Holi 2021: क्या आप जानते हैं बरसाने की लट्ठमार होली के बारे में, यहां महिलाएं चलाती हैं पुरुषों पर लाठी

लट्ठमार होली में, महिलाएं एक लट्ठ ले जाती हैं और इसका इस्तेमाल उन पुरुषों को मारने के लिए करती हैं, जो उन पर रंग डालने की कोशिश करते हैं.

लट्ठमार होली में, महिलाएं एक लट्ठ ले जाती हैं और इसका इस्तेमाल उन पुरुषों को मारने के लिए करती हैं, जो उन पर रंग डालने की कोशिश करते हैं.

लट्ठमार होली (Lathmar Holi) एक स्थानीय उत्सव है. यह उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा (Mathura) के निकटवर्ती शहरों बरसाना (Barsana) और नंदगांव में होली से कुछ दिन पहले मनाया जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 18, 2021, 3:28 PM IST
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Lathmari Holi: होली (Holi 2021) का पर्व मुख्य रूप से रंगों का त्योहार है. इस दिन हिन्दू धर्म के लोग एकजुट होकर खुशियां मनाते हैं और एक दूसरे को प्यार के रंगों में डुबोकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं. क्या आपको पता है कि भारत में एक ऐसी भी जगह है जहां खुशियों के नाम पर महिलाएं होली के त्योहार में परुषों पर लाठी बरसाती हैं. इस रस्म का सभी पूरा आनंद उठाते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं बरसाने (Barsana) की लठमार होली के बारे में. लट्ठमार होली एक स्थानीय उत्सव है. यह उत्तर प्रदेश राज्य के मथुरा के निकटवर्ती शहरों बरसाना और नंदगांव में होली से कुछ दिन पहले मनाया जाता है. इस दृश्य का आनंद उठाने हर साल हजारों पर्यटक उस स्थान पर जुटते हैं और इस उत्सव का भरपूर मजा उठाते हैं.

लट्ठमार नाम से ही पता चलता है कि इसका अर्थ है-लट्ठ की होली. इस होली की रस्म को शहर के लिए मुख्य आकर्षण के रूप में देखा जाता है. यह उत्सव बरसाना के राधा रानी मंदिर में होता है. कथित तौर पर यह देवी राधा को समर्पित होली का एकमात्र मंदिर है. लठमार होली उत्सव एक सप्ताह से अधिक समय तक चलता है, जहां प्रतिभागी नृत्य करते हैं, गीत गाते हैं और मीठा- थंडाई पीते हुए रंग में डूब जाते हैं. आइए आपको बताते हैं इस लठमार होली के पीछे की पूरी परंपरा और इससे जुड़ी कुछ खास बातों के बारे में.

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कहां मनाई जाती है लट्ठमार होली
बरसाना और नंदगांव शहर में लठमार होली मनाई जाती है. बरसाना में राधा रानी मंदिर परिसर इस उत्सव का स्थल बन जाता है. पहले दिन नंदगांव के पुरुष बरसाना में होली खेलने आते हैं. दूसरे दिन बरसाना के पुरुष नंदगांव जाते हैं. इस त्योहार को एक प्रसिद्ध हिंदू कथा का मनोरंजन कहा जाता है, जिसके अनुसार, भगवान कृष्ण ने अपने प्रिय राधा की नगरी बरसाना का दौरा किया था. पौराणिक कथाओं के अनुसार श्रीकृष्ण ने राधा और उनकी सहेलियों को छेड़ा, जिसके बदले में उन्हें बरसाना से बाहर निकाल दिया गया था.

क्या है इसकी कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण राधा और अन्य गोपियों के साथ रंगों के इस त्योहार को खेलते थे. मथुरा से 42 किलोमीटर दूर एक गांव, राधा की जन्मस्थली बरसाना में श्री कृष्ण की विशेष रूचि थी और वो वृन्दावन से बरसाना, होली समारोह के लिए आते थें. तभी से चली आ रही प्रथा के अनुसार कृष्ण की भूमि नंदगांव के पुरुष आज भी बरसाना की महिलाओं के साथ होली खेलने आते हैं और श्री राधिकाजी के मंदिर पर अपना झंडा बुलंद करते हैं. लेकिन, आज के दौर में रंगों के बजाय वृन्दावन के पुरुषों को गोपियों द्वारा लाठी से अभिवादन किया जाता है. इसलिए, होली को यहां एक नया नाम मिलता है-लट्ठमार होली.



क्या है इसका महत्व

लट्ठमार होली में, महिलाएं एक लट्ठ ले जाती हैं और इसका इस्तेमाल उन पुरुषों को मारने के लिए करती हैं, जो उन पर रंग डालने की कोशिश करते हैं. होली के वास्तविक दिन से कुछ दिन पहले होने वाली इस घटना को देखने के लिए बहुत से लोग इकट्ठा होते हैं. यहां महिलाएं कुछ लोक गीत गाते हुए पुरुषों को पीटने की कोशिश करती हैं और राधा और कृष्ण को याद करती हैं. इस दिन पुरुष खुशी-खुशी लाठियों का वार सहन करते हैं और ये पुरुषों पर महिलाओं की जीत के प्रतीक की तरह काम करता है. मान्यताओं के अनुसार नंदगांव के पुरुष हर साल बरसाना शहर आते हैं और उनका अभिवादन वहां की महिलाओं की लाठी से किया जाता है. महिलाएं पुरुषों पर लाठी मारती हैं, जो जितना हो सके खुद को बचाने की कोशिश करते हैं. इसके लिए वो एक ढाल का इस्तेमाल भी करते हैं.

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पुरुष लेते हैं महिलाओं का रूप

बरसाने की लठमार होली के दौरान बदकिस्मत पुरुषों पर उत्साही महिलाओं द्वारा कब्जा कर लिया जाता है. तब पुरुषों को महिलाओं के कपड़े पहनने पड़ते हैं और सार्वजनिक रूप से नृत्य करना पड़ता है. यह उत्सव बरसाना में राधा रानी मंदिर के विशाल परिसर में होता है, जिसे देश का एकमात्र मंदिर कहा जाता है जो राधा जी को समर्पित है. लठमार होली उत्सव एक सप्ताह से अधिक समय तक चलता है, जहां कई पुरुष प्रतिभागी नृत्य करते हैं, गीत गाते हैं और अपने आप को रंग में डुबोते हैं. इस प्रकार लट्ठमार होली बरसाने में बड़ी ही धूमधाम से कई दिनों तक मनाई जाती है और वहां के स्थानीय लोग ही नहीं बल्कि दूर-दूर से लोग इस होली का मजा उठाने आते हैं.
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