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स्टेम सेल थैरेपी ने किया एड्स का पूरी तरह से खात्मा!

स्टेम सेल थैरेपी ने किया एड्स का पूरी तरह से खात्मा!

एक नई स्टेम सेल थैरेपी को खोज निकाला गया है। इसने मरीजों के शरीर से एचआईवी वायरस का पूरी तरह से खात्मा कर दिया है।

एक नई स्टेम सेल थैरेपी को खोज निकाला गया है। इसने मरीजों के शरीर से एचआईवी वायरस का पूरी तरह से खात्मा कर दिया है।

एक नई स्टेम सेल थैरेपी को खोज निकाला गया है। इसने मरीजों के शरीर से एचआईवी वायरस का पूरी तरह से खात्मा कर दिया है।

    लंदन। जानलेवा बीमारी एड्स को काबू करने की दिशा मे शोधकर्ताओं के हाथ एक और बड़ी कामयाबी लगी है। एक नई स्टेम सेल थैरेपी को खोज निकाला गया है जिसने मरीजों के शरीर से इस वायरस का पूरी तरह से खात्मा कर दिया है।

    हारवर्ड मेडिकल स्कूल से संबंद्ध शोधकर्ता टिमोथी हेनरीख ने कुआलालंपुर में चल रही अंतर्राष्ट्रीय एड्स सोसायटी की एक कांफ्रेंस को इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दो एड्स मरीजों का अमेरिका के बोस्टन में उपचार किया गया और इस दौरान उन्हें यह स्टेम सेल थैरेपी दी गई। ये दोनों रक्त कैंसर के एक प्रकार लिंफोमा का शिकार हो चुके थे जिसके बाद उन्हें यह थैरेपी दी गई।

    स्टेम सेल प्रत्यारोपण के बाद इन दोनों मरीजों के जिस्म से एड्स वायरस का नामोनिशान मिट गया। इनमें इस कदर सुधार आ गया कि एक मरीज 15 सप्ताह से एड्स उपचार में काम आने वाली एंटी रेट्रोवायरल ड्रग नहीं ले रहा है जबकि दूसरे को यह दवा छोड़े हुए सात सप्ताह का समय हो गया है।

    एड्स के जानलेवा रोग से विश्वभर में 3.4 करोड़ लोग जूझ रहे हैं और स्टेम सेल थैरेपी बड़े पैमाने पर इसका वाजिब हल नहीं है क्योंकि यह बहुत महंगा उपचार है। हालांकि इस नए तरीके के खोजे जाने से इस असाध्य रोग पर काबू पाने की दिशा में नए रास्ते खुलेंगे। डॉ. हेनरिख ने पिछले साल जुलाई में बताया था कि इस उपचार को लेने वाले दोनों मरीजों के खून में एचआईवी मौजूद तो है लेकिन बेहद नगण्य मात्रा में। उन्होंने बताया था कि उस समय वे बीमारी को काबू करने के लिए दवाएं ले रहे थे।

    इस नई स्टेम सेल थैरेपी का खोजा जाना बर्लिन मरीज के नाम से पहचाने जाने वाले टिमोथी रे ब्राऊन के मामले की याद दिलाता है जिन्हें रक्त कैंसर ल्यूकीमिया हो जाने के बाद साल 2007 में बोन मैरो प्रत्यारोपण दिया गया। हालांकि उस मामले में और इन दोनों मरीजों के मामले में जमीन आसमान का फर्क है।

    टिमोथी को जहां एक बेहद दुर्लभ म्यूटेशन से पीड़ित व्यक्ति का बोन मैरो दिया गया वहीं इन दोनों मरीजों को दिए गए स्टेम सेल एक सामान्य दाता से लिए गए थे। इस शोध को मदद देने वाली संस्था फाऊंडेशन फॉर एड्स रिसर्च के मुख्य अधिशासी केविन रॉबर्ट फ्रोस्ट ने कहा कि डॉक्टर हेनरिख ने एचआईवी को जड़ से मिटाने की दिशा में एक बिल्कुल ही नया रास्ता खोल दिया है।

    गौरतलब है कि ह्यूमन इम्यूनो डिफेंसियेसी वायरस एचआईवी का आज से तीस साल पहले पता लगाया गया था। असुरक्षित यौन संबंधों, संक्रमित रक्त और दूसरे तरीकों से फैलने वाला यह संक्रमण व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रहार करता है जिसकी वजह से संक्रमित व्यक्ति कई तरह के दूसरे संक्रमणों और कैंसर का शिकार बन जाता है।

    हालांकि आज के समय में यह संक्रमण मौत का वारंट नहीं रह गया है क्योंकि एंटी रेट्रोवायरल दवाएं इसे काबू में रखकर रोगी को कई दशकों तक जीवित रहने का समय दे देती है। भारत के जेनरिक दवा निर्माता अफ्रीका और दूसरे गरीब देशों को इन दवाओं की सबसे बड़ी आपूर्तिकर्ता हैं। कई दूसरी पश्चिमी कंपनियां भी इन दवाओं के निर्माण के क्षेत्र में सक्रिय है।

    Tags: Aids, HIV, UK

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