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World Lung Day 2022: कोरोना के मरीजों में फेफड़ों से जुड़ी परेशानी के क्या हैं लक्षण? जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हेल्थ के लिए हमारे फेफड़े का ठीक प्रकार से काम करना बहुत जरूरी है.

हेल्थ के लिए हमारे फेफड़े का ठीक प्रकार से काम करना बहुत जरूरी है.

World Lung Day 2022: डॉ. छाजेड़ के अनुसार, लंग्स संबंधित बीमारी के लक्षण हमें पहले से ही दिखाई देने लगते हैं, लेकिन कई ...अधिक पढ़ें

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हाइलाइट्स

एक्सपर्ट के अनुसार, कोरोना के बाद से खांसी-जुकाम के मामले बढ़े हैं.
लोगों में पोस्ट कोविड ब्रोंकाइटिस यानी खांसी होना, सांस फूलने जैसी समस्याएं भी सामने आईं.

World Lung Day 2022: आज पूरी दुनिया ‘विश्व फेफड़ा दिवस’ मना रही है. पिछले दो सालों में कोरोना महामारी ने हमारी फेफड़ों को कई तरह से नुकसान पहुंचाया है. इस दिवस पर इस बार की थीम ‘लंग हेल्थ फॉर आल’ रखी गई है. इसे मनाने का उद्देश्य फेफड़े की ठीक से देखभाल करना, लंग की बीमारियों का पता करना और सभी को समान रूप से उपचार देना है. इसके साथ ही इस दिवस का एक और उद्देश्य है- लोगों को फेफड़े संबंधी बीमारियों के बारे में जागरूक करना.

फेफड़ा का हेल्दी रहना और उसका ठीक प्रकार से काम करना हमारे पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है. अगर फेफड़े कमजोर हुए तो दूसरी कई अन्य बीमारियां भी हमें जकड़ सकते हैं. ‘विश्व फेफड़े दिवस’ के मौके पर हमने फोर्टिस हीरानंदानी हॉस्पिटल (वाशी, मुंबई) के डायरेक्टर- पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप सेंटर डॉ. प्रशांत छाजेड़ से बात की. डॉ. छाजेड़ ने फेफड़े संबंधी कई ज़रूरी बातें हमारे साथ शेयर कीं.

लंग्स की प्रॉब्लम्स को कैसे पहचानें
फेफड़े संबंधी किसी भी बीमारी के इलाज के लिए जरूर है बीमारी को जानना. डॉ. छाजेड़ ने हमें बताया कि अगर हमारे फेफड़े में किसी तरह की कोई दिक्कत या फिर लंग संबंधी कोई बीमारी है तो उसके कई लक्षण दिखने लगते हैं जिन्हें हमें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

डॉ. छाजेड़ के अनुसार, लंग्स संबंधी बीमारी के लक्षण हमें पहले से ही दिखाई देने लगते हैं लेकिन कई बार लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं. उन्होंने कहा कि जब भी फेफड़े की कोई समस्या होती है तो हमें कुछ कॉमन लक्षण दिखने लगते हैं. जैसे बुखार आना, खांसी आना, छाती पर दर्द होना और सांस का फूलना. अगर किसी को भी इस तरह की दिक्कतें एक साथ होंती हैं तो तुरंत एक्सपर्ट से सलाह लेनी चाहिए.

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कोरोना का फेफड़े पर असर
कोरोना महामारी ने फेफड़े को भी नुकसान पहुंचा है. कोविड की वजह से लंग में निमोनिया की समस्याएं सामने आईं, इन्फ्लामेशन की दिक्कतें भी बढ़ीं. जो लोग हॉस्पिटल या फिर आईसीयू में थे और कोविड से रिकवर हुए तो उनमें लंग्स फाइब्रोसिस की समस्याएं सामने आईं. कोविड की वजह से कई ऐसे लोग भी हैं जिन्हें लंग्स फाइब्रोसिस की दिक्कतें एक साल बाद तक भी बनी हुई हैं. बहुत लोगों में पोस्ट कोविड ब्रंकाइटिस यानी खांसी होना, सांस फूलना जैसी समस्याएं भी लोगों में सामने आईं.

