कोशिश करनी चाहिए कि हम खाना बनाते समय बेहतर उपकरणों का इस्तेमाल करें. यह बेहद आवश्यक है कि हम अपने घर के दीवारों के अंदर धुएं के स्रोतों को कम से कम करने की कोशिश करें. हमें अपने घरों के अंदर की नमी के स्तर को 50% से नीचे रखना चाहिए जिसे ह्यूमिडिफायर की मदद से किया जा सकता है. रसोई में, नमी के स्तर को कंट्रोल में रखने के लिए एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करना बेहतर होगा.

    इसके अलावा हमें कीटनाशकों, बाथरूम क्लीनर्स, कॉकरोच और मच्छरों को मारने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्प्रे का भी कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए. जहां तक संभव हो बेहद कम या कोई एयरोसोल रिलीज न करने वाले आइटम्स को ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए. और आखिर में, हमें कॉमन वायु प्रदूषकों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए ताकि हम घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता में सुधार के लिए सरल और सस्ते तरीके अपना सकें. (इस आर्टिकल को माइ उपचार के लिए गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी विभाग के डायरेक्टर डॉ मनोज गोयल ने लिखा है।) (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल सीओपीडी के लक्षण, कारण, इलाज के बारे में पढ़ें। न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)