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कान्हा की नगरी में इस दिन से होगी होली की शुरुआत, लड्डू, फूल और लठ के रंग में रंगेगा बरसाना

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Updated: February 24, 2020, 4:59 PM IST
कान्हा की नगरी में इस दिन से होगी होली की शुरुआत, लड्डू, फूल और लठ के रंग में रंगेगा बरसाना
मथुरा, वृंदावन में इस परंपरा की शुरुआत द्वापर युग में श्रीकृष्ण की लीला की वजह से हुई थी.

कान्हा की नगरी में होली कार्यक्रम लड्डू होली के साथ 3 मार्च से शुरू होगा. 3 मार्च को अष्टमी के दिन बरसाना में लड्डू होली होगी.

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  • Last Updated: February 24, 2020, 4:59 PM IST
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पूरी दुनिया में मशहूर बरसाने की होली (Holi 2020) की तैयारियां अभी से ही शुरू हो चुकी है. कान्हा की नगरी मथुरा और बरसाने में होली के छोटे-बड़े उत्सव की शुरुआत हफ्ते दस दिन पहले से ही हो जाती है. देश में होली 10 मार्च (Holi 2020) को मनाए जाने की तैयारी है, लेकिन मथुरा, वृंदावन (Mathura holi 2020) में होली खेलने की शुरूआत 3 मार्च से ही हो जाएगी. इस साल अगर, आप भी होली के साथ कान्हा के रंग में रंगने के लिए बरसाने जाने की प्लानिंग कर रहे हैं. यहां की मशहूर लड्डू होली, लठमार होली, फाग महोत्सव और रंगभरी एकादशी का लुत्फ दोस्तों के साथ उठाना चाहते हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कि कहां इस बार कैसे होली मनाए जाने की तैयारियां हैं.

- होली कार्यक्रम लड्डू होली के साथ 3 मार्च से शुरू होगा. 3 मार्च को अष्टमी के दिन बरसाना में लड्डू होली होगी.

- 4 मार्च को लठमार होली का आयोजन किया जाएगा. इस बार गोकुल की गलियों में लठमार होली के लिए खास इंतजाम किए गए हैं. हर बार की तरह इस बार भी लठमार होली में देशी और विदेशी श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है.

- 5 मार्च को दशमी के दिन नन्दगांव में लठामार होली खेली जाएगी. इसके साथ ही 05 को गांव रावल में लठामार एवं रंग होली भी खेली जाएगी.



- 6 मार्च को मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इन कार्यक्रमों में कान्हा की रासलीला, होली के गीत और मिट्टी की छांव की खास झलक देखने को मिलेगी.

- 7 मार्च को गोकुल की गलियों में खास छड़ीमार होली महोत्सव का आयोजन किया गया है.

- 9 मार्च को को गांव फालैन में जलती हुई होली से पंडा का निकलना होगा.

 

मथुरा, वृंदावन में इस परंपरा की शुरुआत द्वापर युग में श्रीकृष्ण की लीला की वजह से हुई थी. मान्यता है कि कृष्ण जी अपने सखाओं के साथ कमर में फेंटा लगाए राधारानी और उनकी सखियों से होली खेलने पहुंच जाते थे और उनके साथ ठिठोली करते थे जिस पर राधारानी और उनकी सखियां ग्वाल वालों पर डंडे बरसाया करती थीं. ऐसे में लाठी-डंडों की मार से बचने के लिए ग्वाल वृंद भी लाठी या ढालों का प्रयोग करते थे. यहीं परंपरा आज तक चली आ रही है.

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First published: February 24, 2020, 4:55 PM IST
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