क्या कोविड की वजह से फेफड़ें के मरीजों में इजाफा हुआ?
डॉ. छाजेड़ से जब हमने पूछा कि क्या कोरोना महामारी की वजह से फेफड़े संबंधी बीमारियों और रोगियों में इजाफा हुआ है क्या तो उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, लेकिन कोविड की वजह से लोग अब बीमारियों को लेकर जागरूक हो गए हैं. जहां पहले लोग खांसी और चेस्ट पेन होने को इग्नोर कर देते थे वहीं लोग अब इन दिक्कतों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेते हैं. डॉ. छाजेड़ ने कहा कि लंग्स के मरीज हमेशा से ही थे कोरोना की वजह से मामले नहीं बढ़े हैं.

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लॉन्ग कोविड वाले मरीजों के लंग्स पर कोरोना का असर
डॉ. छाजेड़ ने बताया कि कोरोना से रिकवर होने में कभी कभी छह महीने से लेकर एक साल तक का वक्त लग जाता है. ऐसे में लॉन्ग कोविड मरीजों में सांस फूलना, खांसी होना और जल्दी थक जाने से दिक्कतें अधिक सामने आईं. इसके साथ ही लॉन्ग कोविड मरीजों में कुछ न्यूरोलॉजिलक असर जैसे चीजे याद नहीं रहना या फिर फोबिया होना.

कोविड की वजह से कुछ बीमारियों में हुआ इजाफा
कोरोना ने किस तरह से फेफड़े और दूसरी बीमारियों को प्रभावित किया इस पर हेल्थ एक्सपर्ट ने कहा कि जिन लोगों को पहले कम खांसी जुकाम की समस्या होती थी उन्हें अब जल्द ऐसी दिक्कतें होने लगी हैं. डॉ. छाजेड़ के अनुसार कोविड के बाद से ब्रोंकाइटिस और रायनाइटिस का प्रतिशत बढ़ा है. इसके अतिरिक्त ब्लड क्लॉट की दिक्कतें भी दूसरे ऑर्गंस में देखने को मिली.

डायबिटीज पर कोविड का असर
डॉ. प्रशांत छाजेड़ ने कहा कि कोविड का असर डायबिटीज से भी है. कोविड कि वजह से नए डायबिटीज के मामले भी सामने आए हैं. कोविड की वजह से डायबिटीज कंट्रोल करने में काफी दिक्कतें सामने आईं. इस दौर में ब्लड शुगर में काफी उतार चढ़ाव भी देखने को मिला.

क्या घरेलू व्यायाम और दूसरे तरीकों से फेफड़े संबंधी समस्या को कम किया जा सकता है?
अक्सर लोग इस बात पर जोर देते हैं कि लंग्स संबंधी दिक्कत या बीमारी पर हमें व्यायाम करना चाहिए, अगर इस पर डॉ. छाजेड़ ने कहा कि अगर किसी को भी फेफड़े संबंधी बीमारी के लक्षण नजर आते हैं तो उन्हें सबसे पहले अपने हेल्थ एक्सपर्ट से मिलना. कई बार ऐसा होता है कि जरूरी नहीं है कि खांसी या जुकाम होने पर कोई फेफड़े संबंधी बीमारी हो. व्यायाम से भी कई बार रिकवरी में आराम मिलता है. ऐसे बहुत लोग सामने आए जो नियमित व्यायाम और योग करते हैं उनमें फेफड़े संबंधी रोग के लक्षण कम होते हुए भी दिखाई दिए हैं.

लंग्स को डिटॉक्स करने का नहीं है कोई तरीका
डॉ. प्रशांत से जब हमने पूछा कि क्या इंफेक्शन होने पर लंग्स को क्लीन करने या फिर डिटॉक्स करने का कोई तरीका है तो उन्होंने साफ तौर पर इससे इनकार करते हुए कहा कि ऐसा कोई तरीका नहीं है. उन्होंने जोर दिया कि अगर किसी को लंग्स संबंधी कोई समस्या है तो उसे सीधे एक्सपर्ट से मिलना चाहिए और बीमारी को जानना चाहिए बजाय समय और पैसा बर्बाद करने के.

Tags: Health, Lifestyle

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