टीनएजर्स बच्चों के गुस्से को शांत करने का तरीका जानें, रिश्ते में बढ़ेगा प्यार

टीनएजर्स बच्चों के गुस्से को शांत करने का तरीका जानें  (तस्वीर साभार: pexels/mohamed Abdelgaffa)
टीनएजर्स बच्चों के गुस्से को शांत करने का तरीका जानें (तस्वीर साभार: pexels/mohamed Abdelgaffa)

अगर बच्चा (Teenager) खुद में ही खोया रहता है और काफी कम बात करता है, तो उसकी सुनें. यह उससे बात करने का समय है. आपको उसकी समस्या और गुस्से को ट्रिगर करने वाली बातों को जानना चाहिए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2020, 8:27 AM IST
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किशोरावस्था बच्चों में बर्ताव के बारे में अनुमान लगाना मुश्किल ही होता है. ख़ुशी और अकेलेपन से लेकर गुस्से और जलन तक सब जगह उनकी मनोदशा घूमती है. इस दौरान उनका स्वभाव कम विकसित होता और छोटे मुद्दों से भी उन्हें ट्रिगर किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में माता-पिता हैं जिन्हें सावधानीपूर्वक निपटना होता है. यहां कुछ प्रभावी बातें बताई गई हैं जिसका इस्तेमाल आप अपने किशोर के गुस्से से भरे हुए व्यवहार से निपटने के लिए कर सकते हैं.

मारें या डांटें नहीं: पहले से ही नाराज किशोर या किशोरी को डांटना आग में घी डालने जैसा है. ऐसी स्थिति में उन्हें एक बार अपना गुस्सा निकालने देना चाहिए. उनसे अलग जाकर बात करें और पूछें कि इतनी चिढ़ क्यों है कारण पूछ सकते हैं. इससे किशोर या किशोरी को ट्रिगर करने वाले कुछ मुख्य मुद्दों के बारे में आपको जानकारी प्राप्त होगी.

हर मांग पूरी करना बंद करें: अक्सर किशोरों में यह देखा जाता है कि इच्छित मांग पूरी नहीं होने पर उन्हें गुस्सा आता है. इस स्थिति से बचने के लिए पहले से ही आपको उनकी हर मांग पूरी करने से बचना चाहिए. शुरू से इस आदत के होने से बच्चे को यह पता रहता है कि मेरी हर मांग पूरी नहीं होगी. इससे वे हर चीज की मांग ही नहीं करेंगे.



उनकी बात सुनें: अगर आपका किशोर खुद में ही खोया रहता है और काफी कम बात करता है, तो उसकी सुनें. यह उससे बात करने का समय है. आपको उसकी समस्या और गुस्से को ट्रिगर करने वाली बातों को जानना चाहिए. उसे यह भरोसा दिलाएं कि जब चाहे आपसे वह बात कर सकता है. इससे किशोर को आपके साथ बातें शेयर करने के लिए खुलने में मदद मिलेगी. उसके गुस्से को दूर रखने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करें.
किशोर को कब अकेले छोड़ना है, इसे जानें: एक अभिभावक के रूप में आपको यह सोचना है कि गर्म बहस से कब दूर जाना है. यह न केवल बच्चे को, बल्कि आपको भी शांत करेगा. एक बार वहां से चले जाएं, भले ही बाद में उस विषय के बारे में बच्चे से जान सकते हैं. उस पर विस्तार से बात भी कर सकते हैं.

डांटने की सीमा निर्धारित करें : बच्चे को थोड़ा डांटना जरूरी होता है लेकिन यह सुनिश्चित करें कि कब और कितना डांटना है. समय भी निर्धारित करें. अपने गुस्से को नियंत्रण में रखते हुए डांटें. बार-बार डांटने पर आपकी मूल्यों की कद्र खत्म हो सकती है. सही समय पर उचित तरीके से आप अपने बच्चे के गुस्से और उसकी समस्याओं से निपट सकते हैं और उनका समाधान भी कर सकते है.
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