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अगर आपका बच्चा भी सोने से पहले मोबाइल में घुसा रहता है तो जरूर पढ़ें इसे

कोशिश करें कि बच्चे जब भी मोबाइल का उपयोग करें तो आप उनके आसपास ही बने रहें. इससे बच्चे को सीखने का भी मौका मिल जाएगा और आप भी निश्चिंत रह सकेंगे.

कोशिश करें कि बच्चे जब भी मोबाइल का उपयोग करें तो आप उनके आसपास ही बने रहें. इससे बच्चे को सीखने का भी मौका मिल जाएगा और आप भी निश्चिंत रह सकेंगे.

कोशिश करें कि बच्चे जब भी मोबाइल का उपयोग करें तो आप उनके आसपास ही बने रहें. इससे बच्चे को सीखने का भी मौका मिल जाएगा औ ...अधिक पढ़ें

    सोने से पहले किसी भी तरह की स्क्रीन का इस्तेमाल नींद का दुश्मन है. खासकर सोने से पहले अगर आपके बच्चों को मोबाइल देखने की लत है तो तुरंत इसे बदल लें. कहीं ऐसा न हो कि ज्ञान बढ़ाने के लिए दिया गया मोबाइल बच्चे का बचपन ही छीन ले.

    छोटे बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं. मोबाइल की स्क्रीन से उनकी आंखों पर तुरंत बुरा असर पड़ता है. कम उम्र में ही बहुत पावर वाला चश्मा चढ़ जाने में इसका भी बड़ा योगदान है. दो साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल का इस्तेमाल बिल्कुल भी न करने दें. बच्चा बड़ा है तो उसे मोबाइल दे सकते हैं लेकिन समय तय कर दें कि दिनभर में सिर्फ आधे घंटे के लिए मोबाइल उनके पास रहेगा और वे रात सोने से दो घंटे पहले मोबाइल बिल्कुल नहीं लेंगे.

    कई बच्चों में रात में गेम्स खेलने की आदत होती है. इससे नींद आने में दिक्कत होने लगती है क्योंकि मोबाइल से ब्लू लाइट निकलती है जो आंखों की मांसपेशियों में तनाव पैदा करती है. रात में अच्छी नींद न आने से बच्चों सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाकर अच्छे से परफॉर्म नहीं कर पाते.

    मोबाइल लेकर बच्चे पेरेंट्स के अनजाने में कई गेम्स खेलने लगते हैं या फिर कई बार कम उम्र में ही सोशल मीडिया पर एक्टिव हो जाते हैं. इससे बच्चे के संवेदनशील मन पर बेहद बुरा असर होता है. कोशिश करें कि बच्चे जब भी मोबाइल का उपयोग करें तो आप उनके आसपास ही बने रहें. इससे बच्चे को सीखने का भी मौका मिल जाएगा और आप भी निश्चिंत रह सकेंगे.

    Tags: Baby Care

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