World Mental Health Day 2020: मानसिक बीमारियां, इलाज और दवाओं के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ढेरों बीमारियां हैं और सभी के लक्षण एक दूसरे से अलग हो सकते हैं.
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ढेरों बीमारियां हैं और सभी के लक्षण एक दूसरे से अलग हो सकते हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बारे में जोर देते हुए कहा है कि यही वह समय है जब सभी संगठनों, हेल्थकेयर प्रफेशनल्स और कम्यूनिटीज को साथ आना चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के मुद्दों पर बात करनी चाहिए और जहां तक जरूरी हो इसे बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए.

  • Last Updated: October 10, 2020, 9:28 AM IST
  • Share this:


विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) हर साल 10 अक्टूबर को मनाया जाता है ताकि दुनियाभर में तेजी से उभरते हुए मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के बारे में लोगों के बीच जागरूकता फैलायी जा सके. इस साल मेंटल हेल्थ डे की थीम स्वाभाविक रूप से कोविड-19 (Covid-19) महामारी और इसके प्रभावों से जुड़ी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस बारे में जोर देते हुए कहा है कि यही वह समय है जब सभी संगठनों, हेल्थकेयर प्रफेशनल्स और कम्यूनिटीज को साथ आना चाहिए और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बात करनी चाहिए और जहां तक जरूरी हो इसे बढ़ाने के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए.

इस अभियान का एक बड़ा हिस्सा भले ही सरकार के नेतृत्व वाली पहल से हो जिसमें सभी लोगों को बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने की कोशिश करनी होगी लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर भी लोगों को इस अभियान में आगे आने की जरूरत है. ऐसा इसलिए क्योंकि जरूरत पड़ने पर व्यक्ति का स्वयं जागरूक होना और मदद मांगने के लिए हाथ आगे बढ़ाना- ये दोनों ऐसे कार्य हैं जिन्हें व्यक्तिगत स्तर पर करने की जरूरत है. वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के मौके पर हम आपको अक्सर पूछे जाने वाले उन सवालों के बारे में बता रहे हैं जिसकी मदद से आपको भी मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बेहतर जानकारी मिल पाएगी.



1. कैसे पता चलेगा कि मुझे या मेरे किसी दोस्त को मानसिक स्वास्थ्य समस्या है?
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी ढेरों बीमारियां हैं और सभी के लक्षण एक दूसरे से अलग हो सकते हैं. हालांकि, यूएस नैशनल एलायंस ऑन मेंटल इलनेस (NAMI) की मानें तो सभी मानसिक बीमारियों में कुछ सामान्य लक्षण अवश्य होते हैं, जैसे- अत्यधिक चिंता या भय महसूस करना, अत्यधिक उदासी महसूस करना या लो फील करना, कन्फ्यूजन की स्थिति, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन या क्रोध का बढ़ना, सेक्स ड्राइव में बदलाव आना और रोजमर्रा के कार्यों को करने में कठिनाई महसूस होना. बच्चों में मानसिक समस्याओं के लक्षण अलग हो सकते हैं, और यह उनकी उम्र पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर आप खुद में या किसी प्रियजन या दोस्त में इस तरह के लक्षणों को देखें तो घबराने या डरने की बजाए मदद के लिए डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रफेशनल के पास जाएं.

2. क्या मैं बिना दवा या इलाज के मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे से "उबर" सकता हूं?
इस दुनिया में ऐसी कोई बीमारी नहीं है जो बिना उचित इलाज और पुनर्वास के ठीक हो जाए. मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां और समस्याएं भी अन्य बीमारियों की तरह ही हैं और आपको ठीक होने और बीमारी से उबरने के लिए थेरेपी की आवश्यकता होगी. समस्या की अनदेखी करने से उसे दूर नहीं किया जा सकेगा. लेकिन मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह और मार्गदर्शन प्राप्त करने से आपको अपनी जीवनशैली और दृष्टिकोण में बदलाव करने में मदद मिलेगी ताकि आप पूरी तरह से ठीक हो सकें. वैसे तो इलाज और रिकवरी प्रक्रिया का एक बड़ा हिस्सा विशेषज्ञ पर निर्भर करता है, लेकिन इसके साथ ही आपको अपने प्रियजनों के प्यार, समर्थन और प्रेरणा की भी आवश्यकता होगी ताकि आप अपने जीवन में जरूरी बदलाव कर सकें जैसे- एक्सरसाइज करना, अच्छी नींद लेना और पौष्टिक आहार का सेवन करना.

