ध्यान खुशियों से भरा जीवन जीने में कैसे बनता है सहायक, हार्टफुलनेस में मिलेंगे सारे जवाब

मात्र 18 साल की उम्र में ही कमलेश पटेल हार्टफुलनेस से जुड़ गए थे और ध्यान और योग के बारे दीक्षा हासिल करने लगे.

मात्र 18 साल की उम्र में ही कमलेश पटेल हार्टफुलनेस से जुड़ गए थे और ध्यान और योग के बारे दीक्षा हासिल करने लगे.

कमलेश पटेल को दाजी के नाम से भी जाना जाता है, जिनके मार्गदर्शन में हार्टफुलनेस के 160 देशों में कुल 5 हजार से भी ज्यादा सेंटर्स खोले जा चुके हैं, जहां पर हजारों-लाखों कॉलेज स्टूडेंट्स और 1 लाख से ज्यादा प्रोफेशनल्स मेडिटेशन कर रहे हैं.

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हार्टफुलनेस एक ऐसी संस्थान है, जो ध्यान और योग के जरिए लोगों की लाइफस्टाइल को बदलने का कार्य कर रही है. इसकी स्थापना श्रीरामचंद्र मिशन के नाम से सन् 1945 में हुई थी, जिसका उदेश्य शांति, खुशी और बेहतर स्वास्थ प्रदान करना था. इसके मार्गदर्शक कमलेश डी पटेल हैं. हार्टफुलनेस संस्थान से भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु और देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जैसे कई दिग्गज लोग जुड़े हैं. बता दें कि मात्र 18 साल की उम्र में ही कमलेश पटेल हार्टफुलनेस से जुड़ गए थे और ध्यान और योग के बारे दीक्षा हासिल करने लगे. बाद में वे खुद लोगों को इसके बारे में जागरूक करने लगे. कमलेश पटेल को दाजी के नाम से भी जाना जाता है, जिनके मार्गदर्शन में हार्टफुलनेस के 160 देशों में कुल 5 हजार से भी ज्यादा सेंटर्स खोले जा चुके हैं, जहां पर हजारों-लाखों कॉलेज स्टूडेंट्स और 1 लाख से ज्यादा प्रोफेशनल्स मेडिटेशन कर रहे हैं. ऐसे में हमने हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक कमलेश डी पटेल यानी दाजी से बातचीत की और उनके कार्यों के बारे में जाना.

प्रश्न 1- ध्यान हमें खुशियों से भरा उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने में कैसे सहायक होता है? ऐसा क्यों है कि हर उम्र और परिवेश के लोग ध्यान करना सीख रहे हैं?

उत्तर- हर व्यक्ति जीवन में खुशियां, संतुष्टि और प्रेम पाना चाहता है. ये खुशियां, संतुष्टि और प्रेम किससे आते हैं? शायद इस समय आपके लिए इसका उत्तर हो, आरामदायक जीवनशैली, अच्छा स्वास्थ्य, संतुष्टिदायक सम्बन्ध और अच्छी आजीविका. या हो सकता है कि आप अपने बच्चों के लिए सुरक्षित और उद्देश्यपूर्ण जीवन की कामना कर रहे हों. लेकिन जब हमारे पास यह सब होता है तो भी हम जानते हैं कि हमें आंतरिक शांति और संतुष्टि के भाव के बिना सच्ची ख़ुशी नहीं मिल सकेगी. वास्तव में प्राचीन काल से ही बुद्धिमान लोग जानते रहे हैं कि सच्ची ख़ुशी बाहरी वस्तुओं या लोगों पर निर्भर नहीं होती. व्यवसाय में सफलता, आनंदपूर्ण पारिवारिक जीवन, अच्छा बैंक बैलेंस, अच्छे दोस्त, खुशियां, सम्पत्ति आदि का होना अच्छा है लेकिन इनसे स्थायी ख़ुशी नहीं मिलती. क्यों? क्योंकि उनके जाते ही खुशियां भी चली जाती हैं.



क्या यह जीवन जीने का समझदारी भरा तरीका है कि हम कितने खुश या दुखी रहेंगे यह दूसरे तय करें? आंतरिक रूप से अधिकतर लोग जानते हैं कि खुशियों के बाहरी स्रोत के साथ किसी स्थायी और अर्थपूर्ण चीज का समन्वय बना लेना जरूरी है. परिणामस्वरूप हमने स्थायी ख़ुशी की खोज में और आंतरिक तथा बाहरी जीवन के बीच तालमेल बनाने के लिए स्वयं के भीतर गहराई में जाना सीख लिया है. इसके लिए हमें ध्यान करने की जरूरत है. इस आंतरिक और बाह्य के संतुलन के लिए ध्यान सबसे सरल और असरदार तरीका है.
प्रश्न 2- खुशियां और संतुष्टि पाने में ध्यान किस तरह मदद करता है? इससे हमारे जीवन में क्या बदलाव आता है?

