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ऑफिस में इमोशनली वीक कर्मचारियों के साथ कैसे करें संवाद? जानें ये 4 स्टेप्स

ऑफिस में इमोशनली वीक कर्मचारियों के साथ कैसे करें संवाद? जानें ये 4 स्टेप्स

ये जानने की कोशिश करें कि क्या वो कर्मचारी जानता है कि उसके व्यवहार की वजह से क्या प्रभाव पड़ रहा है? (प्रतीकात्मक फोटो-Shutterstock.com)

ये जानने की कोशिश करें कि क्या वो कर्मचारी जानता है कि उसके व्यवहार की वजह से क्या प्रभाव पड़ रहा है? (प्रतीकात्मक फोटो-Shutterstock.com)

Dialog With Emotionally Weak Employee : वर्कप्लेस पर कर्मचारियों (Employees) को ऐसी भावनात्मक सुरक्षा (emotional security) जरूर मिलनी चाहिए, कि वो आपस में अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकें. यह महत्वपूर्ण है. लेकिन अगर कुछ कर्मचारी इसे कुछ ज्यादा ही आगे लेकर चले जाएं, तो ऐसे में उन्हें कैसे समझाएंगे? ये बड़ा सवाल है. रिपोर्ट में आगे लिखा है कि ज्यादा टैलेंटेड लोग ही ज्यादा असुरक्षित होते हैं. लेकिन मैनेजर्स भी लगातार सपोर्ट नहीं कर सकते, खासकर तब जब उससे पूरी टीम का हौंसला प्रभावित हो रहा हो. तो ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए, ये जानिए.

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    Dialog With Emotionally Weak Employee : अक्सर माना जाता है कि बेहतर ऑफिस के माहौल (Office Environment) से आपकी प्रोफेशनल ग्रोथ ही नहीं, बल्कि पर्सनल ग्रोथ भी जुड़ी होती है. लेकिन अगर आपके ऑफिस का माहौल ठीक नहीं है, तो इसका असर सिर्फ और सिर्फ  प्रोफेशनल लाइफ पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इससे आपकी पर्सनल लाइफ भी इफैक्ट होती है. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि ऑफिस में हमेशा पॉजिटिव माहौल बना रहे और अपने सहकर्मियों के साथ संवाद कभी भी खत्म नहीं होना चाहिए. दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट में कुछ स्टेप्स बताए गए हैं, जिनसे आप ऑफिस में भावनात्मक रूप से कमजोर कर्मचारी के साथ संवाद स्थापित कर सकते हैं. इस रिपोर्ट में लिखा है कि वर्कप्लेस पर कर्मचारियों (Employees) को ऐसी भावनात्मक सुरक्षा (emotional security) जरूर मिलनी चाहिए, कि वो आपस में अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकें. यह महत्वपूर्ण है. लेकिन अगर कुछ कर्मचारी इसे कुछ ज्यादा ही आगे लेकर चले जाएं, तो ऐसे में उन्हें कैसे समझाएंगे? ये बड़ा सवाल है.

    रिपोर्ट में आगे लिखा है कि ज्यादा टैलेंटेड लोग ही ज्यादा असुरक्षित होते हैं. लेकिन मैनेजर्स भी लगातार सपोर्ट नहीं कर सकते, खासकर तब जब उससे पूरी टीम का हौसला प्रभावित हो रहा हो. तो ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए, ये जानिए.

    एम्प्लाइज की अलर्टनेस को जांचें
    भावनात्मक रूप से कमजोर लोग अक्सर ये नहीं समझते कि वो सामने वाले को परेशान कर रहे हैं. ऐसे में एक मीटिंग रखें और ये जानने की कोशिश करें कि क्या वो जानता है कि उसके व्यवहार की वजह से क्या प्रभाव पड़ रहा है? बातचीत के जरिए उन्हें ये समझाया जा सकता है कि ऐसी भावनाएं जो परेशानी पैदा कर सकती है और वो भावनाएं जो सही हैं, उनमें क्या अंतर होता है.

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    शांति से समझाने की कोशिश करें
    बिना गुस्सा किए या बुरा बर्ताव किए उनसे कहें कि – मैं ये समझ नहीं पा रहा हूं कि आपको कैसे आश्वासन दूं? मैं चाहता हूं कि आप पता लगाएं कि ऐसा क्यों हो रहा है, जबकि मैं आपको आश्वासन देता हूं, तो भी आपको भरोसा नहीं होता. क्यों आपको बार-बार आश्वासन की जरूरत पड़ती है? ऐसा नहीं करेंगे तो असुरक्षा की भावना बनी रहेगी.

    उन्हें एहसास दिलाएं कि वो कमजोर नहीं, मजबूत हैं
    अगर आपको ऐसा लगता है कि किसी कर्मचारी की वजह से आप बहुत ज्यादा ही परेशान हो रहे हैं, तो ऐसे में उन्हें बुलाकर बात करें. आप उन्हें कोई उदाहरण देकर भी समझाने की कोशिश कर सकते हैं. या फिर उन्हें कुछ अन्य तरीके या सुझाव बताकर भी आप भावनात्मक रूप से उनकी काफी मदद कर सकते हैं.

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    गॉसिप की अनुमति नहीं होनी चाहिए 
    ऑफिस में जब सब लोग किसी एक कर्मचारी की कमजोरियों पर फोकस करके बात करना शुरू करते हैं, तो जल्द ही ये एक चलन सा बन जाता है. फिर हर कर्मचारी की कमजोरियों पर बात होने लगती है. इससे विश्वास कमजोर पढ़ जाता है और मानसिक असुरक्षा भी बढ़ जाती है. ऐसे में अपनी टीम को फीडबैक देने का सही तरीका सिखाया जा सकता है.

    Tags: Lifestyle, Office culture

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