CSIR कोरोना संक्रमित लोगों को खिला रही मुलेठी, क्या इसमें छिपा है इलाज?

CSIR कोरोना संक्रमित लोगों को खिला रही मुलेठी, क्या इसमें छिपा है इलाज?
वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने आयुष विभाग के साथ मिलकर मुलेठी का कोविड रोगियों पर परीक्षण आरंभ कर दिया है.

भारतीय वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन ने अपनी हर्बल चिकित्सा (Herbal Treatment) में मुलेठी (Mulethi) के इस्तेमाल से इस बीमारी पर काबू पाया है.

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दुनिया के कई देश अभी भी कोरोना वायरस (Coronavirus) की महामारी से जूझ रहे हैं लेकिन चीन (China) ने इस पर काबू पा लिया है. आखिर ऐसा क्या किया चीन ने, यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है. भारतीय वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन ने अपनी हर्बल चिकित्सा (Herbal Treatment) में मुलेठी (Mulethi) के इस्तेमाल से इस बीमारी पर काबू पाया है. इसलिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने आयुष विभाग के साथ मिलकर मुलेठी का कोविड-19 (Covid-19) रोगियों पर परीक्षण आरंभ कर दिया है. देश के कई केंद्रों में ये परीक्षण शुरू हो चुके हैं. आपको बता दें कि मुलेठी के इस्तेमाल को लेकर कई तथ्य सामने आए हैं.

हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार 2003 में जब सार्स शुरू हुआ था तो फ्रैंकफर्ट यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल वायरोलॉजी का एक शोध पत्र लांसेट में प्रकाशित हुआ था, जिसमें मुलेठी को सार्स वायरस के खिलाफ प्रभावी पाया गया था. वहीं फरवरी में कुछ रिपोर्ट सामने आई थीं कि चीन ने कोविड उपचार में अपनी जिस परंपरागत दवाओं का इस्तेमाल किया था, उसमें मुलेठी भी शामिल थी. कोविड के 87 फीसदी रोगियों को यह दवा प्रदान की गई जिससे वह ठीक हो गए. सीएसआईआर के वैज्ञानिक डा. राम विश्वकर्मा के अनुसार चीन में कोरोना संकट के दौरान मुलेठी की खपत में बढ़ोतरी देखी गई थी. उम्मीद है कि यह दवा कोविड उपचार में उपयोगी साबित हो सकती है.

चार फॉर्मूलों को परखा जा रहा
सीएसआईआर (CSIR) की प्रयोगशाला में आईआईआईएम जम्मू के निदेशक डा. राम विश्वकर्मा के अनुसार मुलेठी समेत आयुष के चार फॉर्मूलों को साइनटिफिक नजरिए से परखा जा रहा है. इनके नतीजों से तय होगा कि यह दवा कितनी उपयोगी निकलती है. आयुष मंत्रालय के सलाहकार मनोज नेसारी ने कहा कि आयुर्वेद में मुलेठी का इस्तेमाल सूखी खांसी के लिए होता है. कोविड में सूखी खांसी होती है.



नेसारी ने कहा कि मुलेठी मूल रूप से भारत की दवा है जिसका वर्णन चरक संहिता में मिलता है. वहीं चीनी परंपरागत चिकित्सा में बाद में इसका इस्तेमाल हुआ. शुरुआती अध्ययन इसके उपयोगी होने की ओर संकेत करते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे बहुकेंद्रीय क्लिनिकल ट्रायल शुरू हो चुके हैं. अगले दो महीनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह कितना उपयोगी साबित हो सकता है.
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