उत्तर- ध्यान की सबसे सामान्य परिभाषा है किसी एक बात पर लगातार विचार करना और हम सब के लिए यह बहुत आम बात है. चाहे हम अपने व्यक्तिगत लक्ष्य पर ध्यान रखें जैसे- हमारा व्यवसाय, धन-सम्पत्ति, प्रेम, या जैसे बच्चे एक खिलौने पर ध्यान टिकाये रखते हैं, अंतर केवल लक्ष्य का है. ये सभी सांसारिक लक्ष्य हैं. ये वे चीजें नहीं हैं जिनके लिए हम अपने ध्यान का नियमित अभ्यास करते हैं. जब हम जागरूक होकर ध्यान का अभ्यास जारी रखते हैं, हम कुछ विशेष उद्देश्य को लेकर बैठते हैं जैसे तनाव से शान्ति की ओर, असंतोष से संतुष्टि की ओर, दुविधा से स्पष्टता की ओर बढ़ते रहें. हमारे जीवन में जो बदलाव आवश्यक हैं ध्यान उनके लिए हमें संवेदनशील बनाता है.

ध्यान में गहरे उतरने पर हमारे भीतर के स्थिर केंद्र का पता चलता है और यह शोरगुल के बीच में भी शांत और सक्रिय बने रहने में मदद करता है. भीतर अप्रभावित बने रहने से, शांत बने रहने से जीवन का अर्थ बदल जाता है. ध्यान की सहायता से हम अपनी कमज़ोरियां पहचानने लगते हैं. हम ध्यान का अभ्यास सीखते हैं और रोजाना की गतिविधियों को पूरा करते हुए जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ले आते हैं.

प्रश्न 3- हार्टफुलनेस क्या है? हम विभिन्न देशों में आपकी उपस्थिति के बारे में जानना चाहते हैं.

उत्तर- हार्टफुलनेस एक ऐसी जीवनचर्या है जो हमें अपनी आंतरिक भावनाओं और प्रेरणाओं से मार्गदर्शन पाना सिखाती है. हमारा सारा जीवन भावनाओं और प्रेरणाओं से मार्गदर्शित होता है और हृदय यही कार्य करता है. जब हम अपने भीतर से आती हुई दिल की उन बातों को सुनना और प्रेरणाओं को समझना सीख जाते हैं तो हम बार बार हृदय की बातों को सुनकर अपने जीवन के मालिक बन जाते हैं. हृदय पर ध्यान करते हुए, मन के साथ हृदय के सूक्ष्म समन्वय की प्रक्रिया पूरी होती है. इसीलिए हम इस प्रक्रिया को हार्टफुलनेस कहते हैं. हार्टफुलनेस, ध्यान और जीवनचर्या से सम्बंधित अभ्यासों का एक समूह है जिसका उद्गम राजयोग की प्राचीन परम्पराओं से हुआ है. मूल रूप से इसे सहज मार्ग (यानी प्राकृतिक मार्ग) के नाम से जाना जाता था और यह बीसवीं सदी की शुरुआत में आरम्भ हुआ. हार्टफुलनेस के सर्वप्रथम संस्थान श्री रामचंद्र मिशन की स्थापना भारत में 1945 में की गई.

हार्टफुलनेस, हमारी जीवनशैली को आधुनिक संसार में रहते हुए और इसकी सभी जिम्मेदारियां और कर्तव्यों को निभाते हुए स्थायी रूप से संतुलन की ओर ले जाता है. आध्यात्मिकता की राह में ये सरल, असरदार और अनुभवजन्य हृदय-आधारित अभ्यास -प्रेम, संतुष्टि, समानुभूति, साहस, उत्साह, सहानुभूति, उदारता और स्पष्टता जैसे हार्दिक गुणों को बढ़ाते हैं. हार्टफुलनेस अभ्यासों से हृदय की असीम बुद्धिमत्ता का उपयोग करने की क्षमता बढ़ती है जो हमें सही-गलत का अंतर समझने, समझदारी से चुनाव करने और जीवन के प्रवाह को संभव और ख़ुशी से स्वीकार करने में मदद करती है. इससे भावनात्मक, सामाजिक और आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता सहजता और सरलता के साथ बढ़ती है.

