गणेशोत्सव के बहाने होती थी आज़ादी की बातें, जानें गणेश चतुर्थी का ऐतिहासिक महत्व

कहते हैं जब भारत में पेशवाओं का शासन था, उस समय से इस पर्व को भव्य रूप से मनाया जाने लगा. पेशवा सवाई माधवराव के शासन में पुणे के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था.

News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 11:11 AM IST
गणेशोत्सव के बहाने होती थी आज़ादी की बातें, जानें गणेश चतुर्थी का ऐतिहासिक महत्व
भगवान गणेश
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Updated: September 11, 2018, 11:11 AM IST
शिवपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था. महाराष्ट्र में यह त्योहार सबसे ज़्यादा धूमधाम से मनाया जाता है जिसका पूरा श्रेय मराठा पेशवाओं को जाता है. कहते हैं जब भारत में पेशवाओं का शासन था, उस समय से इस पर्व को भव्य रूप से मनाया जाने लगा. पेशवा सवाई माधवराव के शासन में पुणे के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था. अंग्रेजों के शासन के समय गणेश उत्सव की भव्यता में कमी आने लगी, लेकिन यह परंपरा बनी रही.

ऐसे शुरू हुआ 10 दिन का गणेशोत्सव
दरअसल अंग्रेजों के शासन के दौरान भारतीय संस्कृति पर अंग्रेजी संस्कृति हावी हो रही थी. नौजवान अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूल रहे थे और क्योंकि ईसाई त्योहार भव्यता के साथ मनाए जा रहे थे तो लोगों के मन में अपने धर्म के प्रति नकारात्मकता और अंग्रेजी आचार-विचार के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था. इसे देखते हुए जननेता लोकमान्य तिलक ने सोचा कि हिंदू धर्म को कैसे संगठित किया जाए. लोकमान्य तिलक ने विचार किया कि श्रीगणेश ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो समाज के सभी स्तरों में पूजनीय हैं. वे यह भी जानते थे कि गणेशोत्सव एक धार्मिक उत्सव है और इसमें अंग्रेज शासक दखल नहीं दे सकेंगे.

गणेशोत्सव के बहाने जनता को किया एकजुट

इसे ध्यान में रखते हुए लोकमान्य तिलक ने पुणे में सन् 1893 में सार्वजनिक रूप से गणेशोत्सव मनाने की शुरूआत की. लोकमान्य तिलक ने बड़ी चतुराई से गणेशोत्सव को आजादी की लड़ाई के लिए एक प्रभावशाली माध्यम बनाया. इसे लेकर लोकमान्य तिलक ने पुणे में एक सभा का भी आयोजन किया. जिसमें यह तय किया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक गणेश उत्सव मनाया जाए. इसी बहाने इन 10 दिनों के इस उत्सव में हिंदुओं को एकजुट करने व देश को आजाद करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर भी चर्चा की जाती थी.

महाराष्ट्र के बाहर भी फैला ये उत्सव
धीरे-धीरे गणेशोत्सव पूरे महाराष्ट्र में सार्वजनिक रूप से मनाया जाने लगा. इसके बाद महाराष्ट्र से ही दूसरे राज्यों सें गणपति पूजा की संस्कृति का संचार हुआ, अब सामूहिक रूप के साथ साथ लोग अपने अपने घरों में गणेश उत्सव को मनाने लगें हैं और गणपति पूजा कर घर में संपन्नता और सौभाग्य की मंगल कामना करते हैं. भाद्रमास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को पूरे भारत में गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इस बार गणेश चतुर्थी के त्योहार की शुरुआत 13 सितम्बर से होगी. इस दिन लोग अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना करेंगे.

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