'गुझिया' के बिना रंगों वाली होली है फीकी, जानें ये दिलचस्प बातें

होली पर गुझिया के बारे में जानें ये ख़ास बातें (Aloo Ki Gujiya Recipe)

होली पर गुझिया के बारे में जानें ये ख़ास बातें (Aloo Ki Gujiya Recipe)

On Holi 2021 Know Interesting Facts About Gujiya- बात अगर होली की हो तो गुझिया या गुजिया (Gujia) को कैसे भूला जा सकता है. थोड़े बहुत बदलाव के साथ देश के कई हिस्सों में गुझिया आपको दिख जाएगी...

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 27, 2021, 5:21 PM IST
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(विवेक कुमार पांडेय)

On Holi 2021 Know Interesting Facts About Gujiya-होली का सप्ताह चल रहा है और मन में मस्ती भी लोगों के खूब ही छा रही है. यह बात जरूर है कि कोरोना महामारी के कारण रंग इस बार भी फीका रहेगा. पिछली बार से ज्यादा बे-रंग होली इस बार की हो सकती है क्योंकि आंकड़े डराने वाले आ रहे हैं. लेकिन, घर के अंदर रह कर खाने-पीने का आनंद तो लिया ही जा सकता है. सबसे सेफ होली होगी कि घर में ही बढ़िया खाया-पीया जाए. तो बात अगर होली की हो तो गुझिया या गुजिया (Gujia) को कैसे भूला जा सकता है.

देशभर में अलग-अलग नाम से खाई जाती है

थोड़े बहुत बदलाव के साथ देश के कई हिस्सों में गुझिया आपको दिख जाएगी. कई स्थानों पर (खासकर दक्षिण भारत में) दीपावली के दौरान यह खाई जाती है. लेकिन, यूपी-बिहार में होली के दौरान इसका खासा महत्व है. इसे यूपी में गुझिया, बिहार में पेडकिया और मराठी में करंजी कहते हैं. साउथ इंडिया में भी इसके अलग-अलग स्थानीय नाम हैं. साथ ही इसकी प्रिपरेशन भी स्थान के हिसाब से बदलती रहती है.
गुजिया का सामाजिक महत्व भी है

यह सिर्फ खाने-खिलाने के काम नहीं आती है बल्कि सामाजिक भाई-चारे का भी प्रतीक है. इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हम जब छोटे थे तो मोहल्ले में दिन बांट कर गुझिया बना करती थी. क्योंकि, महिलाएं एक दूसरे के घर जाकर गुजिया बनाने में मदद करती थीं. इसके साथ ही होली के एक सप्ताह पहले से और कम से कम 10 दिन बाद तक नाश्ते में गुजिया ही होती थी. बड़े-बड़े बर्तनों में भर कर रखी जाती थी.

जगह के हिसाब से जायका



गुझिया को आप दो कोने वाल समोसा भी कह सकते हैं. पहले के जमाने में इसे हाथ से ही बनाया जाता है लेकिन कई सालों से इसके लिए विशेष सांचा आता है. मैदे में खोया या सूजी या फिर दोनों का मेल इसमें भरा जाता है. इसकी फिलिंग्स में ढेर सारा ड्राई फ्रूट भी डाला जाता है. कई स्थानों पर गुजिये के चाशनी में जाल कर परोसा जाता है लेकिन यूपी-बिहार में यह सूखी ही खाई जाती है. इसे डीप फ्राई कर के तैयार किया जाता है.

इसके कुछ साथी भी हैं

घर में अगर गुझिया बन रही हो तो दो और खास साथी इसके साथ आ ही जाते हैं. एक है नमक पारा और दूसरा शक्कर पारा. गुझिया के ही बचे हुए मैदे से इसे बनाया जाता है. भई 15-20 दिनों के लिए तो मेरी नाश्ते की प्लेट इन्हीं तीनों चीजों से भरी रहती थी बचपन में. अब भी कोशिश होती है कि ऐसा ही हो जाए. तो आप इस होली कोरोनी सुरक्षा पर ध्यान दीजिए और घर पर कुछ अच्छा बना कर त्योहार का आनंद लीजिए...थोड़ा अबीर भी लगा लीजिएगा .... हैप्पी होली !
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