हार्टफुलनेस केंद्र और आश्रम हमारे समाज की धुरी हैं. वे ऐसा वातावरण उपलब्ध कराते हैं जहां सभी लोग हृदय के आंतरिक जीवन का अन्वेषण कर सकते हैं. वर्तमान समय में पूरे विश्व में लगभग 5000 केंद्र (हार्टस्पॉट्स) और 3000 आश्रम (रिट्रीट सेन्टर) हैं जहां लोग ध्यान करने के लिए एकत्र होते हैं. आज संसार के 140 से अधिक देशों में हमारे लगभग 14000 प्रशिक्षक (सर्टिफाइड ट्रेनर) और लाखों अभ्यासी हैं. हार्टफुलनेस प्रशिक्षक (ट्रेनर) के साथ सीखने के सत्र विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध हैं जिनमें हमारा अपना एप HeartsApp भी एक है और पिछले साल जब कोविड-19 के कारण अभ्यास करने वाले इन केन्द्रों पर एकत्र नहीं हो सके, तब इस HeartsApp की मदद से वर्चुअल ग्रुप के जरिए हजारों लोग हमसे जुड़े.

प्रश्न 4- आज की बदलती जीवनशैली में हमारे युवा किस तरह हार्टफुलनेस अभ्यास कर सकते हैं? कृपया स्पष्ट करें.

उत्तर- जैसा मैंने पहले कहा, चाहे हम युवा हों या वृद्ध, हम सब खुशियां, सफलता और अपनी क्षमता को उच्चतम स्तर तक बढ़ाना चाहते हैं. यह एक ग़लतफ़हमी है कि ध्यान करना केवल वृद्ध लोगों के लिए है. असल में आप जितनी जल्दी ध्यान शुरू करेंगे, अपने जीवन में संतुलन और संतुष्टि पाना तथा जीवन का उद्देश्य पाना उतना ही आसान होगा. बच्चों को हम रिलैक्सेशन और आंतरिक जुड़ाव के अभ्यास सिखाते हैं और नैतिक जागरूकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, आत्मविश्वास और प्रभावी संवाद का कौशल विकसित करने के लिए अभ्यासों से भरपूर एक सम्पूर्ण पाठ्यक्रम प्रस्तुत करते हैं. 15 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए हम हार्टफुलनेस अभ्यासों का पूरा समूह प्रस्तुत करते हैं जिसमें ध्यान, सफाई (आंतरिक नवीनीकरण) की विधि के अतिरिक्त अन्य कई छोटे छोटे अभ्यास और जीवनशैली से सम्बंधित सलाहें शामिल हैं.

खुशियां और उत्कृष्टता पाने के लिए और अपनी क्षमता को उच्चतम स्तर तक बढ़ाने के लिए आंतरिक संतुलन पहला कदम है. ध्यान इसे संभव बनाता है, विशेषकर जब यह प्राणाहुति से युक्त हो जो हार्टफुलनेस की एक अनूठी खासियत है. मन मननशील तभी हो सकता है जब वह नियमित हो और ध्यान ही इसे नियमित बना सकता है.

हार्टफुलनेस, युवाओं के लिए सरल और अत्यंत लाभदायी अभ्यासों का समूह है जो पिछले 30 वर्षों में हार्टफुलनेस एजुकेशन ट्रस्ट की मदद से पूरे भारत के छात्रों के लिए अधिक से अधिक उपलब्ध होता जा रहा है. हम स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से ध्यान के वर्कशॉप और पाठ्यक्रम संचालित करते आ रहे हैं जिनमें स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक के छात्रों और शिक्षकों के लिए विभिन्न कार्यक्रम/पाठ्यक्रम और तृतीयक (Tertiary) छात्रों एवं शिक्षकों के लिए हार्टफुल कैंपस कार्यक्रम शामिल हैं. ये कार्यक्रम हमारे देश और संसार के अन्य भागों के युवाओं में सुसंस्कृत होने के गुण बढ़ा रहे हैं. ये अभ्यास व्यावहारिक हैं जहां छात्र और शिक्षक दोनों ही रिलैक्सेशन, मनन और ध्यान करना सीखते हैं.

