सामान्य योग से ऐसे आसान होता है अयंगर योग, जानें इसके फायदे


Updated: March 3, 2017, 12:02 PM IST
सामान्य योग से ऐसे आसान होता है अयंगर योग, जानें इसके फायदे
Image Source: News18

Updated: March 3, 2017, 12:02 PM IST
नई दिल्ली. योग एक ऐसा वैज्ञानिक प्रमाणिक व्यायाम का तरीका है जिसके लिए न तो ज्यादा साधनों की जरूरत होती है और न ही अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है. इसलिए पिछले कुछ सालों से योगा की लोकप्रियता और इसके नियमित अभ्यास करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. योगासन ऐसी चीज़ है जिसे अमीर-गरीब, बूढ़े-जवान, सबल-निर्बल सभी स्त्री-पुरुष कर सकते हैं. यही नहीं आजकल लोग टीवी और यूट्यूब के जरिए भी घर पर अपने खाली समय में योग का अभ्यास करते हैं. शरीर और मन को तरोताजा करने, खोई हुई शक्ति को वापस पाने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्व होता है. लेकिन योग का अभ्यास करना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं है. ज्यादातर आसन मुश्किल होते हैं और उन्हें सही तरीके से करने के लिए कई साल के अभ्यास की जरूरत होती है. ऐसे में अयंगर योग ज्यादा उपयोगी हो सकता है. अयंगर को समान्य योग से आसान माना जाता है.

अयंगर योग के वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री चरण फाइक बिरिया का कहना है कि अयंगर योग को सामान्य योग का मॉडर्न रूप कहा जा सकता है. गुरु अयंगर ने सभी तरह के योग का अभ्यास किया और साथ ही मुश्किल योग को आसान बनाने के तरीके खोजे. ऐसे तरीके जिसे सभी तरह के लोग कर पायें और योग करने के प्रयास में खुद को चोट न पहुंचाएं. इसके अलावा गुरू अयंगर ने योग को आसान बनाने के लिए कई तरह तकनीक और सहायक चीजों की खोज की. इस खास तकनीक और की मदद से विकलांग, बीमार या कमजोर व्यक्ति भी आसानी से योग सीख सकते हैं. यही नहीं इस तकनीक से सही तरह से योग कर सकते हैं और योग का फायदा भी उठा सकते हैं.

 

योग ने बदला इनका जीवन

बीजेपी के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी की बेटी निवेदिता जोशी दिल्ली में अयंगर योग सेंटर चलाती हैं. यहां वो उन लोगों का इलाज करती हैं जो अपने निरोगी होने की सारी उम्मीद खो चुके होते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि कई साल पहले निवेदिता भी ऐसा ही सोचा करती थी. जब निवेदिता 15 साल की थीं तो उन्हें अचनाक स्लिप डिस्क हो गया. करीब 9 साल तक उन्होंने कई डॉक्टरों से इलाज कराया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. उनकी हालत बिगड़ती चली गई, यहां तक की बिस्तर से उठना भी मुश्किल हो गया. उन्हें व्हीलचेयर का इस्तेमाल करना पड़ा.

Image Source: News18
Image Source: News18


इस मुश्किल घड़ी में उन्हें बी.के.एस आयंगर के बारे में पता चला. बी.के.एस अयंगर दुनिया के सबसे प्रख्यात योग गुरुओं में से एक थे. उनका कहना है कि जैसे वो गुरु अयंगर के पास पहुंची, उन्होंने,  देखते ही उनका रोग समझ लिया. अंयगर ने उनका योग साधना के जरिए इलाज शुरू किया और दो हफ्ते के अंदर असर दिखने लगा. कुछ ही सालों में वो पूरी तरह ठीक हो गईं. इसके बाद निवेदिता ने योग को ही अपना जीवन समर्पित कर दिया.

क्या है अयंगर योग

अयंगर योग का निर्माण स्वर्गीय योग गुरु बी.के.एस. अयंगर ने किया था. उन्होंने कई शोध के बाद इस योग के तरीकों का आविष्कार किया था. लोकप्रियता की वजह से इस योग का नाम अयंगर योग पड़ गया. अयंगर योग के आसन और प्राणायाम का अभ्यास करने के लिए उसके मुद्रा पर ध्यान देना सबसे ज़रूरी होता है. योग गुरु बी.के.एस. अयंगर ने आसनों को सही तरह से करने के लिए कुछ सहायक चीजों का आविष्कार किया था जैसे, ब्लॉक, बेल्ट, रस्सी और लकड़ी की बनी चीजें आदि. योग को सही मुद्रा में करने के लिए व्यक्ति के शरीर का संरचनात्मक ढांचा सही रूप में होना ज़रूरी होता है. उनका मानना था कि अगर आसन को सही तरह से किया जाए तो शरीर और मन को नियंत्रण में रखा जा सकता है. जिससे शरीर स्वस्थ तो रहता ही है साथ ही बीमारियों से लड़ने की क्षमता शरीर में बढ़ जाती है. अयंगर योग में 200 योग आसन और 14 प्राणायम हैं, जो क्रमानुसार आसान से जटिल होते जाते हैं.

दूसरे योग से कैसे अलग है अयंगर योग

खास कुशलता की जरूरत नहीं : दूसरे योग के तुलना में अयंगर योग को करने के लिए ज़्यादा कुशलता की ज़रूरत होती है. इन आसनों को करने के लिए
शरीर में ज्यादा फ्लेक्सिबीलिटी और तंदुरूस्ती की ज़रूरत होती है.

आसन की अवधि लंबी : दूसरे आसनों के तुलना में इन आसनों को देर तक करने पर ही शरीर को पूरी तरह से इससे लाभ मिल सकता है.

हर आसन का है खास महत्व : दूसरे योग में आसनों का अभ्यास शुरू करते ही व्यक्ति प्राणायाम भी करने लगते हैं. लेकिन अयंगर योग में यह
संभव नहीं है. जब तक एक इंसान आसनों के तरीकों को अच्छी तरह से सीख न लें तब तक वो प्राणायम नहीं कर सकता है क्योंकि प्राणायाम करने के लिए सांसों पर नियंत्रण होने के साथ देर तक बैठने की भी ज़रूरत होती है.

सहायक चीजों के आविष्कार : योग को सही तरीके से करने के लिए गुरु जी ने कुछ सहायक चीजों जैसे ब्लॉक, बेल्ट, रस्सी, लकड़ी की कुछ चीजों को
बनाया था जो अयंगर योग को दूसरे योग से अलग करता है. अयंगर योग में सही तरह से आसनों को करने पर जोर दिया जाता है जिससे शरीर को हर अंग को
इससे लाभ मिल सके.

आसनों का सही क्रम : योग के अलग-अलग फॉर्म के आसनों का क्रम भी अलग-अलग ही होता है. हर आसन के क्रम का शरीर के अंग के साथ
संबंध होता है इसलिए आसनों को सही क्रम से ही करना ज़रूरी होता है, नहीं तो शरीर पर इसका बूरा प्रभाव पड़ता है. योग गुरु बी.के.एस. अयंगर का मानना था कि परिवर्तन व्यक्ति में बदलाव लाने में मदद करता है.
First published: February 18, 2017
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर