प्रियजन के निधन के बाद संभालें खुद को, कुछ इस तरह खुद ही करें अपनी मदद: 7 बातें

प्रिय की मौत से खुद को ऐसे उबारें
प्रिय की मौत से खुद को ऐसे उबारें

किसी अपने के निधन के बाद खुद को कैसे संभाले, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काम कर रहीं कार्यकर्ता और लेटअसटॉक ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक और वेलनेस कोच कंचन राय से हमने बातचीत की....

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हाल ही में इरफ़ान खान (Iffran Khan) और फिर ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) के निधन के बाद हममें से कई लोगों की आंखें नम हुईं और दिल डूबा सा रहा. यह जानते हुए कि जीवन की दो ही सच्चाई हैं, जन्म और मृत्यु, हम निधन के गम को 'डील' करने के लिए कभी भी तैयार नहीं हो सकते हैं. खासतौर से तब, जब देहांत हमारे किसी अपने का हो. कोरोना वायरस (Coronavirus/ Covid 19) के संक्रमण काल (Lockdown) में लॉकडाउन के इस दौर में किसी अपने की मृत्यु और अधिक बेचैन कर देती है.

किसी अपने के निधन के बाद खुद को कैसे संभाले, मानसिक स्वास्थ्य को लेकर काम कर रहीं कार्यकर्ता और लेटअसटॉक ऑर्गनाइजेशन की संस्थापक और वेलनेस कोच कंचन राय से हमने बातचीत की. उन्होंने कहा कि प्रियजनों की क्षति के बाद खुद को संभालना वाकई बहुत मुश्किल काम है. क्योंकि एक खालीपन होता है जो किसी के जाने के बाद आ जाता है. जिसे हम प्यार करते हैं उसका नुकसान हमेशा ही दिल दुखाने वाला और दुखद होता है, फिर चाहे वह कोरोना-काल (कोविड-19) के बीच हो या किसी दूसरे समय में भी. हालांकि नुकसान का सामना करना एक गहरा व्यक्तिगत अनुभव होता है.

इन पांच पॉइंट्स में समझें...



1- वैसे यह कहना आसान है करना मुश्किल लेकिन यदि अपना प्रियजन काफी बीमार हो, या फिर काफी अधिक आयु का है तो यह करना कुछ ठीक होगा कि शोक की घड़ी का सामना करने के लिए खुद को तैयार करने की कोशिश करें. प्रत्येक व्यक्ति के पास दुख से निपटने का अपना- अपना अलग तरीका होता है.
2- दुख की भावनाओं से बचना शोक प्रक्रिया को लंबा खींच सकता है. इसके अलावा, दुख को दबाना क्रोध, चिंता और नशे का कारण बन सकता है. यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने अंदर उठने वाली भावनाओं को महसूस करें और तबाही और दिल टूटने के भाव को खुद से दूर न करें. जरूरत पड़ने पर खुद को रोने दें. विभिन्न भावनाओं का अनुभव करना सामान्य बात है. यह स्वीकार करना बहुत ही मुश्किल है कि आपने किसी अपने को हमेशा के लिए खो दिया है, आप इस घटना से स्‍तब्‍ध हो सकते हैं. आपके द्वारा महसूस की गई अत्यधिक उदासी एक सामान्य बात है लेकिन यह हमेशा के लिए नहीं रहेगी क्‍योंकि जीवन कभी एक जैसा नहीं होता.

3- प्रियजनों के साथ समय बिताने से सभी को दुख का सामना करने में मदद मिल सकती है. परिवार, दोस्तों, और अन्य लोगों के साथ अपने दुख के बारे में बात करें. कहानियों को साझा करना, अपने प्रियजन के पसंदीदा संगीत को सुनना, ये छोटे-छोटे प्रयास एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं.

4- आप जिस दौर से गुजर रहे हैं, उसके लिए अपने विचारों और भावनाओं को लिखना उपयोगी हो सकता है. अपने जीवन की दुखद परिस्थितियों में उत्पन्न अपने विचारों और भावनाओं को शब्दों में पिरोयें, जो आपकी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं.

5- शोक की लहर जीवन में ठहराव ला सकती है. अपने प्रियजनों की देखभाल करें और यह सुनिश्चित करें कि वे अपने स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं. पौष्टिक भोजन, व्यायाम और भरपूर नींद आपके शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर करने में मददगार हो सकते हैं. दूसरों की मदद करने से आपको और भी अच्छा महसूस होगा.

6- आप दुख बहुत दिनों तक महसूस नहीं कर सकते हैं. कुछ लोग व्यक्तिगत नुकसान से निपटने में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को बहुत मददगार पाते हैं. उन लोगों से बात करना भी सहायक हो सकता है जो आपके जैसे ही दुखद परिस्थितियों से गुजर रहे हैं. किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जो आपकी परवाह करता हो, और उसे अपनी परिस्थितियों के बारे में बताएं.

7- अपने खुद के प्रति दयावान रहें, यह जान लें कि जब आप एक दिन नींद से जागेंगे तो पाएंगे कि आपका दुख अब कुछ कम हो चुका है और जीवन चल सकता है. शोक के इस अंतिम चरण को "स्वीकृति" कहा जाता है. खुद से बात करें और सकारात्मक बात करें. ऊपर दिए गए बिन्दुओं को भी अमल में लाएं.
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