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Holi 2022 Special Poems: 'जब खेली होली नंद ललन...' होली के जश्न में घोलें 'साहित्य का रंग', पढ़ें ये कविताएं

होली स्पेशल कविताएं (Holi special poems)

होली स्पेशल कविताएं (Holi special poems)

Holi 2022 Poems in Hindi: इस साल 18 मार्च यानी आज होली (Holi) का त्योहार मनाया जा रहा है. इस पर्व के बारे में कई कवियों ने बहुत सुंदर कविताएं लिखी हैं. अवसर पर मशहूर कवियों की चुनिंदा रचनाएं पढ़ें.

Holi 2022 Poems in Hindi: होली (Holi) 18 मार्च को मनाई जाएगी. रंगों का त्योहार लोगों के जीवन में खुशियां और नई आशा लेकर आता है. होली का पर्व कई लोगों को पसंद होता है. कई सारे कवियों ने भी इसका बहुत खूबसूरती से बखान किया है. खूबसूरती से शब्दों को पिरोते हुए होली के बारे में लिखा है और कई ऐसी रचनाएं रच दीं, जिन्हें पढ़ कर आपको भी बहुत अच्छा लगेगा.

होली (Holi) के अवसर पर मशहूर कवियों की चुनिंदा रचनाएं पढ़ें. आप फेसबुक पर भी इन्हें पोस्ट कर सकते हैं व अपने दोस्तों को मैसेज के जरिए भी भेज सकते हैं.

Holi 2022- होली की कविताएं

होली- भारतेंदु हरिश्चंद्र

कैसी होरी खिलाई।
आग तन-मन में लगाई॥
पानी की बूँदी से पिंड प्रकट कियो सुंदर रूप बनाई।
पेट अधम के कारन मोहन घर-घर नाच नचाई॥
तबौ नहिं हबस बुझाई।
भूँजी भाँग नहीं घर भीतर, का पहिनी का खाई।
टिकस पिया मोरी लाज का रखल्यो, ऐसे बनो न कसाई॥
तुम्हें कैसर दोहाई।
कर जोरत हौं बिनती करत हूँ छाँड़ो टिकस कन्हाई।
आन लगी ऐसे फाग के ऊपर भूखन जान गँवाई॥
तुन्हें कछु लाज न आई।

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होली- हरिवंशराय बच्चन

यह मिट्टी की चतुराई है,
रूप अलग औ’ रंग अलग,
भाव, विचार, तरंग अलग हैं,
ढाल अलग है ढंग अलग,

आजादी है जिसको चाहो आज उसे वर लो।
होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर को!

निकट हुए तो बनो निकटतर
और निकटतम भी जाओ,
रूढ़ि-रीति के और नीति के
शासन से मत घबराओ,

आज नहीं बरजेगा कोई, मनचाही कर लो।
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो!

प्रेम चिरंतन मूल जगत का,
वैर-घृणा भूलें क्षण की,
भूल-चूक लेनी-देनी में
सदा सफलता जीवन की,

जो हो गया बिराना उसको फिर अपना कर लो।
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!

होली है तो आज अपरिचित से परिचय कर लो,
होली है तो आज मित्र को पलकों में धर लो,
भूल शूल से भरे वर्ष के वैर-विरोधों को,
होली है तो आज शत्रु को बाहों में भर लो!

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जब खेली होली नंद ललन- नज़ीर अकबराबादी

जब खेली होली नंद ललन हँस हँस नंदगाँव बसैयन में।
नर नारी को आनन्द हुए ख़ुशवक्ती छोरी छैयन में।।
कुछ भीड़ हुई उन गलियों में कुछ लोग ठठ्ठ अटैयन में ।
खुशहाली झमकी चार तरफ कुछ घर-घर कुछ चौप्ययन में।।
डफ बाजे, राग और रंग हुए, होली खेलन की झमकन में।
गुलशोर गुलाल और रंग पड़े हुई धूम कदम की छैयन में।

जब ठहरी लपधप होरी की और चलने लगी पिचकारी भी।
कुछ सुर्खी रंग गुलालों की, कुछ केसर की जरकारी भी।।
होरी खेलें हँस हँस मनमोहन और उनसे राधा प्यारी भी।
यह भीगी सर से पाँव तलक और भीगे किशन मुरारी भी।।
डफ बाजे, राग और रंग हुए, होली खेलन की झमकन में।
गुलशोर गुलाल और रंग पड़े हुई धूम कदम की छैयन में।।(साभार-कविता कोश)

Tags: Holi, Lifestyle, Literature

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