3. मानसिक सेहत से जुड़ी समस्या के लिए अगर मदद चाहिए तो मुझे कहां जाना चाहिए?
अधिकांश अस्पताल, क्लीनिक और हेल्थकेयर ऐप में मेंटल हेल्थ प्रफेशनल्स से बात करने और परामर्श लेने की व्यवस्था होती है जिसकी मदद से आप सीधे उन तक पहुंच सकते हैं. यदि आप किसी ऐसे एक्सपर्ट से सीधे संपर्क करने के बारे में अनिश्चित हैं, जिन्हें आप नहीं जानते हैं, तो पहले अपने रेग्युलर डॉक्टर या फैमिली डॉक्टर से परामर्श करें. अपनी मानसिक समस्याओं के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें और उनसे कहें कि वे ही आपको किसी विशेषज्ञ के पास रेफर करें.

4. क्या सभी मेंटल हेल्थ प्रफेशनल एक समान होते हैं?
नहीं. मूल रूप मेंटल हेल्थ प्रफेशनल 2 तरह के होते हैं: मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक. मनोचिकित्सक, मेडिकली ट्रेन्ड डॉक्टर होते हैं जो मानसिक स्वास्थ्य में स्पेशलाइज करते हैं और बीमारी के हिसाब से आपको दवाइयां प्रिस्क्राइब करते हैं. तो वहीं, मनोवैज्ञानिकों के पास मनोविज्ञान यानी साइकॉलजी की डिग्री होती है, वे आपको दवा लिखकर नहीं देते और आमतौर पर मरीज को साइकोथेरेपी देते हैं जिसे टॉक थेरेपी के रूप में भी जाना जाता है. आपको अपनी सेहत से जुड़ी समस्या के लिए किससे संपर्क करना चाहिए यह आपकी समस्या की गंभीरता और लाइन ऑफ ट्रीटमेंट पर निर्भर करता है जो आपकी जरूरतों के अनुकूल हो.

5. क्या मैं एंटीडिप्रेसेंट दवा या अन्य दवाइयों का इस्तेमाल किए बिना ही ठीक हो सकता हूं?
आपको एंटीडिप्रेसेंट की आवश्यकता है या नहीं यह आपकी मानसिक स्वास्थ्य समस्या की गंभीरता पर निर्भर करता है. डिप्रेशन, घबराहट, मूड डिसऑर्डर या चिंता से जुड़ी बीमारियों के हल्के या मध्यम श्रेणी के मामलों में, एंटीडिप्रेसेंट या किसी भी तरह की दवा प्रिस्क्राइब नहीं की जाती. इसकी जगह, कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी सीबीटी (संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी) संज्ञानात्मक एक्सरसाइज जैसे "लीव्स ऑन अ स्ट्रीम", मेडिटेशन, व्यायाम और योग, स्वस्थ आहार और नींद के शेड्यूल को बनाए रखना जैसी चीजों की सलाह दी जाती है. हालांकि जब किसी व्यक्ति की मानसिक समस्या मध्यम से लेकर गंभीर स्थिति तक पहुंच जाती है तब उसे एंटीडिप्रेसेंट जैसे- सिलेक्टिव सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएसआरआई), सेरोटोनिन-नोरेपाइनफ्राइन रीअपटेक इनहिबिटर्स (एसएनआरआई) और नींद को बढ़ावा देने के लिए हल्के सिडेटिव्स (दर्दनिवारक दवाइयां) मनोचिकित्सक द्वारा प्रिस्क्राइब की जाती हैं.