सोशल मीडिया (यूट्यूब, फेसबुक और इंस्टाग्राम) में भी हमारे कई वीडियो हैं जो हर उम्र के लोगों के लिए उपलब्ध हैं. इनमें से कई उनके लिए उपयोगी विषयों पर हैं, जैसे एकाग्रता बढ़ाना, रात में अच्छी नींद सोना, संबंधों को बेहतर बनाना, प्रभावी संवाद, ध्यान करने का उद्देश्य और लाभ आदि, जिन्हें समझना बहुत आसान है.

प्रश्न 5- श्री रामचंद्र मिशन हार्टफुलनेस इंस्टिट्यूट कैसे बना?

उत्तर- हार्टफुलनेस के सर्वप्रथम मार्गदर्शक फतेहगढ़ के श्री रामचंद्र (1873-1931) थे जिन्हें उनके परिवारजन और साथी लालाजी के नाम से जानते थे. उन्होंने लम्बे समय से विस्मृत प्राणाहुति (ट्रांसमिशन) की कला की खोज की. उनके शिष्य, शाहजहांपुर के श्री रामचंद्र (1899-1983), जिन्हें बाबूजी के नाम से जाना जाता है, लालाजी के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी बने. बाबूजी ने हार्टफुलनेस की तकनीकों को और परिमार्जित किया और सन 1945 में अपने मार्गदर्शक के सम्मान में श्री रामचंद्र मिशन नामक अलाभकारी संस्था की स्थापना की. बाद में बाबूजी के उत्तराधिकारी और श्री रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष के रूप में श्री पार्थसारथी राजगोपालाचारी (1927-2014) का चयन किया गया जिन्हें चारीजी के नाम से जाना जाता है. चारीजी ने मिशन की गतिविधियों का विश्व भर में प्रसार किया जिनमें युवाओं की शिक्षा और निशुल्क स्वास्थ्य केंद्र जैसे मानव-सेवा के कार्यों के अतिरिक्त विश्व के अनेक भागों में ध्यान केन्द्रों की स्थापना शामिल है.

2015 में हमने इन परखी और जांची हुई ध्यान की विधियों को हार्टफुलनेस के अंतर्गत लोगों के बड़े समूहों तक पहुंचाना शुरू किया जैसे व्यावसायिक संस्थान, सरकारी विभाग, गैरसरकारी संगठन, स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी, गांव, आस-पड़ोस, चिकित्सा और कानून जैसे विषयों के लोग, ताकि वे अपने अनुभवों से सीख सकें और अपने जीवन में अपने ही भीतर से सकारात्मक परिवर्तन ला सकें. आज विश्वभर में उन लोगों द्वारा हार्टफुलनेस अपनाया जा रहा है जो अपने जीवन के अनुभवों को हृदय पर ध्यान करने जैसी सरल विधियों द्वारा समृद्ध करना चाहते हैं. हजारों स्कूल और कॉलेजों में हार्टफुलनेस ध्यान का प्रशिक्षण चल रहा है और विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों तथा गैरसरकारी एवं सरकारी कार्यालयों से जुड़े 100,000 से अधिक व्यवसायी (प्रोफेशनल) हार्टफुलनेस ध्यान कर रहे हैं. हार्टफुलनेस योग अब भारत सरकार के द्वारा मान्यता प्राप्त योग प्रशिक्षण केंद्र है.

प्रश्न 6- लोग अक्सर योग और ध्यान को आध्यात्मिक अभ्यासों से जोड़ते हैं और उन्हें हिंदू या बौद्ध धर्मों से संबद्ध कर देते हैं. तो धर्म और अध्यात्म में क्या अंतर है?

उत्तर- विश्व के सबसे बड़े धर्म उनकी स्थापना करने वाले शिक्षकों के गुजर जाने के बाद उत्पन्न हुए. हमने उनकी शिक्षाओं को धर्म मान लिया. उदाहरण के लिए अगर हम बौद्ध धर्म को देखें, क्या बुद्ध बौद्ध धर्मावलम्बी थे? इसी तरह क्या क्राइस्ट ईसाई थे या पैगम्बर मुहम्मद मुस्लिम थे? हमने उनकी शिक्षाओं को धर्म का नाम दे दिया और आज हम सोचते हैं कि कोई एक धर्म दूसरे से बेहतर है. वास्तव में धर्म का उद्देश्य हमें अपने स्रोत के साथ, अपनी आत्मा के साथ फिर से जोड़ना है. योग में हम इसे- युज्यतेअनेन इति योगः कहते हैं जिसका अर्थ है- जो जोड़ता है, उसे योग कहते हैं. योग और धर्म का उद्देश्य हमें उच्चतर अस्तित्व से जोड़ना है. व्यक्तिगत आत्मा सर्वोच्च अस्तित्व (परमात्मा) से मिलती है.

कल्पना कीजिए कि एक महिला एक ऊंचे पहाड़ पर चढ़ना चाहती है. वह उसके पूर्वी भाग को चढ़ने के लिए चुनती है. एक और व्यक्ति उसी पहाड़ पर चढ़ना चाहता है लेकिन वह उसकी पश्चिमी दिशा से चढ़ना शुरू करता है और शिखर पर पहुंचकर वे अपनी अपनी यात्रा का वर्णन करते हैं. भले ही वे एक ही पहाड़ पर चढ़े हैं, उनके वर्णन में बहुत अंतर होगा. धर्म भी ऐसे ही हैं. वे अपने समय और संस्कृति के अनुसार प्रासंगिक हैं. स्वाभाविक तौर पर उनमें अंतर होंगे. हमें एक धर्म की दूसरे धर्म से या एक पद्धति की दूसरी पद्धति से तुलना करने की जरूरत नहीं है. बस हमारे दिलों को, जो हम कर रहे हैं उसम पर भरोसा होना चाहिए .

आज अधिकांश लोग योग का अर्थ आसन और प्राणायाम करना या शायद इनके सत्र के अंत में 10 या 15 मिनट का ध्यान भी करना समझते हैं. लेकिन यह सच्चाई बिलकुल नहीं है. योग एक सम्पूर्ण पद्धति है जिसके आठ अंग हैं- यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि. अगर हम केवल अपने पसंद के हिस्से का अभ्यास करते हैं तो संतुलन नहीं रहता है. हार्टफुलनेस हमें संतुलन खोजना सिखाता है.

प्रश्न 7- हमें यूनाइटेड स्टेट्स के एक दवाओं के सफल व्यापारी, कमलेश पटेल, से दाजी बनने की अपनी यात्रा के बारे में बताइए. यह कैसे हुआ? किस कारण से आपने अपना पूरा समय हार्टफुलनेस को देना तय किया?

उत्तर- मैंने अपना दवाओं का पहला व्यापार न्यूयॉर्क शहर में जब शुरू किया तो मैं 24 वर्ष का था. अपने सपनों के पीछे चलने वाले अधिकांश लोगों की तरह मेरे पास अधिक धन नहीं था. वास्तव में मैं अपनी जेब में 20 डॉलर लेकर यूनाइटेड स्टेट्स पहुंचा था, लेकिन मुझमे अदम्य साहस था कि मैं सफलता जरूर पाऊंगा. वहां की व्यवस्था भी व्यवसायियों के लिए अनुकूल थी. मैंने 10,000 डॉलर की आरंभिक पूंजी से व्यापार शुरू किया. जब 2013 में मैंने अपने व्यापार का पूरा प्रबंधन औरों को सौंपा तो न्यूयॉर्क में हमारी दवाओं की 14 दुकानें थीं. यह यात्रा व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए बहुत ही संतुष्टिदायक थी. मुझे अपने भीतर से, अपने हृदय से अद्भुत मार्गदर्शन मिलता रहा. मैंने पाया है कि परेशानियों के समय अपनी आंखें बंद करके ध्यान करना सबसे अच्छा होता है. मैं 1976 से ध्यान कर रहा हूं जब मैं फार्मेसी का छात्र था और तब से ही इसने मेरी यात्रा में बहुत मदद की है. जब आपका मन ध्यान में डूबा होता है तो आपको हर समय सार्वभौमिक बुद्धिमत्ता से मार्गदर्शन मिलता है और आप वही निर्णय लेते हैं जो आपके काम के हैं.

हार्टफुलनेस ध्यान का अनुभव लेने के पहले भी मैं खुद ही ध्यान करने की कोशिश करता रहता था. मेरे एक मित्र ने मुझे एक हार्टफुलनेस प्रशिक्षक से मिलाया तो मुझे महसूस हुआ कि मैं सही समय पर सही जगह आ पहुंचा हूं. मैंने अपनी पूरी शक्तियां हार्टफुलनेस को सबके लिए सुलभ बनाने में लगा दी हैं. मुझे विश्वास है कि अगर हम शांति और सद्भाव के कुछ बीज बोते हैं तो सम्पूर्ण मानवता के सामूहिक अनुभव भी बदल जाएंगे.
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