6. क्या एंटीडिप्रेसेंट्स की लत लग जाती है? क्या ये मेरे व्यक्तित्व को बदल सकता है?
हम आपको बता दें कि लोगों के बीच ये आम धारणा है कि एंटीडिप्रेसेंट्स दवाइयों की लत लग जाती है लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है. एंटीडिप्रेसेंट्स का लंबे समय तक उपयोग करने पर उस पर निर्भरता जरूर हो जाती है लेकिन निर्भरता और लत दोनों में अंतर है. नशा एक प्रकार की मानसिक बीमारी है और एंटीडिप्रेसेंट जैसी दवाइयां जो मानसिक बीमारियों को दूर करने के लिए मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर को टार्गेट करती हैं, वे किसी तरह की लत की वजह बन जाएं, ये संभव नहीं लगता. यदि दवाओं की कोई श्रेणी है जिसकी लत लग सकती है तो वह पेनकिलर्स और ओपिऑयड्स हैं, एंटीडिप्रेसेंट्स नहीं.

इसके अलावा, यदि आप मनोचिकित्सक के उचित मार्गदर्शन और बताई गई डोज के हिसाब से ही एंटीडिप्रेसेंट्स का सेवन करें तो यह आपके व्यक्तित्व को भी नहीं बदलती है. यदि व्यक्तित्व में किसी तरह का मामूली बदलाव जैसे- भावनाओं की कमी देखने को मिलती भी है तो मनोचिकित्सक तुरंत दवा की डोज को कम कर देते हैं या दवाओं के कॉम्बिनेशन को बदल देते हैं जो आपके शरीर को बेहतर सूट करे. एंटीडिप्रेसेंट लेने पर शुरुआत में कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे भूख में कमी, सेक्स ड्राइव में बदलाव या नींद आने में कठिनाई, लेकिन ये सारी चीजें कुछ दिनों बाद ठीक हो जाती हैं.

7. अगर लोगों को पता चल जाए कि मैं थेरेपी ले रहा हूं या एंटीडिप्रेसेंट्स यूज करता हूं तो मैं क्या करूं?
यदि आपको आज किसी तरह का संक्रमण हो जाए और डॉक्टर आपको ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक्स, स्वस्थ आहार और आराम करने का एक कोर्स निर्धारित करते हैं, तो आप "लोगों को पता चलेगा तो क्या होगा" या "वे क्या कहेंगे" जैसे सवालों के बारे में नहीं सोचेंगे. तो फिर मेंटल हेल्थ के बारे में ऐसे सवालों की चिंता क्यों. आपको अपने आपको और आसपास मौजूद लोगों को भी ये याद दिलाने की आवश्यकता है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी मुद्दे और बीमारियां किसी भी दूसरी बीमारी की तरह ही है. किसी भी दूसरी बीमारी की तरह मानसिक बीमारी से भी निपटने के लिए आपको जिस चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है- वह है उचित इलाज, देखभाल और दूसरों का सपोर्ट. बीमारी से पूरी तरह से रिकवर होने के लिए बेहद जरूरी है कि आप शर्म और कलंक (स्टिगमा) जैसी चीजों को पीछे छोड़ दें.अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में पढ़ें. न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं. सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है. myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं.

अस्वीकरण : इस लेख में दी गयी जानकारी कुछ खास स्वास्थ्य स्थितियों और उनके संभावित उपचार के संबंध में शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। यह किसी योग्य और लाइसेंस प्राप्त चिकित्सक द्वारा दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवा, जांच, निदान और इलाज का विकल्प नहीं है। यदि आप, आपका बच्चा या कोई करीबी ऐसी किसी स्वास्थ्य समस्या का सामना कर रहा है, जिसके बारे में यहां बताया गया है तो जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें। यहां पर दी गयी जानकारी का उपयोग किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बीमारी के निदान या उपचार के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के ना करें। यदि आप ऐसा करते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको होने वाले किसी भी तरह से संभावित नुकसान के लिए ना तो myUpchar और ना ही News18 जिम्मेदार होगा।

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज